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खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर नीचे रामगंगा, बाढ़ प्रभावित गांवों में बढ़ी निगरानी

मुरादाबाद। लगातार हो रही बारिश के बीच रामगंगा समेत जिले की प्रमुख नदियों के जलस्तर पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। सोमवार को बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से जारी दैनिक गेज-वर्षा रिपोर्ट के अनुसार मुरादाबाद में रामगंगा नदी का जलस्तर 189.80 मीटर दर्ज किया गया। नदी का खतरे का निशान 190.60 मीटर निर्धारित है। इस लिहाज से रामगंगा फिलहाल खतरे के निशान से करीब 80 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।
रामगंगा के जलस्तर में होने वाले बदलाव पर संबंधित विभाग लगातार नजर रख रहे हैं। खासतौर पर उन गांवों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है, जो पूर्व में बाढ़ से प्रभावित रहे हैं या नदी के जलस्तर में वृद्धि होने पर जहां पानी पहुंचने की आशंका रहती है। अधिकारियों को हालात पर नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल देने के निर्देश दिए गए हैं।
खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर नीचे नदी
बाढ़ नियंत्रण विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक रामगंगा का जलस्तर 189.80 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 190.60 मीटर है। यानी नदी के जलस्तर और खतरे के निशान के बीच फिलहाल 80 सेंटीमीटर का अंतर है।
हालांकि लगातार बारिश के कारण प्रशासन किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता। नदी के जलस्तर में तेजी से बदलाव होने की स्थिति में निचले इलाकों में समस्या बढ़ सकती है। इसलिए जलस्तर की नियमित जानकारी जुटाई जा रही है।
बारिश जारी रहने की स्थिति में नदी में पानी की आवक बढ़ने की संभावना को देखते हुए बाढ़ नियंत्रण से जुड़े विभागों को सतर्क रखा गया है।
इन गांवों में बढ़ाई गई निगरानी
ठाकुरद्वारा और मूंढापांडे क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों पर विशेष नजर रखी जा रही है। मानपुर पट्टी, लालपुर तीतरी, खरक, शरीफनगर, सुरजननगर और भगतपुर टांडा समेत आसपास के निचले इलाकों में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है।
इन इलाकों में पानी की स्थिति के साथ ग्रामीणों की आवाजाही पर भी नजर रखी जा रही है। स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों को हालात की जानकारी लेते रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए नदी का बढ़ता जलस्तर चिंता का कारण बन सकता है। ऐसे में प्रशासन का जोर समय रहते स्थिति का आकलन करने और आवश्यक संसाधन तैयार रखने पर है।
पीएसी की दो नावें भेजीं
संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव की तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। प्रशासन की ओर से पीएसी की दो नावें प्रभावित क्षेत्रों के लिए भेजी गई हैं। जरूरत पड़ने पर इन नावों का इस्तेमाल ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए किया जाएगा।
आपात स्थिति में पानी से घिरे गांवों तक राहत सामग्री पहुंचाने, लोगों को निकालने और अन्य बचाव कार्यों में भी नावों की मदद ली जा सकेगी। प्रशासन की कोशिश है कि किसी इलाके में अचानक पानी बढ़ने पर राहत संसाधनों को पहुंचाने में देरी न हो।
नावों की तैनाती को एहतियाती कदम के तौर पर देखा जा रहा है। फिलहाल रामगंगा खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन मौसम और बारिश की स्थिति को देखते हुए पहले से तैयारियां की जा रही हैं।
ग्रामीणों की आवाजाही पर भी नजर
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में केवल नदी के जलस्तर की ही निगरानी नहीं की जा रही, बल्कि ग्रामीणों की आवाजाही और संपर्क मार्गों की स्थिति पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जलभराव बढ़ने पर कई बार गांवों को जोड़ने वाले रास्ते प्रभावित हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है।
प्रशासन निचले इलाकों में पानी के फैलाव की स्थिति पर लगातार जानकारी जुटा रहा है। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि गांवों में हालात बिगड़ने पर तत्काल उच्च अधिकारियों को सूचना दी जाए।
बारिश जारी रहने से बढ़ी सतर्कता
लगातार बारिश के कारण नदी-नालों में पानी बढ़ने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में आने वाले समय में होने वाली बारिश रामगंगा के जलस्तर के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। यदि नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में अधिक बारिश होती है तो जलस्तर में वृद्धि हो सकती है।
इसी कारण प्रशासन वर्तमान स्थिति को सामान्य मानकर निगरानी में ढील नहीं दे रहा है। बाढ़ नियंत्रण विभाग की रिपोर्ट के आधार पर जलस्तर में होने वाले उतार-चढ़ाव का आकलन किया जा रहा है।
आपात स्थिति के लिए तैयारी
प्रशासन का जोर इस बात पर है कि जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव कार्य तत्काल शुरू किए जा सकें। इसके लिए नावों की व्यवस्था के साथ बाढ़ प्रभावित गांवों की पहचान पहले से की गई है। संबंधित क्षेत्रों में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों को भी सतर्क रहने के लिए कहा गया है।
फिलहाल रामगंगा खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। इसके बावजूद लगातार बारिश के कारण स्थिति पर नजर बनाए रखना जरूरी हो गया है। आने वाले दिनों में नदी के जलस्तर और बारिश की मात्रा के आधार पर प्रशासन आगे की रणनीति तय करेगा।





