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छठी बार राज्यसभा जाने की तैयारी में राम गोपाल यादव, 1992 से लगातार संसद में मौजूद

उत्तरप्रदेश : समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पार्टी के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल प्रो. राम गोपाल यादव एक बार फिर राज्यसभा पहुंचने की तैयारी में हैं। उनका मौजूदा और पांचवां राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होने वाला है। इससे पहले उन्होंने बुधवार को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। लंबे समय से समाजवादी पार्टी की रणनीति और संगठन से जुड़े अहम फैसलों में सक्रिय रहने वाले राम गोपाल यादव को पार्टी का ‘थिंक टैंक’ भी माना जाता है।
प्रो. राम गोपाल यादव समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के चचेरे भाई हैं। वह वर्ष 1992 से लगातार संसद का हिस्सा रहे हैं। पांच बार राज्यसभा सदस्य रहने के अलावा वह एक बार संभल लोकसभा सीट से भी सांसद रहे हैं। बाद में उन्होंने लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर फिर राज्यसभा का रुख किया था। इसके बाद से वह उच्च सदन में समाजवादी पार्टी का प्रमुख चेहरा बने हुए हैं।
राम गोपाल यादव का नाम समाजवादी पार्टी के उन नेताओं में शामिल है, जिनकी भूमिका केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रही। पार्टी की नीतियों को आकार देने, संगठनात्मक फैसलों और संसदीय रणनीति तैयार करने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पार्टी के भीतर उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में है, जो लंबे राजनीतिक अनुभव के साथ संगठन और संसद दोनों की कार्यप्रणाली को अच्छी तरह समझते हैं।
समाजवादी पार्टी में वह राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी संभालते रहे हैं। पार्टी के संविधान से लेकर चुनावी तालमेल और राजनीतिक रणनीतियों तक कई महत्वपूर्ण मौकों पर उनकी भूमिका सामने आती रही है। इसी वजह से उन्हें सपा के रणनीतिकारों में प्रमुख स्थान दिया जाता है।
राज्यसभा के लिए राम गोपाल यादव ने 30 सितंबर को नामांकन दाखिल किया। समाजवादी पार्टी ने उनके साथ धनराज परिमल नाथवानी को भी उम्मीदवार बनाया है। उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान प्रस्तावित है।
राम गोपाल यादव का मौजूदा कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म होने वाला है। इससे पहले समाजवादी पार्टी ने उन्हें एक और कार्यकाल के लिए मैदान में उतारकर साफ संकेत दिया है कि पार्टी अभी भी उनके अनुभव को अहम मानती है। यदि वह इस बार भी राज्यसभा पहुंचते हैं तो यह उनका छठा कार्यकाल होगा। इसके साथ ही उनका संसदीय सफर एक और चरण में प्रवेश करेगा।
राम गोपाल यादव की राजनीतिक यात्रा तीन दशक से अधिक लंबी है। वर्ष 1992 से संसद में मौजूद रहने के दौरान उन्होंने कई राजनीतिक बदलावों को नजदीक से देखा है। केंद्र की सरकारों में बदलाव से लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बने नए समीकरणों तक वह लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। समाजवादी पार्टी के संगठनात्मक उतार-चढ़ाव के दौरान भी उनकी भूमिका बनी रही।
पार्टी के भीतर राम गोपाल यादव की छवि एक ऐसे वरिष्ठ नेता की रही है, जो पर्दे के पीछे रणनीति बनाने के साथ-साथ संसद में पार्टी का पक्ष रखने में भी सक्रिय रहते हैं। समाजवादी पार्टी के लिए राज्यसभा में उनका अनुभव कई मौकों पर महत्वपूर्ण रहा है। कानून, नीतियों और राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी की लाइन तय करने में भी उनकी भूमिका देखी जाती रही है।
राम गोपाल यादव अपनी निजी रुचियों को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल हलफनामे से सामने आया है कि उन्हें असलहों का शौक है। हालांकि उनकी मुख्य पहचान लंबे समय से एक सांसद, संगठनकर्ता और समाजवादी पार्टी के रणनीतिकार के तौर पर ही रही है।
मुलायम सिंह यादव के दौर से सक्रिय राम गोपाल यादव ने अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी में भी अपनी महत्वपूर्ण स्थिति बनाए रखी है। पार्टी नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव के बावजूद उनकी भूमिका कम नहीं हुई। यही कारण है कि राज्यसभा चुनाव में एक बार फिर उनके नाम पर भरोसा जताया गया है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी की ओर से उम्मीदवारों का नामांकन शुरू होने के साथ ही अब राजनीतिक नजरें आगे की चुनावी प्रक्रिया पर हैं। राम गोपाल यादव के नामांकन को पार्टी के भीतर अनुभव और निरंतरता को प्राथमिकता देने के फैसले के रूप में देखा जा रहा है।
करीब 34 वर्षों से लगातार संसदीय राजनीति में सक्रिय राम गोपाल यादव के लिए यह चुनाव खास है। पांच राज्यसभा कार्यकाल और एक लोकसभा कार्यकाल के बाद अब वह छठी बार उच्च सदन पहुंचने की तैयारी में हैं। उनका मौजूदा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होगा, लेकिन उससे पहले ही समाजवादी पार्टी ने उन्हें फिर मैदान में उतारकर अपने वरिष्ठ नेता पर भरोसा कायम रखा है।





