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सहारनपुर : उत्तर प्रदेश की राजनीति में सहारनपुर की प्रस्तावित रैली को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष **अखिलेश यादव** की 6 सितंबर को होने वाली बड़ी जनसभा को स्थगित कर दिया गया है। पार्टी की ओर से इसकी वजह **बारिश और खराब मौसम** बताई गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे **राष्ट्रीय लोकदल (RLD) प्रमुख जयंत चौधरी के साथ बढ़ती तल्खी** से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
सहारनपुर की यह रैली पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही थी। विधानसभा चुनाव से पहले सपा इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। ऐसे में अचानक रैली टलने के बाद कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
सपा ने बताई बारिश वजह
समाजवादी पार्टी नेताओं के अनुसार, रैली स्थल पर लगातार बारिश के कारण पानी भर गया था और मैदान में कीचड़ की स्थिति बन गई थी। ऐसे हालात में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों की मौजूदगी के बीच कार्यक्रम कराना मुश्किल था।
सपा नेता चौधरी इंद्रसेन ने कहा कि रैली रद्द नहीं हुई है, बल्कि इसे आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने दावा किया कि अगली रैली पहले से भी ज्यादा बड़ी होगी।
पार्टी का कहना है कि मौसम को देखते हुए यह व्यावहारिक फैसला लिया गया है और इसमें किसी राजनीतिक दबाव की बात नहीं है।
जयंत चौधरी से विवाद की चर्चा क्यों?
रैली स्थगित होने के साथ ही अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच चल रही बयानबाजी भी चर्चा में आ गई है।
दरअसल, अखिलेश यादव के एक बयान को लेकर राष्ट्रीय लोकदल ने नाराजगी जताई थी। जयंत चौधरी ने इसे जाट समाज के सम्मान से जोड़ते हुए प्रतिक्रिया दी थी। इसके बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दोनों नेताओं के बीच सियासी खींचतान की चर्चाएं तेज हो गईं।
इसी बीच जयंत चौधरी की 3 सितंबर को सहारनपुर के रामपुर मनिहारान में प्रस्तावित सभा भी है। ऐसे में दोनों नेताओं के कार्यक्रमों को लेकर राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा शुरू हो गई है।
क्या जाट वोट बैंक को लेकर बढ़ी चिंता?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट मतदाताओं की भूमिका काफी अहम मानी जाती है। जयंत चौधरी की पार्टी आरएलडी लंबे समय से इस समुदाय में प्रभाव रखती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए सपा किसी भी ऐसे विवाद को बढ़ाना नहीं चाहेगी, जिससे जाट वोटों पर असर पड़े।
हालांकि, सपा नेताओं का कहना है कि पार्टी सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की रणनीति पर काम कर रही है।
RLD ने साधा निशाना
रालोद नेताओं ने दावा किया कि अखिलेश यादव की रैली स्थगित होने के पीछे सिर्फ मौसम कारण नहीं है, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पैदा हुई राजनीतिक नाराजगी भी एक वजह हो सकती है।
रालोद प्रवक्ता रोहित अग्रवाल समेत कई नेताओं ने अखिलेश यादव के पुराने बयान को लेकर सवाल उठाए और इसे जाट समाज की भावना से जोड़ने की कोशिश की।
वहीं, समाजवादी पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि रैली मौसम के कारण टली है और पार्टी किसी दबाव में नहीं है।
अखिलेश का सहारनपुर दौरा जारी रहेगा
रैली स्थगित होने के बावजूद अखिलेश यादव का सहारनपुर दौरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। बताया गया है कि वह 2 सितंबर को सहारनपुर पहुंच सकते हैं और पार्टी नेताओं से मुलाकात करेंगे।
सपा इसे संगठन मजबूत करने और कार्यकर्ताओं से संवाद का हिस्सा बता रही है।
पश्चिमी यूपी में सियासी मुकाबला तेज
सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ और आसपास के जिले पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यहां किसान, जाट, मुस्लिम और पिछड़े वर्गों का चुनावी समीकरण काफी प्रभाव डालता है।
सपा, भाजपा और रालोद सभी दल इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
आगे क्या होगा?
अब नजर इस बात पर होगी कि अखिलेश यादव की सहारनपुर रैली कब आयोजित होती है और उसमें उनका राजनीतिक संदेश क्या रहता है।
अगर सपा दोबारा बड़ी सभा करती है तो यह जयंत चौधरी और पश्चिमी यूपी की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। वहीं, अगर दोनों दलों के बीच बयानबाजी जारी रहती है तो इसका असर चुनावी गठबंधन और वोट समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल सपा इसे मौसम से जुड़ा फैसला बता रही है, जबकि विपक्ष इसे पश्चिमी यूपी की बदलती सियासत से जोड़कर देख रहा है।
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