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50 साल तक जंजीरों में कैद रहा हाथी राजू, अब बदल गई जिंदगी

मथुरा। करीब पांच दशकों तक शोषण, क्रूरता और दर्दनाक परिस्थितियों का सामना करने वाला हाथी राजू अब एक सुरक्षित और बेहतर जीवन जी रहा है। कभी सड़कों पर भीख मंगवाने के लिए मजबूर किए गए राजू को वर्तमान में वाइल्डलाइफ एसओएस के हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यहां उसे नियमित पशु चिकित्सा देखभाल, पौष्टिक भोजन, आरामदायक वातावरण और शारीरिक एवं मानसिक जरूरतों के अनुरूप गतिविधियां दी जा रही हैं। संस्था के पशु चिकित्सक और देखभाल करने वाली टीम राजू के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रहे हैं। वर्ष 2014 में राजू को क्रूरता और बंधन से मुक्त कराने का अभियान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। अब उसका जीवन हाथियों के संरक्षण और पुनर्वास की एक प्रेरणादायक मिसाल बन गया है।
50 साल तक झेला अत्याचार और शोषण
राजू की जिंदगी का बड़ा हिस्सा बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। वाइल्डलाइफ एसओएस के अनुसार, उसे बचपन में ही उसके प्राकृतिक परिवेश और झुंड से अलग कर दिया गया था। इसके बाद कई वर्षों तक उसे अलग-अलग मालिकों के अधीन रहना पड़ा।
राजू को सड़कों पर लोगों से पैसे मांगने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। उसे नियंत्रित करने के लिए नुकीली जंजीरों और लोहे के अंकुश का इस्तेमाल होता था। लगातार मारपीट और अमानवीय व्यवहार के कारण उसके शरीर पर कई गंभीर घाव हो गए थे।
जब बचाव दल ने पहली बार राजू को देखा, तब उसकी हालत बेहद खराब थी। उसके पैरों में नुकीली जंजीरें बंधी थीं और शरीर पर पुराने घावों तथा फोड़ों के निशान मौजूद थे।
लंबे समय तक पर्याप्त भोजन और उचित चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिलने के कारण वह शारीरिक रूप से कमजोर हो चुका था।
वर्ष 2014 में मिली नई जिंदगी
राजू को 4 जुलाई 2014 को वाइल्डलाइफ एसओएस और उत्तर प्रदेश वन विभाग के संयुक्त प्रयासों से मुक्त कराया गया था।
उस समय राजू की उम्र लगभग 50 वर्ष बताई गई थी। बचाव अभियान की सफलता के लिए वन विभाग और संस्था की टीम को लंबी कानूनी तथा प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ा था।
आवश्यक अनुमति और अदालती आदेश मिलने के बाद विशेषज्ञों की टीम ने राजू को सुरक्षित निकालने का अभियान शुरू किया।
बचाव के बाद उसे विशेष वाहन से मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र पहुंचाया गया।
राजू को जंजीरों से मुक्त कराने का दृश्य दुनिया भर में चर्चा का विषय बना। उसके बचाव की तस्वीरों और वीडियो ने हाथियों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार की गंभीर समस्या की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
बचाव के समय शरीर पर थे गंभीर घाव
वाइल्डलाइफ एसओएस के अनुसार, राजू जब संरक्षण केंद्र पहुंचा, तब उसे तत्काल चिकित्सा उपचार की आवश्यकता थी।
उसके पैरों में जंजीरों के कारण गहरे घाव हो गए थे। शरीर के कई हिस्सों में पुराने फोड़े और चोटों के निशान थे। विशेष रूप से उसके बाएं कूल्हे पर पुराना घाव चिकित्सकों के लिए चुनौती बना हुआ था।
पशु चिकित्सकों ने राजू के घावों का उपचार शुरू किया और उसकी शारीरिक स्थिति के अनुसार विशेष आहार निर्धारित किया।
उसके स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए जरूरी दवाइयां, पोषण संबंधी सप्लीमेंट और नियमित निगरानी की व्यवस्था की गई।
राजू के पुराने घावों की प्रकृति को देखते हुए संस्था उसकी चिकित्सा देखभाल लगातार जारी रखे हुए है।
पौष्टिक भोजन से बेहतर हुई सेहत
संरक्षण केंद्र में राजू के भोजन और पोषण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उसे उसकी उम्र, स्वास्थ्य और शारीरिक जरूरतों के अनुसार संतुलित आहार उपलब्ध कराया जाता है।
संस्था के अनुसार, राजू को गन्ना और खरबूजा विशेष रूप से पसंद हैं। इसके अलावा उसके आहार में ताजे फल तथा अन्य पौष्टिक खाद्य सामग्री शामिल की जाती है।
लंबे समय तक कुपोषण और शोषण झेलने के कारण राजू के लिए सही पोषण बेहद महत्वपूर्ण रहा है।
देखभाल करने वाली टीम उसके भोजन और दैनिक गतिविधियों का ध्यान रखती है। इससे उसके स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल रही है।
पानी में नहाना और टायर से खेलना पसंद
राजू के पुनर्वास में शारीरिक उपचार के साथ मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जा रहा है।
संरक्षण केंद्र में उसे खुले वातावरण में घूमने और अपनी पसंद की गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलता है।
राजू को पानी में नहाना और खेलना विशेष रूप से पसंद है। उसके बाड़े में पानी का कुंड उपलब्ध है, जहां वह समय बिता सकता है।
इसके अलावा राजू को रबर के टायर से खेलना भी अच्छा लगता है। ऐसी गतिविधियां हाथियों को शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रखने में मदद करती हैं।
संस्था के अनुसार, पानी में रहने से राजू को गर्मी से राहत मिलती है और उसके पैरों तथा जोड़ों पर पड़ने वाला भार भी कुछ कम होता है।
हाथियों के लिए विशेष संरक्षण केंद्र
मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र की स्थापना वर्ष 2010 में वाइल्डलाइफ एसओएस ने उत्तर प्रदेश वन विभाग के सहयोग से की थी।
इस केंद्र का उद्देश्य उन हाथियों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करना है, जिन्हें वर्षों तक शोषण, उपेक्षा या कठिन परिस्थितियों में रखा गया था।
यहां बचाए गए हाथियों को नियमित चिकित्सा देखभाल, पौष्टिक भोजन और उनकी प्राकृतिक जरूरतों के अनुरूप वातावरण उपलब्ध कराया जाता है।
संस्था हाथियों के पुनर्वास के लिए विशेष चिकित्सा सुविधाएं और व्यवहार संबंधी देखभाल भी प्रदान करती है।
केंद्र में खुले स्थान, पेड़-पौधे और पानी की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि हाथी अपेक्षाकृत प्राकृतिक वातावरण में समय बिता सकें।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था राजू का बचाव
राजू को बचाने की घटना ने देश-विदेश में वन्यजीव प्रेमियों और पशु अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों का ध्यान आकर्षित किया था।
उसकी कहानी ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया कि मनोरंजन, भीख मंगवाने और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए हाथियों का इस्तेमाल किस तरह उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
वाइल्डलाइफ एसओएस के अनुसार, राजू का बचाव हाथियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
इस अभियान से प्रेरित होकर अनेक लोगों ने बंदी हाथियों के कल्याण और संरक्षण के प्रयासों का समर्थन किया।
राजू की कहानी देती है संरक्षण का संदेश
राजू का जीवन इस बात का उदाहरण है कि लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में रहने वाले वन्यजीवों को उचित चिकित्सा, पोषण और सुरक्षित वातावरण मिलने पर उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार संभव है।
हालांकि, पुराने घावों और उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के कारण उसकी नियमित देखभाल बेहद जरूरी है।
वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम राजू को बेहतर जीवन उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
कभी नुकीली जंजीरों में जकड़ा राजू अब सुरक्षित वातावरण में समय बिता रहा है। उसकी कहानी वन्यजीव संरक्षण, पशु कल्याण और मानवीय संवेदनशीलता का महत्वपूर्ण संदेश देती है।





