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उत्तर प्रदेश
अखिलेश यादव की सत्ता वापसी पर राजभर का बड़ा बयान
Rajeshwari Nishad
19 Oct 2026 4:57 PM IST

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हापुड़। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी हलचल तेज होने लगी है। चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज होता जा रहा है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साध रहे हैं। वहीं, अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। हापुड़ पहुंचे प्रदेश सरकार के मंत्री राजभर ने दावा किया कि अखिलेश यादव अब सत्ता में वापस लौटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कन्नौज में आयोजित पीडीए सम्मेलन में खाली कुर्सियों के मुद्दे को लेकर भी सपा अध्यक्ष पर निशाना साधा।
अखिलेश यादव पर राजभर का सियासी हमला
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा और उसके सहयोगी दल विपक्षी समाजवादी पार्टी की रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सपा की ओर से भी सरकार की नीतियों और कामकाज को लेकर लगातार हमला किया जा रहा है।
इसी राजनीतिक माहौल के बीच ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा अध्यक्ष की सत्ता में वापसी की संभावना नहीं है। राजभर का बयान ऐसे समय में आया है, जब प्रदेश में विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने जनाधार को मजबूत करने और मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
राजभर एनडीए के सहयोगी दल सुभासपा के अध्यक्ष हैं और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी हैं। ऐसे में उनका बयान विपक्ष के खिलाफ गठबंधन की राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, चुनाव में किस दल को कितनी सफलता मिलेगी, इसका फैसला मतदाता करेंगे और अभी से किसी नतीजे पर पहुंचना संभव नहीं है।
कन्नौज के पीडीए सम्मेलन को लेकर साधा निशाना
हापुड़ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राजभर ने कन्नौज में हुए समाजवादी पार्टी के पीडीए सम्मेलन में खाली कुर्सियों के मुद्दे को उठाया। उन्होंने इस मामले के जरिए अखिलेश यादव के नेतृत्व और सपा के जनसमर्थन पर सवाल खड़े किए।
पीडीए समाजवादी पार्टी की राजनीतिक रणनीति का एक अहम हिस्सा है। इसके जरिए पार्टी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों सहित विभिन्न सामाजिक समूहों को एक मंच पर लाने की कोशिश करती है। अखिलेश यादव लगातार पीडीए की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए भाजपा की राजनीति और नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं।
ऐसे में किसी सम्मेलन में खाली कुर्सियों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी होना दोनों पक्षों के बीच जारी सियासी खींचतान को दर्शाता है। राजभर ने इसी मुद्दे को आधार बनाकर सपा अध्यक्ष पर हमला बोला और उनकी राजनीतिक ताकत पर सवाल उठाए।
हालांकि, किसी एक कार्यक्रम में खाली कुर्सियों के आधार पर किसी पार्टी के पूरे जनाधार का आकलन करना उचित नहीं होगा। इसके लिए चुनावी नतीजों, जनसभाओं में भागीदारी और अन्य राजनीतिक संकेतकों को भी देखना जरूरी है।
2027 के चुनाव के लिए दलों ने शुरू की तैयारी
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा, समाजवादी पार्टी और अन्य राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करना, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना, विभिन्न सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाना और जनता के बीच अपनी उपलब्धियों तथा मुद्दों को उठाना सभी दलों की प्राथमिकताओं में शामिल है।
भाजपा और उसके सहयोगी दल जहां सरकार के कामकाज और अपनी राजनीतिक योजनाओं को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं सपा सरकार को घेरने के लिए विभिन्न मुद्दों को उठा रही है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला आने वाले महीनों में और तेज हो सकता है।
ओम प्रकाश राजभर का बयान इसी व्यापक राजनीतिक गतिविधि का हिस्सा है। उनके हमले से यह स्पष्ट है कि एनडीए के सहयोगी दल भी विपक्ष की रणनीति और कार्यक्रमों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
पीडीए बनाम एनडीए की राजनीति पर रहेगी नजर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक समीकरणों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। राजनीतिक दल अलग-अलग जातीय और सामाजिक समूहों को अपने साथ जोड़ने के लिए अभियान चलाते हैं। समाजवादी पार्टी पीडीए के जरिए व्यापक सामाजिक समर्थन जुटाने का प्रयास कर रही है, जबकि एनडीए भी अपने सहयोगी दलों के माध्यम से विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाने की रणनीति पर काम करता है।
ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा भी प्रदेश की राजनीति में अपने समर्थक वर्ग के बीच प्रभाव बनाए रखने की कोशिश करती है। एनडीए में शामिल होने के बाद पार्टी की भूमिका गठबंधन की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है।
हालांकि, किसी भी गठबंधन की सफलता केवल नेताओं के बयानों से तय नहीं होती। इसके लिए संगठन की मजबूती, स्थानीय मुद्दों पर पकड़, उम्मीदवारों का चयन और मतदाताओं का समर्थन अहम होता है। आगामी चुनाव में इन सभी पहलुओं की परीक्षा होगी।
बयानबाजी से गरमाया प्रदेश का राजनीतिक माहौल
अखिलेश यादव और ओम प्रकाश राजभर के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से उत्तर प्रदेश का चुनावी माहौल धीरे-धीरे गर्म होने लगा है। एक ओर सपा अध्यक्ष भाजपा पर हमलावर हैं, तो दूसरी ओर राजभर जैसे एनडीए नेता विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं।
कन्नौज के पीडीए सम्मेलन में खाली कुर्सियों का मुद्दा अब राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बन गया है। राजभर ने इसे अखिलेश यादव के खिलाफ इस्तेमाल करते हुए दावा किया कि सपा अध्यक्ष सत्ता में वापस नहीं लौटेंगे। दूसरी ओर, इस बयान का वास्तविक राजनीतिक असर आने वाले समय में ही स्पष्ट हो सकेगा।
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