उत्तर प्रदेश

राजभर ने की अफसरों की CM से शिकायत

Kavita2
2 Sept 2026 9:06 AM IST
राजभर ने की अफसरों की CM से शिकायत
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में पंचायती राज विभाग के मंत्री ओम प्रकाश राजभर के सामने अब अपने ही विभाग के अधिकारियों को लेकर नई परेशानी खड़ी हो गई है। विभाग में मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच सब कुछ ठीक नहीं चलने की चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर विभागीय कामकाज और उच्च स्तर पर लिए गए फैसलों को लागू करने के तरीके से नाराज हैं। इसी नाराजगी के बीच उन्होंने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर अपने विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार और निदेशक अमित सिंह की शिकायत की है।

मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। बताया जा रहा है कि राजभर लंबे समय से विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यशैली से असंतुष्ट हैं। उनकी नाराजगी की मुख्य वजह उच्च स्तर पर लिए गए निर्णयों को अपेक्षित तरीके से लागू नहीं किया जाना बताई जा रही है। मंत्री का मानना है कि विभागीय फैसलों और निर्देशों पर तेजी से काम होना चाहिए लेकिन कई मामलों में अधिकारियों की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है।

सूत्रों के अनुसार मंत्री और अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी अब इस स्तर तक पहुंच गई है कि मामला सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने रखा गया है। राजभर ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार और निदेशक अमित सिंह के कामकाज को लेकर अपनी बात रखी। हालांकि मुख्यमंत्री के स्तर से इस मामले में आगे क्या फैसला लिया जाएगा इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

चर्चा यह भी है कि ओम प्रकाश राजभर दोनों अधिकारियों को मौजूदा जिम्मेदारी से हटवाना चाहते हैं। इसके पीछे विभागीय स्तर पर लिए गए कुछ फैसलों को लागू करने में कथित देरी और मंत्री के निर्देशों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिलना कारण बताया जा रहा है। हालांकि अधिकारियों को हटाने या उनके विभाग में बदलाव को लेकर अभी कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है।

पंचायती राज विभाग उत्तर प्रदेश सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में शामिल है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों से जुड़े विकास कार्यों से लेकर स्वच्छता और स्थानीय प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य इसी विभाग के माध्यम से संचालित होते हैं। ऐसे में विभाग के मंत्री और शीर्ष अधिकारियों के बीच तालमेल बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर दोनों स्तरों पर मतभेद बढ़ते हैं तो इसका असर विभागीय योजनाओं और निर्णयों के क्रियान्वयन पर भी पड़ सकता है।

ओम प्रकाश राजभर अपने बयानों और कार्यशैली को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। सरकार में मंत्री रहते हुए भी वह कई मुद्दों पर अपनी बात खुलकर रखते रहे हैं। इस बार मामला सीधे उनके अपने विभाग से जुड़ा हुआ है। इसलिए राजनीतिक हलकों में भी इस घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। सवाल उठ रहा है कि मुख्यमंत्री के सामने शिकायत पहुंचने के बाद क्या पंचायती राज विभाग में प्रशासनिक स्तर पर कोई बड़ा बदलाव किया जाएगा या फिर मंत्री और अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास होगा।

विभागीय स्तर पर पैदा हुई यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सामान्य तौर पर किसी विभाग की योजनाओं और नीतिगत फैसलों को जमीन पर लागू करने के लिए मंत्री और नौकरशाही के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होता है। मंत्री राजनीतिक और नीतिगत स्तर पर प्राथमिकताएं तय करते हैं जबकि अधिकारी उन फैसलों को प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत लागू करने की जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच मतभेद होने पर कामकाज प्रभावित होने की आशंका रहती है।

फिलहाल राजभर की शिकायत के बाद सभी की निगाहें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से मामले का संज्ञान लेकर अधिकारियों के कामकाज की समीक्षा की जाती है तो पंचायती राज विभाग में महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। दूसरी ओर सरकार आपसी समन्वय के जरिए विवाद को खत्म करने का रास्ता भी निकाल सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम में अभी तक प्रमुख सचिव अनिल कुमार और निदेशक अमित सिंह की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मंत्री की शिकायत के पीछे विभागीय स्तर पर किन फैसलों को लेकर सबसे अधिक नाराजगी है इसकी पूरी तस्वीर आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

फिलहाल इतना साफ है कि पंचायती राज विभाग में मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कथित मतभेद का मामला अब विभाग की सीमा से निकलकर मुख्यमंत्री तक पहुंच चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले में क्या फैसला लेते हैं और क्या विभाग के शीर्ष अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव होता है इस पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों हलकों की नजर बनी हुई है।

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