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12 साल की बहन की आंखों की सर्जरी के नाम पर जुटाई आर्थिक मदद

आगरा। 12 वर्षीय बहन की आंखों की सर्जरी के नाम पर इंटरनेट पर भावुक अपील कर लोगों से आर्थिक मदद जुटाने का मामला सामने आया है। बाह निवासी जय सिंह राठौड़ उर्फ अजयवीर सिंह पर दिल्ली के श्राफ आई सेंटर के नाम से कथित फर्जी चिकित्सा प्रपत्रों का इस्तेमाल कर लोगों से धनराशि लेने का आरोप लगाया गया है। मामले में रकाबगंज के ईदगाह निवासी इन्फ्लुएंसर मदन मोहन सोनी ने बाह थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
शिकायत के मुताबिक जय सिंह राठौड़ ने अपने एक्स अकाउंट के जरिए अपनी 12 वर्षीय बहन की आंखों की गंभीर बीमारी का हवाला देते हुए आर्थिक मदद की अपील की थी। अपील में बताया गया था कि उसकी बहन ग्लूकोमा और विट्रियस हेमरेज से पीड़ित है। साथ ही दावा किया गया था कि समय पर इलाज और सर्जरी नहीं होने पर उसकी दृष्टि जाने का खतरा है।
बहन की गंभीर बीमारी और आंखों की रोशनी जाने के खतरे का उल्लेख करते हुए इंटरनेट पर लोगों से आर्थिक सहयोग मांगा गया। आरोप है कि इस अपील को विश्वसनीय बनाने के लिए दिल्ली के श्राफ आई सेंटर के नाम से चिकित्सा से संबंधित कुछ प्रपत्र भी प्रस्तुत किए गए थे।
अब इन्हीं चिकित्सा दस्तावेजों की सत्यता पर सवाल उठे हैं। शिकायतकर्ता मदन मोहन सोनी ने आरोप लगाया है कि आर्थिक सहायता जुटाने के लिए इस्तेमाल किए गए चिकित्सा प्रपत्र कथित रूप से फर्जी हैं। इसी आरोप के आधार पर उन्होंने बाह थाने में शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की।
मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद अब पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल चिकित्सा दस्तावेजों की सत्यता का है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित प्रपत्र वास्तव में श्राफ आई सेंटर की ओर से जारी किए गए थे या नहीं। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही इस संबंध में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
इसके अलावा पुलिस के लिए यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि सोशल मीडिया पर की गई अपील के बाद कितने लोगों ने आर्थिक मदद की और कुल कितनी धनराशि जुटाई गई। यदि ऑनलाइन माध्यम से आर्थिक लेन-देन हुआ है तो उससे जुड़े रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं।
मदन मोहन सोनी की ओर से दर्ज कराए गए मामले में जय सिंह राठौड़ उर्फ अजयवीर सिंह पर लोगों से धनराशि लेने के लिए कथित फर्जी चिकित्सा प्रपत्र इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस की जांच और संबंधित चिकित्सा संस्थान से दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही होगी।
मामले में इस्तेमाल किए गए एक्स अकाउंट की गतिविधियां भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकती हैं। पुलिस संबंधित पोस्ट, उसमें लिखी गई जानकारी और उसके साथ साझा किए गए दस्तावेजों की जांच कर सकती है। इसके साथ ही आर्थिक सहायता के लिए किस माध्यम से धनराशि मांगी गई और लोगों ने किस माध्यम से भुगतान किया, यह भी जांच का हिस्सा हो सकता है।
आरोप के मुताबिक ऑनलाइन अपील में बच्ची की स्थिति को गंभीर बताते हुए लोगों से मदद मांगी गई थी। बहन को ग्लूकोमा और विट्रियस हेमरेज होने की बात कही गई थी। दृष्टि जाने के खतरे का उल्लेख होने के कारण अपील ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
ऐसे मामलों में चिकित्सा दस्तावेज आर्थिक सहायता देने वाले लोगों के लिए बीमारी और इलाज से संबंधित दावों की पुष्टि का प्रमुख आधार होते हैं। इसी वजह से इस मामले में संबंधित अस्पताल के नाम से लगाए गए दस्तावेजों की सत्यता महत्वपूर्ण हो गई है।
पुलिस जांच में यह भी पता लगाया जा सकता है कि कथित चिकित्सा प्रपत्र किसने तैयार किए और उन्हें सोशल मीडिया पर किस तरह इस्तेमाल किया गया। यदि दस्तावेजों में किसी तरह की छेड़छाड़ या कूटरचना सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक आर्थिक मदद जुटाने के पीछे बहन की सर्जरी को कारण बताया गया था। ऐसे में बच्ची का वास्तव में कहां इलाज हुआ, चिकित्सकों ने उसकी बीमारी को लेकर क्या जानकारी दी थी और सर्जरी की आवश्यकता के संबंध में कौन से दस्तावेज जारी किए गए थे, इन बिंदुओं की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल मामला आरोप और जांच के स्तर पर है। इसलिए शिकायत में जिन चिकित्सा दस्तावेजों को कथित रूप से फर्जी बताया गया है, उनके बारे में जांच पूरी होने से पहले कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
इंटरनेट और सोशल मीडिया पर इलाज के लिए आर्थिक सहायता मांगना आम होता जा रहा है। कई जरूरतमंद परिवार ऑनलाइन माध्यम से लोगों तक अपनी बात पहुंचाकर इलाज के लिए धनराशि जुटाते हैं। ऐसे मामलों में सहायता करने वाले लोग आमतौर पर चिकित्सा रिपोर्ट, अस्पताल के दस्तावेज और इलाज के अनुमान के आधार पर आर्थिक सहयोग करते हैं।
यही कारण है कि ऑनलाइन मदद की अपील में लगाए जाने वाले दस्तावेजों की प्रामाणिकता बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि दस्तावेजों की सत्यता को लेकर विवाद खड़ा होता है तो आर्थिक सहायता देने वाले लोगों के विश्वास पर भी असर पड़ सकता है।
बाह थाने में दर्ज मामले की जांच के दौरान डिजिटल साक्ष्यों के साथ चिकित्सा दस्तावेजों और आर्थिक लेन-देन से संबंधित रिकॉर्ड की भूमिका महत्वपूर्ण रहने की संभावना है। संबंधित एक्स अकाउंट से की गई अपील और उसके साथ साझा की गई सामग्री भी जांच के दायरे में आ सकती है।
मामले में बच्ची की उम्र केवल 12 वर्ष बताई गई है। ऐसे में उसकी पहचान और व्यक्तिगत चिकित्सा जानकारी की गोपनीयता बनाए रखना भी जरूरी है। जांच का मुख्य केंद्र शिकायत में नामजद व्यक्ति की भूमिका, कथित चिकित्सा प्रपत्र और आर्थिक मदद के रूप में जुटाई गई धनराशि से जुड़े तथ्य होंगे।
फिलहाल रकाबगंज के ईदगाह निवासी इन्फ्लुएंसर मदन मोहन सोनी की शिकायत पर बाह थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। जय सिंह राठौड़ उर्फ अजयवीर सिंह पर बहन की आंखों की सर्जरी के नाम पर लोगों से आर्थिक मदद जुटाने और इसके लिए दिल्ली के श्राफ आई सेंटर के नाम से कथित फर्जी चिकित्सा प्रपत्र इस्तेमाल करने का आरोप है।
अब पुलिस जांच और चिकित्सा दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि ऑनलाइन अपील के जरिए कितनी धनराशि जुटाई गई और शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य सामने आते हैं।





