- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- नेपाल की बारिश से तटीय...

x
गोंडा। नेपाल की पहाड़ियों और उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में हो रही भारी बारिश के कारण घाघरा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नेपाल के बैराजों से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद एल्गिन ब्रिज पर नदी खतरे के निशान को पार कर गई है। मौजूदा सीजन में घाघरा का सबसे अधिक डिस्चार्ज दर्ज किए जाने से तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। जिला प्रशासन और बाढ़ खंड के अधिकारी संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रख रहे हैं।
रविवार सुबह आठ बजे जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी का जलस्तर 106.110 मीटर दर्ज किया गया। यहां नदी का खतरे का निशान 106.070 मीटर है। इस तरह घाघरा खतरे के स्तर से चार सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
अयोध्या में नदी का जलस्तर 92.390 मीटर पर स्थिर बताया गया है। हालांकि नेपाल और मैदानी क्षेत्रों से आ रहे पानी के कारण घाघरा में कुल डिस्चार्ज बढ़कर 3 लाख 43 हजार 939 क्यूसेक पहुंच गया है। अधिकारियों के मुताबिक पानी की मात्रा अभी बढ़ रही है, जिससे अगले 24 घंटों के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है।
बैराजों से छोड़े गए पानी के आंकड़ों के अनुसार गिरिजा बैराज से 1 लाख 83 हजार 738 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। शारदा बैराज से 1 लाख 53 हजार 584 क्यूसेक और सरयू बैराज से 6 हजार 617 क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया। तीनों बैराजों से छोड़े गए पानी के कारण घाघरा का प्रवाह तेज हुआ है। इसका प्रभाव एल्गिन ब्रिज और नदी के तटीय क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है।
घाघरा के बढ़ते जलस्तर से करनैलगंज तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों में हड़कंप मच गया है। नदी के किनारे और तटबंध के अंदर रहने वाले लोगों ने जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों को आशंका है कि जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो पानी आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश कर सकता है।
नकहरा ग्राम पंचायत के नौ मजरे सीधे तौर पर बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। इसके अलावा बांध के भीतरी हिस्से में बसे बेहटा, मांझा रायपुर, नैपुरा और परसावल गांवों पर भी खतरा मंडरा रहा है। इन गांवों के खेत और संपर्क मार्ग नदी के बढ़ते पानी से प्रभावित हो सकते हैं। पशुओं के चारे और ग्रामीणों के आवागमन को लेकर भी परेशानी बढ़ने की आशंका है।
पिछले वर्षों में घाघरा का जलस्तर बढ़ने पर तटीय गांवों में पानी भरने, खेती को नुकसान पहुंचने और संपर्क मार्ग कटने जैसी स्थितियां सामने आ चुकी हैं। इस बार भी तेजी से बढ़ता डिस्चार्ज ग्रामीणों की चिंता का बड़ा कारण बन गया है। नदी की तेज धारा के कारण तटबंधों और कटान प्रभावित स्थानों पर दबाव बढ़ सकता है।
स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और बाढ़ खंड के अधिकारी अलर्ट मोड पर हैं। संवेदनशील तटबंधों पर कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। नदी के जलस्तर, प्रवाह और कटान की नियमित जानकारी ली जा रही है। बाढ़ से निपटने के लिए राहत एवं बचाव कार्यों से जुड़ी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
अधिकारियों ने निचले और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। ग्रामीणों से नदी के तेज बहाव के पास नहीं जाने, बच्चों और पशुओं को सुरक्षित रखने तथा प्रशासन की चेतावनी का पालन करने को कहा गया है। प्रशासन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए बचाव दल और आवश्यक संसाधन तैयार रखे गए हैं।
नेपाल और मैदानी क्षेत्रों में बारिश जारी रहने की स्थिति में घाघरा का जलस्तर और बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले 24 घंटे तटीय गांवों और प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। बाढ़ खंड की टीमें नदी के जलस्तर और तटबंधों की सुरक्षा पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
TagsNepal rain crisis in coastal areasनेपालबारिशतटीयइलाकोंसंकटजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





