उत्तर प्रदेश

बारिश ने खोली लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता की पोल

Kavita2
11 Aug 2026 9:12 AM IST
बारिश ने खोली लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता की पोल
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लखनऊ। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस बार मानसून में अनुमान से कम बारिश होने के बावजूद एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में सड़क की हालत खराब होती दिखाई दे रही है। रविवार को हुई बारिश के बाद उन स्थानों पर भी सड़क उखड़ने लगी है, जहां पहले गड्ढे होने के कारण सड़क को उखाड़कर दोबारा बनाया गया था। मरम्मत के कुछ समय बाद ही तारकोल के उखड़ने और सड़क पर दरारें पड़ने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

एक्सप्रेसवे के किमी 63.8 और 63.9 के पास सड़क के उस हिस्से में दोबारा खराबी सामने आई है, जहां पूर्व में सड़क पर गड्ढे बनने के बाद उसे उखाड़कर नए सिरे से बनाया गया था। रविवार को हुई बारिश के बाद यहां मरम्मत किए गए हिस्से का तारकोल फिर से उखड़ने लगा। सड़क की सतह पर जगह-जगह दरारें भी नजर आने लगी हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि जब कम बारिश में ही मरम्मत की गई सड़क की परत टिक नहीं पा रही है तो तेज बारिश के दौरान एक्सप्रेसवे की स्थिति क्या होगी।

पहले गड्ढे, फिर मरम्मत और अब दोबारा खराबी

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद से ही सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। जिन स्थानों पर सड़क पर गड्ढे या अन्य खामियां सामने आईं, वहां संबंधित हिस्सों को उखाड़कर दोबारा सड़क बनाने का काम किया गया। उम्मीद थी कि मरम्मत के बाद सड़क लंबे समय तक सुरक्षित और मजबूत रहेगी, लेकिन बारिश के बाद फिर से उसी तरह की समस्या सामने आने लगी है।

किमी 63.8 और 63.9 के पास दिखाई दे रही स्थिति ने मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क की ऊपरी परत का तारकोल उखड़ना शुरू हो गया है और कुछ स्थानों पर दरारें भी दिखाई दे रही हैं। ऐसे में वाहन चालकों के लिए भी यह चिंता का विषय बन गया है। यदि सड़क की खराबी समय रहते ठीक नहीं की गई तो आने वाले दिनों में यहां गड्ढे दोबारा बन सकते हैं।

कम बारिश में ही सामने आई खामी

इस बार मानसून में अभी तक बारिश अनुमान से कम बताई जा रही है। इसके बावजूद एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में जल निकासी और सड़क की सतह से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं। रविवार की बारिश के बाद सड़क की स्थिति ने एक्सप्रेसवे के निर्माण और मरम्मत कार्य की गुणवत्ता की वास्तविकता सामने ला दी है।

जानकारों के मुताबिक किसी भी एक्सप्रेसवे की मजबूती में सड़क की ऊपरी परत के साथ-साथ उसके नीचे की लेयर, जल निकासी और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि बारिश का पानी सड़क की परतों में पहुंचता है या समय पर बाहर नहीं निकलता, तो सड़क की ऊपरी परत कमजोर होकर टूटने और उखड़ने लगती है। ऐसे में एक्सप्रेसवे पर दिखाई दे रही दरारों और उखड़ते तारकोल की जांच जरूरी हो जाती है।

किमी 57.5 पर जलभराव

एक्सप्रेसवे के किमी 57.5 पर बारिश के बाद एक अलग समस्या भी सामने आई। यहां ड्रेनेज व्यवस्था सही नहीं होने के कारण बारिश का पानी सड़क के आसपास जमा दिखाई दिया। एक्सप्रेसवे जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर बारिश के पानी की निकासी के लिए प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम होना बेहद जरूरी है। पानी जमा रहने से सड़क की सतह को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है।

यदि जल निकासी की समस्या लगातार बनी रहती है तो सड़क के नीचे की परत में पानी पहुंचने की संभावना रहती है। इससे सड़क की मजबूती प्रभावित हो सकती है और समय के साथ गड्ढे तथा दरारें बढ़ सकती हैं। इसलिए किमी 57.5 पर जमा पानी ने भी एक्सप्रेसवे की ड्रेनेज व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वाहनों की आवाजाही पर भी असर का खतरा

लखनऊ-कानपुर के बीच आवागमन के लिए एक्सप्रेसवे महत्वपूर्ण मार्ग है। रोजाना बड़ी संख्या में वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। ऐसे में सड़क की सतह पर दरारें और तारकोल का उखड़ना आगे चलकर यातायात के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। बारिश का सिलसिला जारी रहने पर यदि खराब हिस्सों की तत्काल मरम्मत नहीं की गई तो समस्या और बढ़ सकती है।

विशेष रूप से उन हिस्सों पर अधिक निगरानी की जरूरत है, जहां पहले सड़क की मरम्मत की जा चुकी है। दोबारा खराबी सामने आने से यह भी जरूरी हो गया है कि केवल ऊपर से पैचवर्क करने के बजाय सड़क की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही यह पता लगाया जाए कि सड़क किस वजह से उखड़ रही है और ड्रेनेज व्यवस्था में कहां कमी है।

गुणवत्ता की जांच की जरूरत

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सामने आई इन खामियों के बाद निर्माण सामग्री, सड़क की विभिन्न परतों और जल निकासी व्यवस्था की जांच की मांग उठने लगी है। किमी 63.8 और 63.9 पर दोबारा उखड़ रही सड़क तथा किमी 57.5 पर जलभराव इस बात की ओर संकेत कर रहे हैं कि एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में बारिश से निपटने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।

बारिश अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ऐसे में यदि शुरुआती बारिश के बाद ही सड़क की मरम्मत वाला हिस्सा उखड़ने लगा है और पानी जमा होने लगा है तो आगे होने वाली बारिश में स्थिति और गंभीर हो सकती है। जरूरत है कि संबंधित एजेंसी इन स्थानों का तत्काल निरीक्षण कर तकनीकी स्तर पर कारणों की जांच करे और स्थायी समाधान सुनिश्चित करे।

एक्सप्रेसवे पर सड़क की गुणवत्ता और ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर उठे सवालों का जवाब जांच के बाद ही मिल सकेगा। फिलहाल रविवार की बारिश ने उन खामियों को जरूर सामने ला दिया है, जिन्हें मरम्मत के जरिए दूर किए जाने का दावा किया गया था।

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