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उत्तर प्रदेश: रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। पूर्वोत्तर रेलवे अब रेलवे क्रॉसिंग पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कैमरे लगाने की तैयारी कर रहा है। इन कैमरों की मदद से रेलवे को वाहनों की आवाजाही का सटीक और वास्तविक डेटा मिल सकेगा। इसी डेटा के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन रेलवे क्रॉसिंग पर अंडरपास या ओवरब्रिज बनाने की जरूरत है। इस नई व्यवस्था की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लखनऊ मंडल की 21 रेलवे क्रॉसिंग से की जाएगी। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि AI तकनीक के इस्तेमाल से ट्रैफिक आकलन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी हो जाएगी।
अभी मैन्युअल तरीके से होती है वाहनों की गिनती
फिलहाल रेलवे क्रॉसिंग पर वाहनों की संख्या का आकलन रेलकर्मियों द्वारा मैन्युअल तरीके से किया जाता है। इसके लिए हर तीन साल में सात दिनों तक लगातार 24 घंटे कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है। इस दौरान दोपहिया, चार पहिया और भारी वाहनों की संख्या दर्ज की जाती है।
हालांकि रेलवे का मानना है कि यह तरीका पूरी तरह सटीक नहीं है। सीमित समय के आंकड़ों के आधार पर कई बार वास्तविक ट्रैफिक स्थिति का सही अनुमान नहीं लग पाता। ऐसे में विकास योजनाओं की प्राथमिकता तय करने में परेशानी हो सकती है।
AI कैमरे देंगे सटीक जानकारी
नई व्यवस्था के तहत रेलवे क्रॉसिंग पर लगाए जाने वाले AI कैमरे हर आने-जाने वाले वाहन की निगरानी करेंगे। ये कैमरे वाहनों की संख्या, प्रकार और आवाजाही से जुड़ा डेटा तैयार करेंगे। इससे रेलवे को किसी भी क्रॉसिंग पर ट्रैफिक दबाव की सही जानकारी मिल सकेगी। रेलवे इसी डेटा के आधार पर यह फैसला करेगा कि किसी स्थान पर अंडरपास, ओवरब्रिज या अन्य सुरक्षा उपायों की जरूरत है या नहीं। इससे विकास कार्यों की योजना अधिक वैज्ञानिक तरीके से तैयार की जा सकेगी।
TVU के आधार पर तय होती है जरूरत
रेलवे किसी भी रेलवे क्रॉसिंग पर अंडरपास या ओवरब्रिज बनाने का निर्णय ट्रेन व्हीकल यूनिट (TVU) के आधार पर करता है। इसमें एक दिन में गुजरने वाली ट्रेनों और वाहनों की संख्या को ध्यान में रखा जाता है। रेलवे सात दिनों तक मिले आंकड़ों का औसत निकालकर TVU तय करता है। अगर किसी रेलवे क्रॉसिंग का TVU एक लाख से अधिक होता है तो वहां अंडरपास या ओवरब्रिज निर्माण के लिए रेलवे और राज्य सरकार मिलकर प्रस्ताव तैयार कर सकते हैं। वहीं, जिन रेलवे क्रॉसिंग का TVU पांच लाख या उससे अधिक होता है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया जाता है।
लखनऊ मंडल की 21 क्रॉसिंग से होगी शुरुआत
पूर्वोत्तर रेलवे ने लखनऊ मंडल के अधिकारियों से पायलट प्रोजेक्ट के लिए 21 रेलवे क्रॉसिंग की सूची मांगी है। इसमें उन क्रॉसिंग को शामिल किया जाएगा, जहां पिछली बार वाहनों की गिनती हुए करीब तीन साल पूरे होने वाले हैं। अधिकारियों को जल्द ही इन क्रॉसिंग की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद चयनित स्थानों पर AI कैमरे लगाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
सुरक्षित और बेहतर यातायात व्यवस्था की दिशा में कदम
रेलवे का कहना है कि AI आधारित निगरानी प्रणाली से न केवल ट्रैफिक डेटा अधिक सटीक मिलेगा, बल्कि यात्रियों और वाहन चालकों की सुरक्षा भी बेहतर होगी। कई रेलवे क्रॉसिंग पर अधिक भीड़ और जाम की समस्या रहती है, जिससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है। AI से मिले आंकड़ों की मदद से रेलवे जरूरत वाले स्थानों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर सकेगा। इससे सरकारी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा और जहां वास्तव में अंडरपास या ओवरब्रिज की जरूरत है, वहां तेजी से काम किया जा सकेगा।
रेलवे की यह पहल उत्तर प्रदेश में आधुनिक और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में अन्य मंडलों की रेलवे क्रॉसिंग पर भी इस तकनीक का विस्तार किया जा सकता है।





