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हमीरपुर में ‘किस्मत’ गुटखा कारोबारी के ठिकानों पर छापा, 9 घंटे खंगाले दस्तावेज

हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में शुक्रवार को वस्तु एवं सेवाकर खुफिया महानिदेशालय (DGGI) की टीम ने पान मसाला और गुटखा कारोबार से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। मौदहा कस्बे में ‘किस्मत’ गुटखा से जुड़े कारोबारी के मकान और गोदाम पर लखनऊ से पहुंची टीम ने घंटों दस्तावेज और कारोबारी रिकॉर्ड खंगाले। मीडिया रिपोर्टों में करीब 180 करोड़ रुपये के जीएसटी हेरफेर की आशंका जताई गई है, हालांकि जांच पूरी होने से पहले वास्तविक कर चोरी की रकम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जानकारी के मुताबिक मौदहा कस्बे के मुख्य बाजार में गढ़ाना तालाब के पास कारोबारी अमित ओमर का मकान और गोदाम स्थित है। रिपोर्ट के अनुसार वह करीब एक दशक से एस ट्रेडर्स के नाम से कारोबार कर रहा है। फर्म से गुटखा-पान मसाला के अलावा सब्जी मसाले समेत अन्य उत्पादों का व्यापार भी जुड़ा बताया गया है। स्थानीय स्तर पर प्रचलित ‘किस्मत’ गुटखा को भी इसी कारोबारी से जोड़ा गया है।
शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे लखनऊ नंबर की आधा दर्जन से अधिक गाड़ियों में अधिकारी और सुरक्षा कर्मी कारोबारी के ठिकाने पर पहुंचे। टीम के साथ पुरुष और महिला पुलिसकर्मी भी मौजूद थे। अधिकारियों ने मकान और उसी परिसर में स्थित गोदाम को सुरक्षा घेरे में लेने के बाद जांच शुरू की। बाहर सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया, जबकि टीम ने अंदर मौजूद कारोबारी दस्तावेजों और रिकॉर्ड की पड़ताल की।
छापेमारी की खबर फैलते ही मौदहा के व्यापारिक क्षेत्र में हलचल बढ़ गई। रिपोर्टों में दावा किया गया कि कार्रवाई की भनक लगने के बाद कारोबारी मौके पर नहीं मिला। कुछ मीडिया रिपोर्टों ने इसे कारोबारी के ‘फरार’ या ‘अंडरग्राउंड’ होने के रूप में लिखा है। हालांकि इस संबंध में जांच एजेंसी की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, इसलिए कारोबारी की अनुपस्थिति को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
कार्रवाई करीब नौ घंटे तक चलने की जानकारी सामने आई है। इस दौरान अधिकारियों ने कारोबार से जुड़े खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, बिल-बुक, टैक्स भुगतान और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच की। जांच का प्रमुख उद्देश्य वास्तविक कारोबार और जीएसटी रिटर्न में दर्ज लेनदेन के बीच संभावित अंतर का पता लगाना बताया जा रहा है।
इस कार्रवाई का दायरा केवल मौदहा तक सीमित नहीं बताया गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार DGGI की टीमों ने हमीरपुर के साथ चित्रकूट में भी पान मसाला कारोबारियों और एक ट्रांसपोर्टर से जुड़े ठिकानों पर जांच की। घरों, गोदामों और ट्रांसपोर्ट से संबंधित कार्यालयों में कारोबारी रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। प्रारंभिक स्तर पर लगभग 180 करोड़ रुपये के जीएसटी हेरफेर की आशंका की बात सामने आई है।
हालांकि यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 180 करोड़ रुपये की कर चोरी अभी अंतिम रूप से साबित आंकड़ा नहीं है। कुछ रिपोर्टों ने इसे ‘180 करोड़ की टैक्स चोरी का आरोप’ बताया है, जबकि दूसरी रिपोर्ट में इसे ‘180 करोड़ रुपये के जीएसटी में हेरफेर की आशंका’ कहा गया है। जांच पूरी होने और विभाग की आधिकारिक गणना के बाद ही वास्तविक रकम स्पष्ट हो सकेगी।
छापेमारी के दौरान अधिकारियों का मुख्य फोकस फर्म के कारोबारी लेनदेन और टैक्स रिकॉर्ड पर रहा। ऐसे मामलों में जांच एजेंसी आम तौर पर खरीद और बिक्री से संबंधित बिल, ई-वे बिल, जीएसटी रिटर्न, स्टॉक रिकॉर्ड और सप्लाई से जुड़े दस्तावेजों का मिलान करती है। इससे यह पता लगाया जाता है कि घोषित कारोबार और वास्तविक लेनदेन में कोई अंतर तो नहीं है। इस मामले में किस तरह की विशिष्ट गड़बड़ी सामने आई है, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
कारोबारी के ठिकाने पर लंबी कार्रवाई और अधिकारियों की मौजूदगी के कारण स्थानीय व्यापारियों में भी दिनभर छापेमारी की चर्चा रही। गुटखा और पान मसाला कारोबार से जुड़े दूसरे व्यापारियों की नजर भी कार्रवाई पर बनी रही। टीम ने जांच के दौरान परिसर में आवाजाही सीमित रखी और दस्तावेजों की पड़ताल जारी रखी।
मामले में आगे की कार्रवाई दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच पर निर्भर करेगी। यदि जांच में टैक्स भुगतान और वास्तविक बिक्री के बीच अंतर मिलता है तो संबंधित फर्म से टैक्स और ब्याज की मांग के साथ कानून के तहत अन्य कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, संबंधित कारोबारी को भी अपना पक्ष रखने और दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।
हमीरपुर में गुटखा कारोबारियों के यहां टैक्स एजेंसियों की कार्रवाई का यह पहला मामला नहीं है। अप्रैल 2022 में भी जिले में एक अन्य गुटखा कारोबारी के ठिकानों पर केंद्रीय जीएसटी की कार्रवाई काफी चर्चा में रही थी। उस समय छापेमारी के दौरान 6 करोड़ रुपये से अधिक नकदी मिलने की खबर सामने आई थी। हालांकि वह मामला मौजूदा ‘किस्मत’ गुटखा कार्रवाई से अलग था और दोनों को एक ही जांच का हिस्सा नहीं माना जाना चाहिए।
फिलहाल मौदहा में हुई कार्रवाई के बाद जांच एजेंसी के विस्तृत आधिकारिक निष्कर्ष का इंतजार है। मीडिया रिपोर्टों में करोड़ों रुपये के संभावित जीएसटी हेरफेर की बात कही जा रही है, लेकिन अंतिम राशि दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। ऐसे में 180 करोड़ रुपये को अभी कथित हेरफेर या प्रारंभिक आशंका के रूप में लिखना ही तथ्यात्मक रूप से उचित होगा।





