उत्तर प्रदेश

Holiday में भुगतान और खरीद पर सवाल, जांच के आदेश

Ratna Netam
23 July 2026 2:12 PM IST
Holiday में भुगतान और खरीद पर सवाल, जांच के आदेश
x

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने अयोध्या स्थित राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के मामले में उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार पर आरोप है कि उन्होंने अवकाश पर रहने के दौरान भी सरकारी खरीद और वित्तीय भुगतान से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। मामले में प्रारंभिक जांच के बाद दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति भी की गई है।

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा नेहा शर्मा को सौंपी है। जांच में यह देखा जाएगा कि अवकाश अवधि के दौरान किए गए वित्तीय निर्णय नियमों के अनुरूप थे या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि सरकारी धन के उपयोग में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों की अनदेखी हुई है या नहीं।

मामला तब सामने आया जब डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ शासन को एक शिकायत पत्र भेजा गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बीमारी के कारण अवकाश पर रहने के बावजूद मेडिकल कॉलेज से जुड़े वित्तीय कार्यों को जारी रखा। आरोप है कि उन्होंने इस दौरान जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से कई अनुबंधों को मंजूरी दी और बड़ी रकम के भुगतान के लिए चेकों पर हस्ताक्षर किए।

शिकायत के अनुसार, डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने 21 सितंबर 2023 को पूर्व कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा से मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य पद का कार्यभार संभाला था। इसके बाद जनवरी 2023 में अवकाश पर जाने के दौरान उन्होंने अपना चार्ज डॉ. सत्यजीत वर्मा को सौंपने के बजाय डॉ. पारस खरबंदा को दे दिया था। इसी को लेकर शिकायतकर्ता ने शासन से सवाल उठाए थे।

शिकायत पत्र में बताया गया कि 4 जनवरी से 19 जनवरी 2023 के बीच डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार अवकाश पर थे। इसके बावजूद उन्होंने 7 जनवरी और 10 जनवरी को करीब 84 लाख रुपये के जेम अनुबंध जारी किए। इसके अलावा 8 जनवरी से 10 जनवरी के बीच 17 अलग-अलग चेकों के माध्यम से कुल 1 करोड़ 28 लाख 90 हजार 990 रुपये के भुगतान किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि इस अवधि में कुल 2.12 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी धन का व्यय किया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अवकाश पर रहते हुए इस तरह के वित्तीय निर्णय लेना नियमों के खिलाफ है और इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका पैदा होती है।

बता दें कि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार को 16 जनवरी 2023 को पद से हटाने का आदेश जारी किया गया था। ऐसे में उनके अवकाश के दौरान किए गए भुगतान और जेम अनुबंधों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। अब उच्चस्तरीय जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वित्तीय प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई थी या नहीं।

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने स्वास्थ्य विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने की बात कही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सरकारी संस्थानों में वित्तीय नियमों का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मामले की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार पर लगे आरोपों की जांच शुरू कर दी गई है और स्वास्थ्य विभाग की नजरें महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।


Next Story