उत्तर प्रदेश

UP में कानून व्यवस्था पर सवाल ड्यूटी में चूक के बाद पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई

Ratna Netam
8 Sept 2026 3:22 PM IST
UP में कानून व्यवस्था पर सवाल ड्यूटी में चूक के बाद पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। एक संवेदनशील मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में **5 दारोगा समेत 14 पुलिसकर्मियों को निलंबित** कर दिया गया है। मामला दंगे से जुड़े पोस्टर लगाए जाने और समाजवादी पार्टी के सांसद के विवादित स्थल पर पहुंचने से जुड़ा बताया जा रहा है। पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।
अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस की जिम्मेदारी है कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखी जाए और किसी भी तरह की अफवाह या तनाव फैलाने वाली गतिविधियों को समय रहते रोका जाए।
संवेदनशील मामले में पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
मामला सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे। आरोप है कि क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनने के बावजूद स्थानीय पुलिस प्रभावी कदम नहीं उठा पाई। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई।
जांच में जिन पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध या लापरवाहीपूर्ण पाई गई, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। निलंबन को प्रशासन की ओर से सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
दंगे से जुड़े पोस्टर को लेकर बढ़ा था विवाद
जानकारी के अनुसार, इलाके में दंगे से जुड़े पोस्टर लगाए जाने के बाद माहौल संवेदनशील हो गया था। ऐसे पोस्टर अक्सर लोगों में भ्रम और तनाव पैदा कर सकते हैं, इसलिए पुलिस प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया।
पुलिस ने पोस्टर लगाने वालों और इसके पीछे की साजिश की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सपा सांसद के पहुंचने के बाद बढ़ी हलचल
मामले में उस समय और राजनीतिक हलचल बढ़ गई जब समाजवादी पार्टी के सांसद संबंधित मस्जिद स्थल पर पहुंचे। उनके दौरे के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और गतिविधियों पर नजर बढ़ा दी।
प्रशासन का कहना है कि किसी भी संवेदनशील स्थान पर बिना अनुमति या उचित प्रक्रिया के पहुंचने से स्थिति प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से पूरे मामले की समीक्षा की गई।
पांच दारोगाओं सहित 14 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
पुलिस विभाग की जांच के बाद पांच उपनिरीक्षकों समेत कुल 14 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई ड्यूटी में लापरवाही और जिम्मेदारी के सही तरीके से निर्वहन नहीं करने के कारण की गई है।
निलंबित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की जा सकती है। जांच में अगर अन्य तथ्य सामने आते हैं तो आगे की कार्रवाई संभव है।
प्रशासन ने दिया सख्त संदेश
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। पुलिसकर्मियों को संवेदनशील इलाकों में सतर्क रहने और छोटी से छोटी गतिविधि पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन का कहना है कि किसी भी व्यक्ति या समूह को माहौल खराब करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई
घटना के बाद संबंधित क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की है।
पुलिस सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नजर रख रही है, ताकि गलत जानकारी फैलाकर माहौल खराब करने वालों पर कार्रवाई की जा सके।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
घटना के बाद राजनीतिक दलों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार और पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई किसी दबाव में नहीं बल्कि जांच के आधार पर की गई है।
जांच में सामने आएंगे और तथ्य
फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटे हैं। पोस्टर किसने लगाए, इसका उद्देश्य क्या था और पुलिस की लापरवाही किस स्तर पर हुई, इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद सामने आएंगे।
निलंबित पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी विस्तृत जांच की जा रही है।
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