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यूपी के इंजीनियरिंग कॉलेजों की शैक्षणिक गुणवत्ता पर सवाल, सिर्फ 31 को मिली NAAC ग्रेडिंग

Lucknow.लखनऊ: प्रदेश में तकनीकी शिक्षा को बेहतर बनाने के तमाम दावों के बीच एक तस्वीर सामने आई है। प्रदेश के कुल 753 इंजीनियरिंग कॉलेजों में से मात्र 31 कॉलेज ही अब तक राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से अपना मूल्यांकन करा पाए हैं। यानी 700 से अधिक कॉलेज अभी भी नैक के मापदंडों पर खरे नहीं उतर पाए हैं। ऐसे में अधिकांश कॉलेजों के सामने दाखिले को लेकर चुनौतियां हैं। नैक उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता और शैक्षणिक माहौल का मूल्यांकन करता है। हाल ही में इसमें नई ग्रेडिंग प्रणाली लागू की गई है, जिससे कॉलेजों की विश्वसनीयता तय करने में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ी है।
इसके मूल्यांकन के आधार पर कॉलेजों को राष्ट्रीय रैंकिंग, प्लेसमेंट, शोध, सरकारी योजनाओं में भागीदारी और छात्रों को दाखिले में प्रतिष्ठा मिलती है। यही वजह है कि सभी कॉलेजों का जल्द से जल्द मूल्यांकन कराने पर जोर दिया जा रहा है। नैक ग्रेडिंग से न सिर्फ कॉलेजों की पहचान मजबूत होती है, बल्कि छात्रों को बेहतर शिक्षा, माहौल और रोजगार के अवसर भी मिलते हैं। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय का कहना है कि नैक के नए नियम कब लागू होंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन जैसे ही यह लागू होंगे, सभी कॉलेजों में शत-प्रतिशत नैक मूल्यांकन अनिवार्य कर दिया जाएगा। आने वाले समय में बिना नैक मान्यता वाले कॉलेजों को सरकारी सहायता और योजनाओं से बाहर रखा जा सकता है।





