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गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में पिछले एक साल से बनी सीवरेज समस्या के पीछे बड़ी तकनीकी खामी सामने आई है। शौचालयों से निकलने वाले गंदे पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक पहुंचाने वाली मोटर व्यवस्था खराब होने के कारण पूरी निकासी प्रणाली प्रभावित हो गई है। स्थिति यह है कि शौचालयों का गंदा पानी एसटीपी तक पहुंचने के बजाय नालियों में बह रहा है और विभाग परिसर में फैल रहा है।
जांच में यह भी सामने आया है कि केवल मोटर ही नहीं, बल्कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी खराब स्थिति में है। इसके कारण गंदे पानी का सही तरीके से निस्तारण नहीं हो पा रहा है। बाल रोग विभाग परिसर में फैल रहे दूषित पानी से दुर्गंध बढ़ गई है और संक्रमण का खतरा भी पैदा हो गया है।
बाल रोग विभाग में बड़ी संख्या में गंभीर अवस्था में बच्चे भर्ती रहते हैं। यहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन पहुंचते हैं। ऐसे संवेदनशील चिकित्सा विभाग में स्वच्छता और सीवरेज व्यवस्था का सुचारू होना बेहद जरूरी माना जाता है। इसके बावजूद लंबे समय से गंदे पानी की निकासी की समस्या बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, विभाग में सीवरेज के पानी को बाहर निकालने के लिए पांच मोटर लगाए गए हैं। इनमें से चार मोटर पिछले करीब तीन वर्षों से खराब पड़े हैं। वहीं, एकमात्र चालू मोटर भी लगभग छह महीने पहले खराब हो गया। इसके बाद सीवरेज निकासी की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो गई।
मोटर खराब होने के कारण शौचालयों से निकलने वाला पानी एसटीपी तक नहीं पहुंच पा रहा है। मजबूरी में यह पानी नालियों के माध्यम से परिसर में फैल रहा है। इससे अस्पताल के वातावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
सीवरेज की समस्या केवल दुर्गंध तक सीमित नहीं है। गंदे पानी के जमा होने से संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। अस्पताल परिसर में जहां मरीजों का इलाज होता है, वहां ऐसी स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
स्थिति इतनी खराब हो गई कि सीवर का पानी लिफ्ट के बेसमेंट तक पहुंच गया। इसके बाद सुरक्षा कारणों से लिफ्ट को बंद करना पड़ा। इससे मरीजों और उनके परिजनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बाल रोग विभाग में भर्ती बच्चों में कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित होते हैं। ऐसे में आसपास का वातावरण साफ और संक्रमण मुक्त होना जरूरी होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अस्पताल परिसर में गंदा पानी जमा रहने से बैक्टीरिया और अन्य संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ सकती है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सीवरेज व्यवस्था को जल्द दुरुस्त करना है। खराब मोटरों की मरम्मत या नई मोटर लगाने के साथ-साथ एसटीपी को भी ठीक करना जरूरी है, ताकि गंदे पानी का सही तरीके से निस्तारण हो सके।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, सीवरेज समस्या को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। लेकिन लंबे समय तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। अब तकनीकी खामी सामने आने के बाद व्यवस्था सुधारने की जरूरत और बढ़ गई है।
स्वास्थ्य संस्थानों में साफ-सफाई और स्वच्छता को लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार दिशा-निर्देश जारी करते हैं। अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण के लिए विशेष प्रोटोकॉल बनाए जाते हैं, लेकिन यदि सीवरेज जैसी बुनियादी व्यवस्था ही खराब हो तो मरीजों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
मरीजों के परिजनों का कहना है कि बाल रोग विभाग जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर ऐसी समस्या का लंबे समय तक बने रहना चिंता का विषय है। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द कार्रवाई कर समस्या का स्थायी समाधान करे।
विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में जल निकासी और सीवरेज व्यवस्था किसी भी इलाज व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसमें खराबी आने पर न केवल मरीजों बल्कि डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए भी परेशानी बढ़ सकती है।
फिलहाल बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन के सामने खराब मोटरों और एसटीपी को ठीक कराने की चुनौती है। यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो संक्रमण का खतरा और बढ़ सकता है।
बाल रोग विभाग में भर्ती मासूम मरीजों को देखते हुए इस समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना जरूरी है। अस्पताल परिसर में स्वच्छ वातावरण बनाए रखना मरीजों के बेहतर इलाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।





