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शाहजहांपुर: रात की गश्त में तैनात पुलिसकर्मी ड्यूटी पर सक्रिय हैं या नहीं, अब इसकी निगरानी QR कोड के जरिए की जाएगी। पुलिस विभाग ने रात्रि गश्त व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई तकनीक आधारित व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जा रहे QR कोड को स्कैन करने वाले सिपाहियों को ही गश्त पर माना जाएगा।
जिले के पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित ने इस व्यवस्था को लागू करने का फैसला लिया है। मंगलवार से इसे शुरू किया जा रहा है। पुलिस का उद्देश्य है कि बीट सिपाही अपने निर्धारित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रहें और अपराध नियंत्रण के लिए प्रभावी गश्त सुनिश्चित हो सके।
QR कोड स्कैनिंग से होगी निगरानी
नई व्यवस्था के तहत शहर के अतिसंवेदनशील इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में QR कोड लगाए जा रहे हैं।
पुलिस विभाग के अनुसार, शहर के 15 अतिसंवेदनशील मोहल्लों और जिले की सभी 1059 ग्राम पंचायतों में QR कोड लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जैसे-जैसे किसी क्षेत्र में QR कोड लगाए जाएंगे, वहां तैनात बीट सिपाही के लिए नियमित रूप से उसे स्कैन करना अनिवार्य होगा।
स्कैन करने वाले सिपाही माने जाएंगे गश्त पर
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जो सिपाही सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए QR कोड को निर्धारित समय पर स्कैन करेंगे, उनकी मौजूदगी गश्त के रूप में दर्ज की जाएगी।
वहीं, जो सिपाही QR कोड स्कैन नहीं करेंगे, उनकी ड्यूटी और मौजूदगी पर सवाल उठेंगे। इससे अधिकारियों को यह पता चल सकेगा कि कौन सा पुलिसकर्मी अपने क्षेत्र में सक्रिय है और कौन ड्यूटी में लापरवाही कर रहा है।
रात्रि गश्त में लापरवाही रोकने की पहल
पुलिस विभाग के सामने लंबे समय से यह चुनौती रही है कि रात की गश्त के दौरान कुछ बीट सिपाही थाने या चौकी में बैठ जाते हैं या आराम करने लगते हैं।
ऐसी स्थिति में चोरी, लूट और अन्य आपराधिक घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
नई QR कोड व्यवस्था का उद्देश्य पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी तय करना और उन्हें अपने क्षेत्रों में सक्रिय बनाए रखना है।
संवेदनशील स्थानों पर लगाए जा रहे QR कोड
पुलिस विभाग की ओर से तैयार किए गए QR कोड को शहर के प्रमुख चौराहों, संवेदनशील मोहल्लों, गांवों के पंचायत भवनों और स्कूलों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर लगाया जा रहा है।
इन स्थानों का चयन इसलिए किया गया है ताकि पुलिसकर्मी अपने बीट क्षेत्र में घूमते हुए नियमित रूप से QR कोड स्कैन कर सकें।
इससे पुलिस अधिकारियों को गश्त की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।
अपराध नियंत्रण में मिलेगी मदद
एसपी सौरभ दीक्षित का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल से पुलिस व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सकता है।
QR कोड आधारित निगरानी से पुलिसकर्मियों की सक्रियता बढ़ेगी और अपराध रोकने में मदद मिलेगी।
रात के समय पुलिस की मौजूदगी बढ़ने से आम लोगों में भी सुरक्षा का भरोसा मजबूत होगा।
डिजिटल निगरानी से बढ़ेगी जवाबदेही
पुलिस विभाग का कहना है कि यह व्यवस्था केवल निगरानी के लिए नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करने के लिए शुरू की गई है।
अधिकारियों को यह पता रहेगा कि किस समय कौन सा सिपाही किस क्षेत्र में सक्रिय था।
इससे रात्रि गश्त की रिपोर्ट भी अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सकेगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी लागू होगी व्यवस्था
नई व्यवस्था केवल शहर तक सीमित नहीं रहेगी। जिले की सभी ग्राम पंचायतों में QR कोड लगाए जाने की योजना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी बीट पुलिसकर्मियों की सक्रियता बढ़ाने के लिए यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।
पुलिसिंग में तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल
पुलिस विभाग लगातार तकनीक के इस्तेमाल से व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है।
QR कोड आधारित गश्त निगरानी प्रणाली इसी दिशा में एक कदम है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे पुलिसकर्मियों की ड्यूटी में सुधार आएगा और आम लोगों को बेहतर सुरक्षा व्यवस्था मिल सकेगी।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब रात में पुलिस गश्त की वास्तविक स्थिति QR कोड स्कैनिंग के जरिए सामने आएगी। इससे ड्यूटी में लापरवाही करने वाले कर्मचारियों पर भी नजर रखी जा सकेगी।





