उत्तर प्रदेश

गोमूत्र खरीद से बढ़ेगी पशुपालकों की आय

Kavita2
10 Aug 2026 4:08 PM IST
गोमूत्र खरीद से बढ़ेगी पशुपालकों की आय
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लखनऊ/बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला स्वावलंबन से जोड़ने की दिशा में नई पहल शुरू की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप बुलंदशहर जिले में किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से गोमूत्र खरीद का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके तहत पशुपालकों से गोमूत्र ₹10 प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है। योजना के सफल रहने पर इसकी कीमत बढ़ाकर ₹20 प्रति लीटर किए जाने की तैयारी है।

सरकार की इस पहल का उद्देश्य गोवंश संरक्षण के साथ पशुपालकों को अतिरिक्त आय का स्रोत उपलब्ध कराना है। इससे किसानों को दूध से होने वाली आमदनी के अलावा पशुओं से प्राप्त होने वाले गोमूत्र से भी नियमित आय मिल सकेगी। योजना को खास तौर पर ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

FPO के माध्यम से शुरू हुआ मॉडल

बुलंदशहर में शुरू किए गए इस पायलट प्रोजेक्ट को किसान उत्पादक संगठन के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। FPO के जरिए किसानों और पशुपालकों को संगठित कर उनके उत्पादों को बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। इसी व्यवस्था का इस्तेमाल अब गोमूत्र की खरीद के लिए किया जा रहा है।

इस मॉडल के तहत पशुपालकों से गोमूत्र एकत्र कर निर्धारित दर पर खरीदा जा रहा है। इससे पशुपालकों को पशुओं के रखरखाव से जुड़े खर्च को पूरा करने में अतिरिक्त मदद मिलने की उम्मीद है।

योजना के प्रारंभिक चरण में गोमूत्र का मूल्य ₹10 प्रति लीटर रखा गया है। पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम और बाजार की संभावनाओं को देखते हुए भविष्य में इसे ₹20 प्रति लीटर तक बढ़ाने की योजना बताई गई है।

दूध के साथ अतिरिक्त आय का जरिया

ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन किसानों की आय का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आमतौर पर पशुपालक दूध और उससे जुड़े उत्पादों से आमदनी प्राप्त करते हैं। अब गोमूत्र को भी आर्थिक गतिविधि से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

सरकार की योजना के अनुसार, पशुपालकों को अपने पशुओं से प्राप्त गोमूत्र बेचकर अतिरिक्त आय मिल सकेगी। इससे पशुपालन को आर्थिक रूप से अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिल सकती है।

खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए नियमित अतिरिक्त आमदनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो पशुपालकों को पशुओं को बनाए रखने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन भी मिलेगा।

महिलाओं के स्वावलंबन पर जोर

इस पहल का एक महत्वपूर्ण पक्ष ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है। गांवों में पशुपालन की जिम्मेदारी अक्सर महिलाओं की भूमिका से जुड़ी होती है। पशुओं की देखभाल, चारा उपलब्ध कराने और दूध निकालने जैसे कार्यों में महिलाएं महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

गोमूत्र की नियमित बिक्री से मिलने वाली अतिरिक्त आय में ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है। इससे परिवार की आमदनी में उनका प्रत्यक्ष योगदान मजबूत होगा और आर्थिक निर्णयों में उनकी भूमिका भी बढ़ सकती है।

योजना को महिला स्वावलंबन से जोड़ने का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को आय के नए अवसर उपलब्ध कराना है।

गोवंश संरक्षण को आर्थिक आधार देने की कोशिश

उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण को लेकर पहले से कई योजनाएं संचालित हैं। अब सरकार संरक्षण की अवधारणा को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

इस मॉडल में पशुपालकों को गोवंश पालने से होने वाले आर्थिक लाभ को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार की सोच है कि यदि पशुपालकों को पशुओं से नियमित आय का अवसर मिलेगा तो गोवंश संरक्षण की व्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।

गोमूत्र खरीद मॉडल इसी विचार पर आधारित है। इससे पशुपालकों के लिए गोवंश केवल दूध उत्पादन का साधन नहीं रहेगा, बल्कि उससे जुड़े अन्य उत्पादों के माध्यम से भी आय प्राप्त हो सकेगी।

बुलंदशहर की सफलता के बाद प्रदेश में विस्तार

फिलहाल इस पहल को बुलंदशहर में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है। सरकार की योजना है कि यहां मॉडल की सफलता और व्यावहारिक परिणामों का आकलन किया जाए।

यदि परियोजना से पशुपालकों को नियमित आय मिलती है और गोमूत्र के संग्रह, भंडारण तथा उपयोग की व्यवस्था प्रभावी रहती है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है।

सरकार की योजना बुलंदशहर के अनुभव के आधार पर मॉडल को बेहतर बनाकर व्यापक स्तर पर लागू करने की है। इससे प्रदेश के बड़ी संख्या में पशुपालकों को जोड़ने का रास्ता खुल सकता है।

संग्रह और बाजार व्यवस्था होगी अहम

योजना की सफलता के लिए केवल गोमूत्र खरीदना ही पर्याप्त नहीं होगा। इसके संग्रह, गुणवत्ता, भंडारण, परिवहन और आगे उपयोग की मजबूत व्यवस्था भी जरूरी होगी।

FPO के माध्यम से खरीद व्यवस्था को संगठित करने से इन चुनौतियों से निपटने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि खरीदे गए गोमूत्र का उपयोग किन उत्पादों के निर्माण में किया जाता है और उसका बाजार कितना बड़ा है।

यदि पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ती है तो गोमूत्र आधारित उत्पादों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की उम्मीद

उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल गोवंश संरक्षण, किसान आय और महिला स्वावलंबन को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। ₹10 प्रति लीटर से शुरू हुई खरीद व्यवस्था को भविष्य में ₹20 प्रति लीटर तक बढ़ाने की योजना पशुपालकों के लिए अतिरिक्त आर्थिक प्रोत्साहन बन सकती है।

बुलंदशहर में पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम यह तय करेंगे कि इस मॉडल को प्रदेश के अन्य हिस्सों में किस स्तर और किस तरीके से लागू किया जाएगा। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो ग्रामीण परिवारों को दूध के अलावा गोमूत्र से भी नियमित आमदनी का नया स्रोत मिल सकता है।

इस तरह गोवंश संरक्षण को आर्थिक गतिविधि से जोड़ने की यह पहल ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और महिलाओं को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाने की दिशा में एक नए मॉडल के रूप में सामने आ रही है।

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