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भैंसवाल स्टेडियम निर्माण में लापरवाही पर प्रोजेक्ट मैनेजर बदला

शामली। भैंसवाल में निर्माणाधीन स्टेडियम के काम में लापरवाही की शिकायतों के बाद शासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए यूपीसीएल के सहारनपुर मंडल मुख्यालय पर तैनात प्रोजेक्ट मैनेजर को हटा दिया है। उनकी जगह आगरा से नए प्रोजेक्ट मैनेजर को भेजा गया है। नए अधिकारी के कार्यभार संभालने के बाद थानाभवन विधायक और उप क्रीड़ाधिकारी ने स्टेडियम पहुंचकर निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया और गुणवत्ता को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान विधायक ने नए प्रोजेक्ट मैनेजर से कहा कि स्टेडियम के निर्माण में किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के युवाओं और खिलाड़ियों से जुड़ी है, इसलिए निर्माण सामग्री से लेकर संरचनात्मक काम तक हर चरण निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए।
भैंसवाल में यह स्टेडियम खेलो इंडिया योजना के तहत वर्ष 2022 में स्वीकृत हुआ था। परियोजना की कुल लागत 24 करोड़ 95 लाख रुपये निर्धारित की गई है। प्रारंभिक तौर पर 20 करोड़ रुपये की मूल स्वीकृति दी गई थी। इसके सापेक्ष लगभग पांच करोड़ रुपये की धनराशि करीब एक वर्ष पहले जारी हो चुकी है।
स्टेडियम निर्माण को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण खेल परियोजना माना जा रहा है। लंबे समय से स्थानीय खिलाड़ियों और युवाओं को बेहतर खेल सुविधाओं की जरूरत महसूस की जा रही थी। परियोजना पूरी होने के बाद खिलाड़ियों को अभ्यास, प्रतियोगिताओं और प्रशिक्षण के लिए बेहतर आधारभूत ढांचा उपलब्ध होने की उम्मीद है।
हालांकि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद इसकी गति और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे थे। काम में लापरवाही और अपेक्षित प्रगति नहीं होने की शिकायतें शासन तक पहुंचीं। इसके बाद परियोजना की निगरानी कर रहे प्रोजेक्ट मैनेजर को हटाने का फैसला लिया गया।
नई तैनाती के बाद परियोजना स्थल का निरीक्षण कर काम की वास्तविक स्थिति देखी गई। विधायक और उप क्रीड़ाधिकारी ने निर्माणाधीन हिस्सों का जायजा लिया और यह जानने का प्रयास किया कि अब तक कितना काम पूरा हुआ है तथा किन हिस्सों में सुधार की जरूरत है।
विधायक ने कहा कि सरकारी धन से बनने वाली परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। निर्माण कार्य की गुणवत्ता खराब मिलने पर संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने प्रोजेक्ट मैनेजर से निर्माण कार्य की नियमित निगरानी करने और मौके पर मौजूद इंजीनियरों तथा ठेकेदार से लगातार समन्वय रखने को कहा। साथ ही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच भी समय-समय पर कराने के निर्देश दिए।
उप क्रीड़ाधिकारी ने भी स्टेडियम की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए निर्माण मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेल मैदान, भवन, दर्शक सुविधा, खिलाड़ियों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे और अन्य निर्माण कार्य तकनीकी मानकों के अनुरूप होने चाहिए।
परियोजना पर करीब 25 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं, इसलिए शासन स्तर पर भी इसकी प्रगति पर नजर रखी जा रही है। जारी धनराशि का उपयोग निर्धारित मदों में हुआ है या नहीं, इसकी भी समीक्षा की जा सकती है।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि धन जारी होने के करीब एक साल बाद भी अपेक्षित गति से काम क्यों आगे नहीं बढ़ पाया। अधिकारियों से अब निर्माण की समयसीमा और प्रगति रिपोर्ट को लेकर भी जवाब मांगा जा सकता है।
खेलो इंडिया योजना के तहत बनने वाले स्टेडियमों का उद्देश्य ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना है। भैंसवाल का स्टेडियम भी इसी उद्देश्य से स्वीकृत किया गया था।
स्टेडियम पूरा होने के बाद क्षेत्र के खिलाड़ियों को दूसरे शहरों में अभ्यास के लिए जाने की जरूरत कम हो सकती है। स्थानीय स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित करने की सुविधा भी बढ़ेगी।
युवाओं के लिए स्टेडियम केवल खेल मैदान नहीं, बल्कि फिटनेस, अनुशासन और करियर की संभावनाओं से भी जुड़ा है। इसलिए स्थानीय लोग भी इस परियोजना के जल्द और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा होने की उम्मीद कर रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान निर्माण एजेंसी को यह भी कहा गया कि जो कमियां सामने आई हैं, उन्हें समय रहते दूर किया जाए। काम की गति बढ़ाने के साथ गुणवत्ता बनाए रखना प्राथमिकता होगी।
नए प्रोजेक्ट मैनेजर के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अधूरे काम को तय मानकों के साथ आगे बढ़ाना और परियोजना को समय पर पूरा करना है। उन्हें पहले से हुए निर्माण की समीक्षा भी करनी होगी ताकि जहां सुधार की जरूरत हो वहां तत्काल कार्रवाई की जा सके।
विधायक ने स्पष्ट कहा कि स्टेडियम निर्माण में घटिया सामग्री या तकनीकी लापरवाही मिलने पर उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के खिलाड़ियों को लंबे समय तक उपयोग में आने वाली मजबूत और सुरक्षित सुविधा मिलनी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने भी उम्मीद जताई है कि प्रोजेक्ट मैनेजर बदले जाने के बाद निर्माण कार्य में तेजी और पारदर्शिता आएगी। साथ ही परियोजना की नियमित निगरानी होने से गुणवत्ता संबंधी शिकायतें कम होंगी।
फिलहाल शासन ने प्रोजेक्ट मैनेजर बदलकर यह संकेत दिया है कि निर्माण कार्य को लेकर लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी। अब निगाह इस बात पर है कि नए प्रबंधन के तहत भैंसवाल स्टेडियम का काम कितनी तेजी से आगे बढ़ता है और लगभग 24.95 करोड़ रुपये की यह परियोजना कब तक पूरी होती है।





