उत्तर प्रदेश

जौहर यूनिवर्सिटी को मिले दान की पड़ताल, आयकर विभाग खंगाल रहा फंडिंग का पूरा रिकॉर्ड

nidhi
25 July 2026 8:27 AM IST
जौहर यूनिवर्सिटी को मिले दान की पड़ताल, आयकर विभाग खंगाल रहा फंडिंग का पूरा रिकॉर्ड
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जौहर यूनिवर्सिटी को मिले करोड़ों के दान में कालाधन का शक

Rampur/New Delhi: उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को मिले करोड़ों रुपये के दान (डोनेशन) को लेकर आयकर विभाग की जांच तेज हो गई है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि विश्वविद्यालय को प्राप्त कुछ दान की राशि में अघोषित आय (ब्लैक मनी) का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। फिलहाल आयकर विभाग वित्तीय दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और दानदाताओं से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रहा है।

अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है और किसी भी पक्ष के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष या दोष तय नहीं किया गया है। मामले की सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के अनुसार, आयकर विभाग विश्वविद्यालय को विभिन्न वर्षों में प्राप्त हुए करोड़ों रुपये के दान की प्रकृति और स्रोत की जांच कर रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि—
दान देने वालों की आर्थिक क्षमता क्या थी।
दान की राशि का वास्तविक स्रोत क्या था।
सभी लेनदेन आयकर नियमों के अनुरूप थे या नहीं।
कहीं अघोषित धन को वैध दिखाने के लिए दान का माध्यम तो नहीं अपनाया गया।
इन सभी बिंदुओं पर विभाग दस्तावेजों का मिलान कर रहा है।
किन दस्तावेजों की हो रही है जांच?
आयकर विभाग कथित तौर पर निम्नलिखित रिकॉर्ड की जांच कर रहा है—
दानदाताओं की सूची।
बैंक खातों का विवरण।
आयकर रिटर्न।
विश्वविद्यालय के वित्तीय रिकॉर्ड।
लेखा-परीक्षण (ऑडिट) दस्तावेज।
संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों के बीच वित्तीय लेनदेन।
यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता मिलती है, तो विभाग आयकर अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई कर सकता है।
ब्लैक मनी की आशंका क्यों?
जांच एजेंसियों को संदेह है कि कुछ दानदाताओं द्वारा घोषित आय और दान की राशि के बीच अंतर हो सकता है। ऐसे मामलों में विभाग यह जांच करता है कि कहीं धन का वास्तविक स्रोत छिपाया तो नहीं गया या अघोषित आय को वैध रूप देने का प्रयास तो नहीं हुआ।
हालांकि, यह केवल जांच का विषय है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
विश्वविद्यालय या संबंधित पक्ष का रुख
ऐसे मामलों में संबंधित संस्थान या पक्ष आमतौर पर अपने सभी वित्तीय लेनदेन को कानून के अनुरूप बताते हैं और जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने की बात कहते हैं। यदि इस मामले में विश्वविद्यालय या संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया जाता है, तो वह जांच प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
आयकर विभाग की प्रक्रिया
आयकर विभाग किसी भी संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच के दौरान—
दस्तावेजों का सत्यापन करता है।
संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर सकता है।
बैंकिंग रिकॉर्ड का मिलान करता है।
आवश्यकता होने पर अतिरिक्त जानकारी या स्पष्टीकरण मांगता है।
यदि जांच में अनियमितता साबित होती है, तो कानून के अनुसार कर, जुर्माना या अन्य कार्रवाई की जा सकती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
कर विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी शैक्षणिक संस्थान को मिलने वाले बड़े दान की जांच असामान्य नहीं है। यदि किसी दान के स्रोत या लेनदेन पर संदेह होता है, तो आयकर विभाग उसके वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कर सकता है। हालांकि, जांच शुरू होना अपने आप में किसी संस्था या व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं माना जाता।
आगे क्या होगा?
जांच पूरी होने के बाद आयकर विभाग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा। यदि रिकॉर्ड और दस्तावेज संतोषजनक पाए जाते हैं, तो मामला बंद किया जा सकता है। वहीं, यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता के साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित प्रावधानों के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
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