उत्तर प्रदेश

Prisoners का कमाल, जेल परिसर में हो रही सब्जियों की खेती

Ratna Netam
10 July 2026 2:29 PM IST
Prisoners  का कमाल, जेल परिसर में हो रही सब्जियों की खेती
x

Noida नोएडा : जनपद गौतमबुद्ध नगर स्थित लुक्सर जिला कारागार में बंदी अब सुधार और पुनर्वास की दिशा में नई मिसाल पेश कर रहे हैं। जेल परिसर में बड़े स्तर पर सब्जियों की खेती की जा रही है, जिससे न केवल बंदियों को ताजी और पौष्टिक सब्जियां उपलब्ध हो रही हैं, बल्कि यहां उत्पादित सब्जियों की आपूर्ति प्रदेश की अन्य जेलों में भी की जा रही है।

लुक्सर जिला कारागार में चल रही इस पहल का उद्देश्य बंदियों को रचनात्मक कार्यों से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रशिक्षण देना है। जेल प्रशासन के अनुसार, पिछले एक वर्ष के दौरान जिला कारागार से 681 कुंतल 90 किलोग्राम सब्जियां प्रदेश के अलग-अलग जिलों की जेलों में भेजी जा चुकी हैं।

जिला कारागार अधीक्षक बृजेश कुमार ने बताया कि जेल परिसर में करीब 21.50 एकड़ भूमि पर सब्जियों की खेती की जा रही है। इस कार्य में वर्तमान समय में 82 बंदी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। बंदियों को खेती से संबंधित कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे उनमें श्रम, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो रही है।

उन्होंने बताया कि जेल में खेती की इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल सब्जी उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बंदियों के पुनर्वास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। खेती के माध्यम से बंदियों को व्यावसायिक कौशल सिखाया जा रहा है, जिससे जेल से बाहर निकलने के बाद वे अपने जीवन को बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकें और रोजगार के नए अवसर तलाश सकें।

जिला कारागार परिसर में कई प्रकार की मौसमी सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है। इनमें आलू, गोभी, पत्तागोभी, पालक, गाजर, मूली, गांठगोभी, लौकी, तोरई, भिंडी, कद्दू, अरबी, टमाटर, शलजम और बैंगन जैसी सब्जियां शामिल हैं। जेल प्रशासन के अनुसार, यहां प्रतिदिन लगभग चार कुंतल सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है।

उत्पादित सब्जियों का सबसे पहले उपयोग जेल में बंद कैदियों के भोजन के लिए किया जाता है। इससे बंदियों को ताजी और गुणवत्तापूर्ण सब्जियां मिलती हैं। इसके बाद अतिरिक्त उत्पादन को प्रदेश की अन्य जेलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भेजा जाता है।

अधीक्षक बृजेश कुमार ने कहा कि खेती से जुड़े कार्य बंदियों के मानसिक और शारीरिक विकास में भी सहायक साबित हो रहे हैं। खाली समय का उपयोग सकारात्मक गतिविधियों में करने से बंदियों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार हो रहे हैं।

उन्होंने बताया कि जेल प्रशासन लगातार ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है, जिनसे बंदियों को सुधारात्मक वातावरण मिल सके। खेती के अलावा अन्य कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से भी उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

लुक्सर जिला कारागार की यह पहल जेलों की पारंपरिक छवि से अलग एक सकारात्मक बदलाव को दर्शाती है। जहां पहले जेलों को केवल सजा काटने की जगह माना जाता था, वहीं अब इन्हें सुधार, प्रशिक्षण और पुनर्वास केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। बंदियों द्वारा की जा रही यह खेती इसी बदलाव की एक सफल तस्वीर पेश कर रही है।

Next Story