उत्तर प्रदेश

UP में नहीं बंद होंगे प्राइमरी स्कूल, कम छात्र वाले स्कूलों का होगा विलय

Saba Naaz
29 July 2026 3:57 PM IST
UP में नहीं बंद होंगे प्राइमरी स्कूल, कम छात्र वाले स्कूलों का होगा विलय
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को बंद किए जाने के मुद्दे पर प्रदेश सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि राज्य में किसी भी प्राथमिक विद्यालय को बंद नहीं किया जा रहा है। सरकार ने समाजवादी पार्टी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों का केवल नजदीकी स्कूलों में विलय किया जाएगा। इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

लोकसभा के मानसून सत्र में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में सरकारी प्राथमिक विद्यालय बंद किए जाने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने दावा किया था कि प्रदेश में देश के सबसे ज्यादा सरकारी प्राथमिक विद्यालय बंद हुए हैं और करीब 26,386 विद्यालय इससे प्रभावित हुए हैं। इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट की।

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से विद्यालयों को बंद करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने बताया कि जिन प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या बहुत कम है, उन्हें आसपास के विद्यालयों के साथ जोड़ा जाएगा। इससे शिक्षकों और अन्य संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा और बच्चों को अधिक सुविधाएं मिल पाएंगी।

संदीप सिंह ने कहा कि जिन विद्यालयों में नियमित कक्षाएं संचालित नहीं होंगी, वहां पहली बार प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू की जाएंगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्री-प्राइमरी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे छोटे बच्चों को शुरुआती स्तर पर बेहतर शिक्षा का अवसर मिलेगा और खाली पड़े विद्यालय भवनों का भी उपयोग हो सकेगा।

प्रदेश सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि योगी सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुधार को प्राथमिकता दी है। उन्होंने बताया कि सरकारी विद्यालयों में सुविधाएं बढ़ाने के लिए ऑपरेशन कायाकल्प चलाया गया, जिसके तहत स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं में सुधार किया गया है।

सरकार के अनुसार, ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय विद्यालयों में 19 मानकों पर सुधार हुआ है। पहले जहां विद्यालयों की स्थिति करीब 36 प्रतिशत थी, वहीं अब यह बढ़कर 97 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसमें शौचालय, पेयजल, फर्नीचर, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं में सुधार शामिल है।

संदीप सिंह ने शिक्षा बजट में बढ़ोतरी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय शिक्षा का बजट करीब 28 हजार करोड़ रुपये था, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में यह बढ़कर 1.13 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। सरकार का दावा है कि शिक्षा के क्षेत्र में लगातार निवेश बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में छात्र नामांकन भी बढ़ा है। सरकार के मुताबिक, पहले सरकारी स्कूलों में करीब 1.34 करोड़ छात्र पढ़ते थे, जो अब बढ़कर लगभग 1.90 करोड़ हो गए हैं। इसके अलावा ड्रॉप आउट दर में भी कमी आई है। सरकार का दावा है कि ड्रॉप आउट दर 19 प्रतिशत से घटकर तीन प्रतिशत तक पहुंच गई है।

बेसिक शिक्षा मंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के समय नकल रोकने संबंधी व्यवस्था कमजोर हुई थी, जबकि अब भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं।

प्रदेश सरकार ने साफ किया कि प्राथमिक विद्यालयों को बंद करने की बजाय उनका पुनर्गठन किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि कम नामांकन वाले स्कूलों को नजदीकी विद्यालयों में मिलाने से शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी और बच्चों को अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। वहीं, विपक्ष के आरोपों पर सरकार ने इसे शिक्षा व्यवस्था को लेकर गलत जानकारी फैलाने का प्रयास बताया है।

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