उत्तर प्रदेश

वैष्णव परंपरा के अनुरूप बदली पुजारियों की पोशाक 13 अगस्त से लागू

Ratna Netam
10 Aug 2026 7:16 PM IST
वैष्णव परंपरा के अनुरूप बदली पुजारियों की पोशाक 13 अगस्त से लागू
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अयोध्या : श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के पुजारियों के ड्रेस कोड में बदलाव किया गया है। धार्मिक न्यास समिति की बैठक में संतों की ओर से दिए गए सुझाव के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नए वस्त्रों को मंजूरी देते हुए इसे लागू करने का फैसला किया है। अब रामलला के पुजारी पगड़ी के साथ पीत रंग की चौबंदी और सफेद धोती के बजाय पीताम्बरी उत्तरीय और धोती धारण करेंगे। नया ड्रेस कोड सावन शुक्ल प्रतिपदा यानी 13 अगस्त से प्रभावी होगा।
राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से पहले पुजारियों के लिए पगड़ी, पीत रंग की चौबंदी और सफेद धोती निर्धारित की गई थी। गर्मी और सर्दी के मौसम को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट ने सभी पुजारियों को निर्धारित ड्रेस भी उपलब्ध कराई थी। ट्रस्ट की ओर से दी गई चौबंदी पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का मोनोग्राम भी प्रिंट किया गया था। हालांकि, पुनर्गठित धार्मिक न्यास समिति की पहली बैठक में संतों ने इस ड्रेस को लेकर अपनी राय रखी।
संतों का कहना था कि सिलाई वाले वस्त्र अयोध्या की वैष्णव परंपरा के अनुरूप नहीं हैं। धार्मिक परंपराओं में भगवान के विग्रह की सेवा और पूजा के दौरान वस्त्रों को लेकर विशेष मर्यादा का पालन किया जाता है। इसी आधार पर समिति की बैठक में पुजारियों के लिए बिना सिले हुए वस्त्र निर्धारित करने का सुझाव दिया गया। राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि और अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने संतों के इस सुझाव को स्वीकार कर लिया।
धार्मिक न्यास समिति के सदस्य और श्रीराम वल्लभा कुंज के अधिकारी स्वामी राजकुमार दास ने बताया कि वैष्णव परंपरा में मंदिर के गर्भगृह में विराजमान श्रीठाकुरजी के विग्रह के सामने विशेष मर्यादा का पालन किया जाता है। उनके अनुसार, देवी-देवताओं की सेवा के लिए वस्त्रों को लेकर पूर्वाचार्यों द्वारा आचार संहिता निर्धारित की गई है। इसी परंपरा को ध्यान में रखते हुए पुजारियों के लिए पीताम्बरी उत्तरीय और धोती को अनिवार्य किया गया है।
नए ड्रेस कोड को लागू करने के लिए 13 अगस्त की तारीख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रामलला के पुजारियों की ड्यूटी का रोस्टर अमावस्या और पूर्णिमा के आधार पर बदलता है। सावन कृष्ण अमावस्या तक जिस समूह के पुजारी सुबह की पाली में सेवा कर रहे थे, वे सावन शुक्ल प्रतिपदा से शाम की पाली में सेवा करेंगे। इसी तरह शाम की पाली में ड्यूटी करने वाला समूह 13 अगस्त से सुबह की पाली में सेवा करेगा।
यह रोस्टर सावन शुक्ल पूर्णिमा तक चलेगा। इसके बाद भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा से पुजारियों की ड्यूटी का नया रोस्टर लागू होगा। इस तरह ड्रेस कोड में बदलाव को भी पुजारियों के नए ड्यूटी चक्र के साथ लागू किया जा रहा है।
निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास ने बताया कि धार्मिक न्यास समिति की बैठक के बाद अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन की ओर से पुजारियों के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। नए नियम के तहत मंदिर में भगवान रामलला की सेवा करने वाले सभी पुजारियों को निर्धारित पारंपरिक वस्त्र धारण करना होगा।
राम मंदिर में पूजा-अर्चना और धार्मिक परंपराओं को लेकर पहले से ही विशेष व्यवस्थाएं निर्धारित हैं। ऐसे में ड्रेस कोड में बदलाव को भी मंदिर की वैष्णव परंपरा और धार्मिक मर्यादाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। ट्रस्ट और धार्मिक न्यास समिति की ओर से संतों के सुझाव को स्वीकार किए जाने के बाद अब पुजारियों की वेशभूषा पहले की तुलना में अधिक पारंपरिक स्वरूप में दिखाई देगी।
नए ड्रेस कोड के लागू होने के बाद रामलला के गर्भगृह में सेवा करने वाले पुजारी पीताम्बरी उत्तरीय और धोती में नजर आएंगे। ट्रस्ट की ओर से यह बदलाव धार्मिक परंपराओं और मंदिर की मर्यादा के अनुरूप किया गया है। 13 अगस्त से इसकी औपचारिक शुरुआत होने के साथ ही राम मंदिर में पुजारियों की वेशभूषा में यह नया बदलाव स्थायी रूप से देखने को मिलेगा।
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