उत्तर प्रदेश

यूपी चुनाव से पहले पुलिस में फेरबदल की तैयारी, तीन साल की तैनाती वालों का मांगा ब्योरा

nidhi
29 Oct 2026 10:05 AM IST
यूपी चुनाव से पहले पुलिस में फेरबदल की तैयारी, तीन साल की तैनाती वालों का मांगा ब्योरा
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थाना-चौकियों में लंबी तैनाती की होगी समीक्षा
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पुलिस विभाग में तैनाती की समीक्षा और फेरबदल की तैयारी तेज हो गई है। एक ही थाना या चौकी पर तीन साल से अधिक समय से कार्यरत पुलिसकर्मियों का ब्योरा मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। रिकॉर्ड जुटाकर संबंधित कर्मियों को चिह्नित किया जाएगा। इसके बाद लागू नियमों और अधिकारियों की समीक्षा के आधार पर उनकी तैनाती बदलने का निर्णय लिया जा सकता है। फिलहाल कितने पुलिसकर्मियों का तबादला होगा, इसकी संख्या स्पष्ट नहीं हुई है।
यह कवायद ऐसे समय चल रही है, जब निर्वाचन आयोग ने आगामी चुनाव के मद्देनजर चुनावी कार्यों से सीधे जुड़े अधिकारियों के स्थानांतरण और तैनाती के दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग के निर्देशों में गृह जिले में तैनाती और एक ही जिले में निर्धारित अवधि पूरी करने जैसे मानकों पर ध्यान दिया गया है। उत्तर प्रदेश के लिए कार्यकाल की गणना की कटऑफ तारीख 31 मई 2027 रखी गई है।
तैनाती की अवधि के आधार पर बनेगी सूची
पुलिस विभाग में मांगे गए विवरण से यह स्पष्ट होगा कि कौन कर्मचारी कितने समय से एक ही स्थान पर कार्यरत है। थाना और चौकी स्तर की तैनाती का रिकॉर्ड सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई का आधार तैयार होगा। ब्योरा मांगने और तबादला आदेश जारी होने में अंतर है। रिकॉर्ड में नाम शामिल होने भर से हर पुलिसकर्मी का स्थानांतरण तय नहीं माना जा सकता। संबंधित पद, लागू नीति और समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय होगा। अभी नई तैनाती के स्थानों या व्यापक तबादला सूची के बारे में पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
जिले में तीन वर्ष की सेवा का अलग मानक
निर्वाचन आयोग की नीति के तहत चुनावी कार्यों से सीधे जुड़े उन अधिकारियों को स्थानांतरित किया जाना है, जिन्होंने पिछले चार वर्षों में एक ही जिले में तीन वर्ष की सेवा पूरी कर ली है या तय कटऑफ तारीख तक पूरी कर लेंगे। गृह जिले में तैनात संबंधित अधिकारी भी निर्देशों के दायरे में आते हैं। इसलिए एक थाना या चौकी पर तीन वर्ष की तैनाती और आयोग के जिला स्तर के कार्यकाल संबंधी मानक को एक जैसा नहीं समझना चाहिए। दोनों में समीक्षा का स्तर अलग है। आयोग की नीति में निर्धारित अवधि के दौरान जिले में की गई सेवा का हिसाब महत्वपूर्ण है। 27 अक्टूबर को जारी निर्देशों के अनुसार, एक ही जिले में पदोन्नति के बाद दूसरे पद पर की गई सेवा भी तीन वर्ष की गणना में शामिल होगी। इसका अर्थ है कि जिले में केवल पद बदल जाने से संबंधित अधिकारी की पूर्व सेवा अवधि समाप्त नहीं हो जाती। रिकॉर्ड की समीक्षा में इस पहलू का भी ध्यान रखना होगा।
30 नवंबर तक भेजनी होगी कार्रवाई की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के हवाले से जारी जानकारी के मुताबिक, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को आयोग के निर्देशों पर की गई कार्रवाई की समेकित रिपोर्ट 30 नवंबर 2026 तक भेजनी होगी। इस रिपोर्ट में स्थानांतरण और तैनाती संबंधी अनुपालन का विवरण रहेगा। निर्देश केवल पुलिस विभाग तक सीमित नहीं हैं। चुनावी कार्यों से सीधे जुड़े प्रशासनिक अधिकारियों की विभिन्न श्रेणियां भी इसके दायरे में हैं। इनमें निर्वाचन संबंधी जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी, उपजिलाधिकारी, संयुक्त मजिस्ट्रेट और तहसीलदार जैसे पद शामिल हैं। निर्धारित तारीख तक रिपोर्ट मांगे जाने से संबंधित विभागों को अपने रिकॉर्ड का मिलान और समीक्षा समय पर करनी होगी। पुलिस विभाग में तैनाती का ब्योरा जुटाने की प्रक्रिया को इसी व्यापक चुनावी तैयारी के संदर्भ में देखा जा रहा है।
पुलिस के कई स्तरों पर लागू होंगे निर्देश
आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने पुलिस निरीक्षक, उपनिरीक्षक और उच्च पदों पर कार्यरत चुनाव से संबंधित अधिकारियों की तैनाती के लिए भी निर्देश दिए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव या उसके बाद हुए उपचुनाव में जिस विधानसभा क्षेत्र अथवा जिले में संबंधित अधिकारी तैनात थे, वहां उनकी दोबारा तैनाती या बने रहने को लेकर भी प्रतिबंध बताए गए हैं। अलग-अलग पदों के लिए निर्देशों का अनुपालन संबंधित सेवा और तैनाती के विवरण के अनुसार होगा। इसलिए पूरे पुलिस महकमे के हर कर्मचारी पर एक समान निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। अंतिम आदेशों से ही स्पष्ट होगा कि किस अधिकारी या कर्मचारी को कहां नई जिम्मेदारी दी गई है।
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