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लखनऊ, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों को तेज गति देने के लिए योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में बड़े पैमाने पर परियोजनाओं की शुरुआत की है। अप्रैल से जून 2026 के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 5,551 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया, जिनकी कुल लागत 62,282 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रदेश के सभी क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना है। इन योजनाओं में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, पर्यटन, खेल, शहरी विकास और कनेक्टिविटी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। पूर्वांचल, पश्चिमांचल, बुंदेलखंड, मध्यांचल और तराई क्षेत्रों में समान रूप से विकास कार्य किए गए हैं। सरकार का कहना है कि अब विकास केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण और छोटे जिलों तक भी पहुंच रहा है।
इस अवधि में कई बड़ी परियोजनाएं चर्चा में रहीं, जिनमें गंगा एक्सप्रेसवे और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) प्रमुख हैं। 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाला गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। वहीं जेवर एयरपोर्ट को उत्तर भारत का प्रमुख विमानन केंद्र बनाने की योजना है। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कई नई पहल की गई हैं। गोरखपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की शुरुआत हुई है, जहां एआई, साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे विषयों की पढ़ाई होगी। ललितपुर में मेडिकल कॉलेज और फार्मा पार्क की परियोजनाएं भी शुरू की गई हैं।
पर्यटन और खेल क्षेत्र में भी विकास कार्यों को गति दी गई है। संतकबीर नगर में धार्मिक स्थलों का विकास, महोबा में एडवेंचर टूरिज्म और गोरखपुर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। सरकार का कहना है कि ये सभी परियोजनाएं प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगी और रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगी। कुल मिलाकर 62,282 करोड़ रुपये की ये विकास योजनाएं उत्तर प्रदेश के भविष्य को नई दिशा देने की ओर एक बड़ा कदम मानी जा रही हैं।





