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यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां तेज, चुनाव आयोग का बड़ा निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों के साथ ही निर्वाचन आयोग ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश में चुनावी व्यवस्थाओं को समय रहते पूरा करने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सभी जिलों के अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि एक सप्ताह के भीतर सभी क्षेत्रों में सेक्टर ऑफिसर और सेक्टर पुलिस ऑफिसर की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही मतदान केंद्रों की सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और निर्वाचन से जुड़े अन्य कार्यों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने पर जोर दिया गया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बुधवार, 7 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों, जिलाधिकारियों, पुलिस आयुक्तों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लिया गया। इस दौरान निर्वाचन प्रक्रिया को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अधिकारियों को बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार विधानसभा चुनाव से चार महीने पहले सेक्टर ऑफिसर और सेक्टर पुलिस ऑफिसर की नियुक्ति का प्रावधान है। इसी को ध्यान में रखते हुए आगामी चुनाव के लिए एक सप्ताह के भीतर इन अधिकारियों की तैनाती पूरी करने को कहा गया है। नियुक्ति के दौरान योग्य और संवेदनशील अधिकारियों का चयन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सेक्टर ऑफिसर और सेक्टर पुलिस ऑफिसर की नियुक्ति के बाद उन्हें निर्वाचन संबंधी जिम्मेदारियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिला स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदान से पहले और मतदान के दिन संबंधित अधिकारी अपने दायित्वों का प्रभावी तरीके से निर्वहन कर सकें।
निर्वाचन आयोग की तैयारियों में मतदाता सूची को दुरुस्त करने का काम भी शामिल है। इससे एक दिन पहले ही अधिकारियों को मतदाता सूची में सुधार करने और छूटे हुए पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए गए थे। मतदाता सूची की शुद्धता चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में निर्वाचन प्रशासन मतदाता सूची और मतदान व्यवस्थाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है।
समीक्षा बैठक में सेक्टर अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में आने वाले मतदान केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए। इस निरीक्षण के दौरान मतदान केंद्र तक पहुंचने वाले रास्तों की स्थिति, बिजली, पेयजल, शौचालय, फर्नीचर, रैंप और छाया जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता की जांच की जाएगी। निरीक्षण के बाद सेक्टर अधिकारी अपनी रिपोर्ट जिला निर्वाचन अधिकारी को सौंपेंगे।
जिन मतदान केंद्रों पर आवश्यक सुविधाओं की कमी मिलेगी, वहां जिला निर्वाचन अधिकारियों को संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए हैं। निर्वाचन प्रशासन का उद्देश्य है कि मतदान से पहले सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि मतदाताओं और चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। सेक्टर ऑफिसर और सेक्टर पुलिस ऑफिसर को वल्नरेबिलिटी मैपिंग से संबंधित वीएम-1 प्रारूप उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान सामने आए आपराधिक मामलों, जातिगत हिंसा, आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन, जब्ती और पुनर्मतदान जैसी घटनाओं से संबंधित जानकारी दर्ज होती है।
इस जानकारी के आधार पर संबंधित अधिकारी अपने क्षेत्रों का भ्रमण करेंगे और आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा निर्वाचन आयोग के निर्धारित मानकों के अनुसार क्रिटिकल यानी संवेदनशील मतदान केंद्रों की सूची तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बैठक में मतदान केंद्रों पर मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता को लेकर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को ऐसे मतदान केंद्रों की पहचान करने के निर्देश दिए गए, जहां मोबाइल नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे स्थानों पर संबंधित दूरसंचार सेवा प्रदाताओं से समन्वय स्थापित कर नेटवर्क की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों यानी ईवीएम की सुरक्षा को लेकर भी मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने विशेष दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने ईवीएम वेयरहाउस के नियमित निरीक्षण और रखरखाव को निर्वाचन आयोग के निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने को कहा। वेयरहाउस में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग का कम से कम 30 दिनों का बैकअप उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जिन जिलों में ईवीएम की प्रथम स्तर की जांच चल रही है, वहां वेयरहाउस में सीलन, दीमक या अन्य तकनीकी समस्याएं मिलने पर उन्हें जांच अवधि के दौरान ही ठीक कराने को कहा गया है। संबंधित थानाध्यक्ष और पुलिस उपाधीक्षक को भी समय-समय पर ईवीएम वेयरहाउस की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि विधानसभा चुनाव की तैयारियों में किसी भी स्तर पर निर्धारित समयसीमा का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। सेक्टर अधिकारियों की नियुक्ति, मतदान केंद्रों का निरीक्षण, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और ईवीएम की सुरक्षा जैसे सभी महत्वपूर्ण कार्य समय रहते पूरे किए जाएं।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर निर्वाचन प्रशासन की यह गतिविधि महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक ओर राजनीतिक दल अपनी चुनावी तैयारियों में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर निर्वाचन आयोग मतदान प्रक्रिया से जुड़ी प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।





