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प्रयागराज। देशभर की रेलवे कॉलोनियों में रहने वाले लाखों रेल कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब रेलवे आवासों में पारंपरिक एलपीजी सिलेंडर की जगह पाइपलाइन के जरिए रसोई गैस यानी पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। रेलवे बोर्ड ने इस दिशा में सभी जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
रेलवे बोर्ड की इस पहल का उद्देश्य कर्मचारियों को सुरक्षित, सस्ती और लगातार उपलब्ध रहने वाली ईंधन सुविधा देना है। इसके लागू होने के बाद रेल कर्मचारियों को बार-बार सिलेंडर बुक कराने और उसे बदलवाने की परेशानी से राहत मिलेगी।
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सतीश कुमार ने देश के सभी जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों के महाप्रबंधकों को निर्देश दिए हैं कि रेलवे की आवासीय कॉलोनियों और कारखानों में पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा दिया जाए।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पाइप्ड नेचुरल गैस एलपीजी सिलेंडर की तुलना में अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित विकल्प माना जाता है। इसमें गैस की आपूर्ति सीधे पाइपलाइन के माध्यम से घरों तक होती है, जिससे सिलेंडर खत्म होने की चिंता नहीं रहती। कर्मचारी 24 घंटे जरूरत के अनुसार गैस का इस्तेमाल कर सकेंगे।
इस योजना से पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा। पीएनजी को स्वच्छ ईंधन माना जाता है, जिससे प्रदूषण कम करने में मदद मिलती है। केंद्र सरकार के स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा अभियान के तहत रेलवे भी अपने आवासीय परिसरों में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठा रहा है।
रेलवे की ओर से बताया गया है कि पीएनजी कनेक्शन लेने वाले कर्मचारियों को शुरुआती चरण में राहत भी दी जाएगी। इसके लिए तीन महीने तक सिक्योरिटी डिपॉजिट माफ करने का प्रावधान रखा गया है। इससे अधिक से अधिक कर्मचारी इस सुविधा को अपनाने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
रेलवे कॉलोनियों में पीएनजी व्यवस्था लागू करने के लिए संबंधित गैस कंपनियों के साथ समन्वय किया जाएगा। जहां पाइपलाइन की सुविधा उपलब्ध होगी, वहां जल्द कनेक्शन देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके अलावा जिन स्थानों पर अभी आधारभूत ढांचा तैयार नहीं है, वहां चरणबद्ध तरीके से काम किया जाएगा।
रेलवे देश के सबसे बड़े नियोक्ताओं में से एक है और इसकी हजारों आवासीय कॉलोनियों में कर्मचारी और उनके परिवार रहते हैं। ऐसे में पीएनजी सुविधा शुरू होने से बड़ी संख्या में लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से कर्मचारियों की सुविधा बढ़ेगी और ऊर्जा के सुरक्षित इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिलेगा। आने वाले समय में रेलवे की कॉलोनियों को अधिक आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।





