उत्तर प्रदेश

यूपी चुनाव में सीट बंटवारे की तैयारी, सपा से 150 से 200 सीटों पर दावेदारी की चर्चा में कांग्रेस

Kavita2
5 Oct 2026 9:16 AM IST
यूपी चुनाव में सीट बंटवारे की तैयारी, सपा से 150 से 200 सीटों पर दावेदारी की चर्चा में कांग्रेस
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे का मुद्दा अब प्रमुखता से सामने आ रहा है। दोनों दल साथ चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं और सीट शेयरिंग को लेकर इसी अक्टूबर में बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद है। कांग्रेस की ओर से 150 से 200 सीटों तक की दावेदारी से जुड़े बयान सामने आए हैं। कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने हाल में कहा कि अंतिम फैसला दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की बातचीत से होगा।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। ऐसे में गठबंधन के भीतर सीटों की संख्या के साथ यह सवाल भी अहम है कि कौन-सी सीट किस पार्टी के हिस्से में जाएगी। कांग्रेस बातचीत से पहले ऐसी सीटों का आकलन कर रही है, जहां उसका संगठन और सामाजिक आधार उसे मजबूत दावेदारी पेश करने की स्थिति में ला सकता है। इसके अलावा उसकी नजर उन विधानसभा क्षेत्रों पर भी है, जहां समाजवादी पार्टी पिछले चुनावों में जीत के करीब पहुंचकर हार गई थी।

कांग्रेस रणनीतिकारों का मानना है कि जिन सीटों पर समाजवादी पार्टी कम अंतर से चुनाव हारती रही है, उनमें गठबंधन के वोटों का बेहतर तालमेल परिणाम बदल सकता है। कांग्रेस ऐसे विधानसभा क्षेत्रों में अपनी दावेदारी रखना चाहती है। पार्टी के रणनीतिक आकलन के मुताबिक यदि कांग्रेस प्रत्याशी को सपा समर्थक मतदाताओं का साथ मिलता है और उसके अपने वोट भी जुड़ते हैं, तो गठबंधन को अतिरिक्त सीटें हासिल करने में मदद मिल सकती है। यह फिलहाल कांग्रेस की रणनीतिक दलील है, न कि सीट बंटवारे का तय फॉर्मूला।

कांग्रेस की रणनीति में पिछले विधानसभा चुनावों के परिणामों का अध्ययन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी उन सीटों पर भी ध्यान दे रही है, जहां सपा 2007 के बाद जीत दर्ज नहीं कर पाई या बहुत कम अंतर से पीछे रही। कांग्रेस इन सीटों के पुराने नतीजों, सामाजिक समीकरणों और अपने संगठन की स्थिति को सीट शेयरिंग की बातचीत में आधार बनाना चाहती है।

हालांकि सीटों की संख्या को लेकर दोनों दलों के नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आए हैं। कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने पहले 150 से कम सीटों पर नहीं लड़ने की बात कही थी। हाल में उन्होंने कहा कि उन्होंने 150 नहीं बल्कि 200 सीटों की बात की थी। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम सीट बंटवारा दोनों पार्टियों के वरिष्ठ नेतृत्व की बातचीत के बाद ही तय होगा।

दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सीटों की संख्या के बजाय गठबंधन की जीत पर जोर दिया है। उनका संदेश है कि चर्चा केवल इस बात पर केंद्रित नहीं होनी चाहिए कि किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी, बल्कि उन सीटों और उम्मीदवारों पर ध्यान होना चाहिए जहां गठबंधन बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

यही कारण है कि सीट शेयरिंग की औपचारिक बातचीत में केवल संख्या पर सहमति बनाना पर्याप्त नहीं होगा। दोनों पार्टियों को सीटवार समीकरणों पर भी चर्चा करनी होगी। किसी विधानसभा क्षेत्र में पिछले चुनाव का परिणाम, प्रत्याशी की स्थिति, पार्टी संगठन, स्थानीय सामाजिक समीकरण और गठबंधन के सहयोगी वोटों के हस्तांतरण जैसे मुद्दे बातचीत का हिस्सा बन सकते हैं।

कांग्रेस की कोशिश उन क्षेत्रों में ज्यादा सीटें हासिल करने की होगी, जहां पार्टी को अपने पुराने जनाधार या मौजूदा संगठन के आधार पर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। वहीं समाजवादी पार्टी अपने मजबूत विधानसभा क्षेत्रों को अपने पास रखना चाहेगी। इस कारण दोनों दलों के बीच कुछ सीटों पर दावेदारी आमने-सामने आने की संभावना बनी हुई है।

दोनों पार्टियों के लिए समय रहते सीटों का फैसला करना भी महत्वपूर्ण है। कांग्रेस के यूपी प्रभारी ने अक्टूबर में सीट शेयरिंग का मुद्दा सुलझाने की उम्मीद जताई है, ताकि प्रत्याशियों को चुनावी तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस ने 2024 का लोकसभा चुनाव भी गठबंधन में लड़ा था। उस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 37 और कांग्रेस ने छह लोकसभा सीटें जीती थीं। विधानसभा चुनाव में हालांकि सीटों की संख्या और स्थानीय राजनीतिक समीकरण अलग होंगे, इसलिए दोनों दलों को नए सिरे से सीटवार रणनीति तय करनी होगी।

कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती अपनी दावेदारी के समर्थन में सीटवार मजबूत आधार पेश करने की होगी। केवल सीटों की संख्या की मांग के बजाय पार्टी को यह भी बताना होगा कि किन विधानसभा क्षेत्रों में उसके उम्मीदवार और संगठन गठबंधन को फायदा पहुंचा सकते हैं। वहीं सपा की ओर से जीतने की क्षमता को प्राथमिकता देने का संदेश दिया जा रहा है।

फिलहाल सीटों का कोई अंतिम फॉर्मूला घोषित नहीं हुआ है। कांग्रेस की 150 से 200 सीटों तक की दावेदारी से जुड़े बयानों और सपा की जीत-केंद्रित रणनीति के बीच वास्तविक समझौता दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की बातचीत के बाद ही सामने आएगा। अक्टूबर में प्रस्तावित बातचीत इसलिए महत्वपूर्ण होगी क्योंकि इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में दोनों दल किस सीट-वितरण के साथ मैदान में उतरेंगे।

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