उत्तर प्रदेश

Prayagraj: उचित मुआवजा दिए बिना भूमि अधिग्रहण गैरकानूनी: हाईकोर्ट

Admindelhi1
11 March 2025 11:31 AM IST
Prayagraj: उचित मुआवजा दिए बिना भूमि अधिग्रहण गैरकानूनी: हाईकोर्ट
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"इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला"

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि संपत्ति का अधिकार संवैधानिक अधिकार है, जो मानवाधिकारों के समकक्ष है। किसी भी व्यक्ति को उचित विधिक प्रक्रिया अपनाए बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

अधिकारियों पर जुर्माने की चेतावनी: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य प्राधिकारियों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी नागरिक की भूमि का उपयोग बिना विधि सम्मत प्रक्रिया के नहीं किया जाए। यदि कोई प्राधिकारी अवैध रूप से भूमि अधिग्रहण का दोषी पाया जाता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा, जिसे उसके व्यक्तिगत खाते से वसूला जाएगा।

याची को उचित मुआवजे का आदेश

न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और अनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने याची कन्यावती की याचिका को स्वीकार करते हुए फैसला सुनाया। अदालत ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन और पुनर्स्थापना अधिनियम, 2013 के तहत याची को मुआवजे का हकदार मानते हुए जिला स्तरीय समिति को चार सप्ताह के भीतर ब्याज सहित उचित मुआवजा देने का निर्देश दिया।

याची ने बरेली में एक भूखंड खरीदा, जिसे राजस्व अभिलेखों में चक रोड बताया गया था। इसके बाद सड़क चौड़ीकरण के दौरान याची की भूमि का एक हिस्सा अधिग्रहित कर लिया गया। कई बार प्राधिकरण से मुआवजे की मांग करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद याची ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

जिला समिति ने किया था दावा खारिज

कोर्ट ने 12 मई 2016 के शासनादेश के अनुसार मामला जिला स्तरीय समिति को भेजने का आदेश दिया। लेकिन समिति ने यह कहते हुए याची के दावे को खारिज कर दिया कि सड़क के दोनों ओर अतिरिक्त भूमि थी, जिससे याची के व्यक्तिगत अधिकार का उल्लंघन नहीं हुआ।

हाईकोर्ट ने दिया मुआवजे का अधिकार

याची ने फिर से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने पाया कि करीब 20 वर्ष पहले चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने बिना अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाए चक रोड विकसित किया था। बाद में लोक निर्माण विभाग ने भी उचित प्रक्रिया के बिना याची की भूमि का हिस्सा लेकर सड़क चौड़ी कर दी।

संविधान का अनुच्छेद 300ए लागू

कोर्ट ने माना कि संविधान का अनुच्छेद 300ए प्रत्येक नागरिक को संपत्ति का अधिकार देता है और बिना विधिक प्रक्रिया के किसी की संपत्ति अधिग्रहण करना अवैध है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने याची को मुआवजा देने का आदेश पारित किया।

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