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Prayagraj: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानून के दुरुपयोग पर लगाई रोक

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पुलिस किसी नागरिक पर केवल अपनी “पीठ थपथपाने” या आंकड़े बेहतर दिखाने के लिए गैंगस्टर एक्ट नहीं लगा सकती। कोर्ट ने कहा कि गैंगस्टर एक्ट सामान्य आपराधिक धाराओं की अपग्रेडेड कॉपी नहीं है, जिसे हर मामले में यांत्रिक तरीके से लागू कर दिया जाए।न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने बस्ती निवासी उस्मान के खिलाफ दर्ज गैंगस्टर एक्ट मामले में गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए विवेचक और थाना प्रभारी से चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
कठोर कानून, सोच-समझकर हो प्रयोग
खंडपीठ ने टिप्पणी की कि गैंगस्टर एक्ट एक अत्यंत कठोर कानून है, जिसका प्रयोग केवल ठोस साक्ष्यों और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए ही किया जाना चाहिए। केवल पुलिस की छवि सुधारने या उपलब्धियां दिखाने के उद्देश्य से किसी व्यक्ति को गैंगस्टर घोषित करना कानून की मंशा के विपरीत है।कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की एक विस्तृत और अनिवार्य प्रक्रिया निर्धारित है, जिसका पालन किए बिना की गई कार्रवाई न्यायिक समीक्षा में टिक नहीं सकती।
क्या है मामला
मामला बस्ती जिले के पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने याची उस्मान के खिलाफ पहले से दर्ज एक आपराधिक मुकदमे के आधार पर गैंगस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया था।याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि जिस मुकदमे के आधार पर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया, उसमें याची पहले से जमानत पर है। इसके बावजूद पुलिस ने केवल आंकड़े सुधारने और उपलब्धियां दर्शाने के लिए गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई कर दी। अधिवक्ता का यह भी कहना था कि एफआईआर दर्ज करने से पहले एक्ट के अनिवार्य प्रावधानों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया तथा पूरी कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण है।हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को पुलिस कार्रवाई की न्यायिक समीक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई जवाबी हलफनामा दाखिल होने के बाद होगी।





