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Pratapgarh: मुख्यमंत्री योजना के तहत 663 जोड़े हुए विवाह बंधन में बंधे

प्रतापगढ़: उत्तर प्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजनान्तर्गत समाज कल्याण विभाग प्रतापगढ़ को 722 जोड़ों को दांपत्य सूत्र में बांधने का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2025 -26 के लिए निर्धारित था जिसे पूर्ण करने हेतु समाज कल्याण विभाग द्वारा दो तिथियों दिनांक 30 नवंबर एवं 4 दिसंबर में क्रमशः 360 एवं 362 दांपत्य जोड़ों(कुल 722जोड़ों) की शादी करने का ऐलान किया था। शहर स्थित राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में उक्त दोनों तिथियां में क्रमशः 320 एवं 343 जोड़ो कुल क्षेत्र 663 जोड़े ही जीवनसाथी बन सके, फिर भी 59 जोड़े एक दूजे के होने से वंचित रह गए। प्रथम चरण 30 नवंबर को विधायक विश्वनाथगंज जीत लाल पटेल ने एवं दूसरे चरण 4 दिसंबर को सदर विधायक राजेंद्र कुमार मौर्य ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की। साथ ही भाजपा अध्यक्ष एवं भाजपा के गिने चुने स्थानीय नेता ,प्रशासन एवं कुछ विभागाध्यक्ष तक ही अतिथि के रूप में शादी समारोह की भव्यता बढ़ाई।
बताते चलें कि समाज कल्याण विभाग ने 4 दिसंबर को सामूहिक विवाह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने हेतु जिले के प्रभारी मंत्री दया शंकर सिंह से संपर्क साधा और मंत्री ने उक्त कार्यक्रम में भाग लेने हेतु सहमति भी जताई, इस ख्याल से समाज कल्याण विभाग ने मंच की भव्यता बढ़ाने की जुगत में लग गया और फ्लेक्स में प्रभारी मंत्री द्वारा समारोह के उद्घाटन का बड़े और मोटे अक्षरों में अंकित करवाकर बैनर लगवाया लेकिन मंत्री के न आने से मायूसी छा गई। बाद में सदर विधायक राजेन्द्र कुमार मौर्य को आनन फानन में मुख्य अतिथि घोषित किया गया जो शादी की रस्में पूरी होने के बाद दाम्पत्य जोड़ों को आशीर्वाद देने हेतु देर से पधारे थे। इन सभी असमंजस भरी अव्यवस्थाओं से ऐसा प्रतीत होता है कि कहने को तो समाज कल्याण विभाग लेकिन समाज में विभाग की पहचान तक नहीं। शायद विभाग केवल कागजो तक सीमित दायरे में सिमट गया है। प्रशासन के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक को ही मुख्य अतिथि और अतिथि के रूप में आमंत्रित कर आयोजन की इतिश्री कर दी जाती है। इस इतने बड़े मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह में प्रतापगढ़ के स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग ,पत्रकार तक को आमंत्रित करने से परहेज किया गया जो अपने में सवाल है और दुर्भाग्यपूर्ण है।
इतना ही नहीं, समाज कल्याण विभाग में शासन द्वारा संचालित अनेक महत्वाकांक्षी योजनाओं एवं प्रगति से प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जन सामान्य को जानकारी देने में भी कोताही की जाती है। कुछेक योजनाओं को छोड़कर जैसे पूर्वदशम/दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना की ही प्रेस विज्ञप्ति बार बार जारी की जाती है,अन्य योजनाओं का ज़िक्र न किये जाने की विभाग की मंशा पर भी सवाल उठना लाजिमी है।विभाग ने शादी समारोह के चार दिन बीत जाने के बाद अभी तक यह बताने की जरूरत नहीं समझी कि उक्त शादी समारोहों में 59 जोड़े एक दूजे के होने से जो वंचित रह गए हैं उनका निकाह कब होगा या आगे क्या रूपरेखा होगी?
बताते चलें कि दैनिक* तरुणमित्र* के 29 नवंबर के अंक में शीर्षक* समाज के कल्याणार्थ जुटा है समाज कल्याण विभाग लेकिन पारदर्शिता का अभाव* समाचार प्रमुखता से प्रकाशित हुआ था कि एक जोड़ी दाम्पत्य पर शासन द्वारा कितनी देय धनराशि निर्धारित है और मदवार धनराशि का आवंटन क्या है? जिसके प्रकाशन का असर यह हुआ कि कतिपय समाचार पत्रों में 30 नवंबर को शासन द्वारा निर्धारित कुल धनराशि एवं मदवार धनराशि का प्रकाशन विभाग द्वारा करा दिया गया। इतना ही नहीं, इसका संज्ञान जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने गंभीरता से लिया और सामूहिक विवाह समारोह के दोनों तिथियां में अपनी गरिमामयी उपस्थिति में दांपत्य जोड़ो, उनके अभिभावकों एवं उपस्थित जनसमुदाय को अपने आशीर्वचन भाषण में स्पष्ट किया कि शासन द्वारा प्रत्येक जोड़े को ₹15000/ आयोजन में ,₹25000 उपहार के रूप में और ₹60000 लड़की के बैंक के खाते में भेजने हेतु निर्धारित किया गया है।





