उत्तर प्रदेश

फोन फेंककर गायब हुए प्रधान, वृंदावन में मिले

nidhi
7 Nov 2026 7:30 AM IST
फोन फेंककर गायब हुए प्रधान, वृंदावन में मिले
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प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंची पुलिस
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से करीब सात दिन पहले लापता हुए ग्राम प्रधान जानकीनाथ यादव के मिलने से उनके परिवार और पुलिस ने राहत की सांस ली है। थरवई थाना क्षेत्र के मनसैता गांव के ग्राम प्रधान जानकीनाथ यादव वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम में मिले। उनके अचानक लापता होने से परिवार परेशान था। परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी दर्ज कराते हुए अपहरण और हत्या की आशंका भी जताई थी। मामले की जांच में जुटी पुलिस मोबाइल से जुड़े सुरागों के आधार पर वृंदावन पहुंची और ग्राम प्रधान को अपने साथ प्रयागराज ले आई।
जानकारी के मुताबिक, 29 वर्षीय जानकीनाथ यादव 29 अक्टूबर की शाम अपने घर से लुंगी और बनियान पहनकर निकले थे। इसके बाद उनका मोबाइल बंद हो गया और परिवार से संपर्क टूट गया। काफी खोजबीन के बावजूद कोई सुराग नहीं मिलने पर उनके बड़े भाई छत्रपाल यादव ने 30 अक्टूबर को थरवई थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। बाद में तीन नवंबर को परिजनों ने अपहरण और हत्या की आशंका जताते हुए मुकदमा दर्ज कराया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने ग्राम प्रधान की तलाश के लिए 13 टीमें गठित की थीं। ड्रोन कैमरों, डॉग स्क्वायड और सर्विलांस की मदद से खोजबीन की गई। एसडीआरएफ की टीम ने नदी में भी तलाश की, लेकिन कई दिनों तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला। इस दौरान पुलिस ने कुछ संदिग्धों से पूछताछ भी की। पुलिस की जांच में उस समय नया मोड़ आया, जब चार नवंबर की रात जानकीनाथ यादव ने नया सिमकार्ड लेकर अपने चाचा और थरवई थाना प्रभारी को फोन किया। उन्होंने बताया कि वह वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम में मौजूद हैं। इस सूचना के बाद पुलिस ने उनकी लोकेशन की पुष्टि की और एक टीम तत्काल वृंदावन भेजी गई। वहां ग्राम प्रधान सकुशल मिल गए।
पूछताछ के दौरान जानकीनाथ यादव ने घर छोड़ने की पूरी कहानी बताई। उन्होंने पुलिस को बताया कि परिवार के साथ कहासुनी होने के कारण वह नाराज थे। इसी वजह से 29 अक्टूबर की शाम घर से निकल गए। पहले पैदल कछार के रास्ते फाफामऊ पहुंचे, जहां उन्होंने नए कपड़े खरीदे। इसके बाद रेलवे स्टेशन पहुंचकर लखनऊ जाने वाली ट्रेन पकड़ी।
30 अक्टूबर की सुबह वह गंगा गोमती एक्सप्रेस से लखनऊ पहुंचे। इसके बाद लखनऊ जंक्शन से आगरा के लिए रवाना हुए। आगरा पहुंचने के बाद झेलम एक्सप्रेस से मथुरा गए और वहां से वृंदावन पहुंचकर संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम में रुक गए। बताया गया कि उन्होंने यात्रा के दौरान अपना पुराना मोबाइल फोन ट्रेन से फेंक दिया था। ग्राम प्रधान के अचानक गायब होने और मोबाइल बंद मिलने से परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही थी। परिजनों को आशंका थी कि उनके साथ कोई गंभीर घटना हो गई है। इसी कारण पुलिस ने मामले को अपहरण की आशंका के आधार पर भी जांचा।
डीसीपी गंगानगर सोनम कुमार ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि ग्राम प्रधान पारिवारिक कहासुनी के बाद स्वयं घर से चले गए थे। जांच में उनके अपहरण या किसी अन्य आपराधिक घटना की पुष्टि नहीं हुई। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस ने उन्हें परिजनों के सुपुर्द कर दिया। करीब एक सप्ताह तक चले इस घटनाक्रम का अंत ग्राम प्रधान की सकुशल वापसी के साथ हुआ। जिस मामले में परिवार को हत्या तक की आशंका थी, उसमें आखिरकार पारिवारिक विवाद के कारण घर छोड़ने की बात सामने आई। ग्राम प्रधान के मिलने से परिवार को राहत मिली है।
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