उत्तर प्रदेश

10 मिनट में 75 टेस्ट करेगी पोर्टेबल मशीन, गांवों तक पहुंचेगी ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ तकनीक

Kavita2
29 Sept 2026 2:28 PM IST
10 मिनट में 75 टेस्ट करेगी पोर्टेबल मशीन, गांवों तक पहुंचेगी ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ तकनीक
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ग्रेटर नोएडा। अस्पताल या बड़ी डायग्नोस्टिक लैब तक पहुंचने में परेशानी झेलने वाले लोगों के लिए एक नई पोर्टेबल स्वास्थ्य तकनीक सामने आई है। ग्रेटर नोएडा में आयोजित ‘यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो’ में प्रदर्शित ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ तकनीक के जरिए छोटी सी मशीन से कई तरह की प्राथमिक स्वास्थ्य जांच मौके पर ही करने का दावा किया गया है। करीब तीन लाख रुपये कीमत वाली यह मशीन कार में आसानी से रखकर शहर की गलियों से लेकर दूर-दराज के गांवों तक पहुंचाई जा सकती है।

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह बताई गई है कि इसके जरिए करीब 10 मिनट में 75 तरह के टेस्ट किए जा सकते हैं। एक बूंद खून की मदद से कई स्वास्थ्य मानकों की जांच संभव होने का दावा किया गया है। इसके साथ ही ब्लड प्रेशर, शुगर, ईसीजी, शरीर का विश्लेषण, फेफड़ों की कार्यक्षमता और आंख, नाक तथा कान की जांच के लिए भी उपकरण इसमें शामिल किए गए हैं।

‘डॉक्टर्स ऑन ड्यूटी’ के फाउंडर और सीईओ डॉ. श्रेय श्रीवास्तव के अनुसार इस डिवाइस को प्राथमिक स्वास्थ्य जांच को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। उनका कहना है कि उद्देश्य ऐसी पोर्टेबल डायग्नोस्टिक सुविधा विकसित करना है, जिसे बड़े अस्पताल या भारी मशीनों वाली लैब के बिना भी अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सके।

इस मशीन की कीमत करीब तीन लाख रुपये बताई गई है। आकार छोटा होने के कारण इसे एक वाहन के जरिए आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है। इससे खास तौर पर उन इलाकों में स्वास्थ्य जांच की सुविधा पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जहां अस्पताल या जांच केंद्र काफी दूर हैं।

डिवाइस को बिजली की उपलब्धता पर पूरी तरह निर्भर नहीं रखा गया है। इसे सामान्य बिजली के अलावा बैटरी और सोलर पावर से भी चलाया जा सकता है। इससे ऐसे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में भी इसका इस्तेमाल संभव हो सकता है, जहां लगातार बिजली उपलब्ध नहीं रहती।

तकनीक को तैयार करने वाली टीम का दावा है कि प्राथमिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण जांच एक ही जगह करने से मरीजों को अलग-अलग लैब या जांच केंद्रों तक जाने की जरूरत कम हो सकती है। खासकर बुजुर्गों और ऐसे मरीजों के लिए यह सुविधा उपयोगी हो सकती है जिन्हें लंबी दूरी तय करने में परेशानी होती है।

मशीन में ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर जैसी सामान्य जांच के साथ ईसीजी करने की भी सुविधा बताई गई है। इसके जरिए हृदय की गतिविधियों की शुरुआती जांच की जा सकती है। वहीं लंग फंक्शन टेस्ट की मदद से फेफड़ों की कार्यक्षमता से जुड़ी जानकारी भी हासिल की जा सकती है।

आंख, नाक और कान की जांच की सुविधा को भी इस पोर्टेबल सिस्टम से जोड़ा गया है। यानी प्राथमिक स्वास्थ्य जांच के लिए कई अलग-अलग उपकरणों को एक ही प्लेटफॉर्म में शामिल करने की कोशिश की गई है।

‘सिंगल ड्रॉप ब्लड टेस्ट’ इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। तकनीक विकसित करने वालों के अनुसार एक बूंद खून के नमूने से विभिन्न स्वास्थ्य मानकों की जांच की जा सकती है। इससे कम समय में अधिक जांच करने की व्यवस्था तैयार करने का प्रयास किया गया है।

डॉ. श्रेय श्रीवास्तव के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य जांच में समय पर बीमारी के संकेतों का पता लगना बेहद महत्वपूर्ण है। कई लोग केवल इसलिए शुरुआती जांच नहीं करा पाते क्योंकि उनके क्षेत्र में लैब या अस्पताल उपलब्ध नहीं होते। ऐसे मामलों में पोर्टेबल मशीन को मरीज के पास पहुंचाना एक विकल्प बन सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों के लिहाज से इस मशीन का बैटरी और सौर ऊर्जा से चलना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई गांवों में अस्पतालों के साथ बिजली और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता भी चुनौती होती है। ऐसे स्थानों पर यदि जांच उपकरण को वैकल्पिक ऊर्जा से चलाया जा सके तो स्वास्थ्य शिविर आयोजित करना आसान हो सकता है।

इस तकनीक के जरिए मोबाइल हेल्थ कैंप भी लगाए जा सकते हैं। मशीन को कार या अन्य छोटे वाहन में रखकर अलग-अलग गांवों, कस्बों, स्कूलों, औद्योगिक क्षेत्रों और सामुदायिक केंद्रों तक पहुंचाया जा सकता है।

करीब 10 मिनट में 75 प्रकार की जांच करने का दावा इसे बड़े स्तर पर स्वास्थ्य स्क्रीनिंग के लिए भी उपयोगी बना सकता है। हालांकि किसी भी जांच के नतीजे के आधार पर अंतिम चिकित्सकीय निष्कर्ष डॉक्टर की सलाह और जरूरत के मुताबिक विस्तृत मेडिकल परीक्षण के बाद ही तय होगा।

‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ तकनीक का मकसद बड़े अस्पतालों का विकल्प बनना नहीं, बल्कि प्राथमिक स्क्रीनिंग और शुरुआती जांच को लोगों के करीब पहुंचाना बताया गया है। किसी व्यक्ति की जांच में बीमारी से जुड़े संकेत मिलने पर उसे आगे अस्पताल या विशेषज्ञ डॉक्टर के पास भेजा जा सकता है।

इस व्यवस्था से मरीजों के समय और यात्रा पर होने वाला खर्च भी कम हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को सामान्य जांच के लिए कई किलोमीटर दूर शहर जाने की जरूरत पड़ती है। अगर प्राथमिक जांच गांव में ही उपलब्ध हो जाए तो गंभीर मामलों की पहचान पहले की जा सकती है।

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में इस मशीन को स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीकी नवाचार के रूप में पेश किया गया। प्रदेश के युवाओं द्वारा विकसित इस सिस्टम के जरिए आधुनिक स्वास्थ्य तकनीक को कम संसाधन वाले क्षेत्रों तक पहुंचाने की संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया।

तकनीक में डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की सुविधा को आगे स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की संभावना भी देखी जा सकती है। इससे जांच के नतीजों को डॉक्टर तक पहुंचाकर आगे की सलाह ली जा सकती है और मरीज के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को संभालना आसान हो सकता है।

देश में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के सामने बड़ी चुनौती दूर-दराज के क्षेत्रों तक जांच सुविधाएं पहुंचाने की है। कई जगह डॉक्टर उपलब्ध होने के बावजूद जांच उपकरण और लैब न होने से बीमारी का समय पर पता नहीं चल पाता। पोर्टेबल डायग्नोस्टिक तकनीक इस अंतर को कम करने में मददगार साबित हो सकती है।

तीन लाख रुपये की लागत वाली इस मशीन को ऐसे मॉडल के रूप में पेश किया गया है, जिसे छोटे स्वास्थ्य केंद्र, मोबाइल क्लीनिक या स्वास्थ्य शिविर में लगाया जा सकता है। भारी मशीनरी और बड़ी इमारत की जरूरत नहीं होने के कारण इसकी स्थापना के लिए भी अपेक्षाकृत कम जगह की आवश्यकता होगी।

फिलहाल ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ तकनीक ने यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। यदि बड़े स्तर पर इसका इस्तेमाल सफल रहता है तो शहरों के साथ ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की पहुंच बढ़ाने में यह एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।

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