उत्तर प्रदेश

औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण की जांच तेज 30 स्थानों से लिए गए पानी के नमूने

Kavita2
10 Sept 2026 3:30 PM IST
औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण की जांच तेज 30 स्थानों से लिए गए पानी के नमूने
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गजरौला। औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण और पानी की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लखनऊ की टीम बुधवार को क्षेत्र में पहुंची। टीम ने नाईपुरा, बुधनगर और अलीपुर समेत विभिन्न स्थानों का निरीक्षण किया तथा जांच के लिए करीब 25 से 30 पानी के नमूने एकत्र किए। वरिष्ठ अधिकारियों की टीम के क्षेत्र में पहुंचने की सूचना मिलते ही औद्योगिक इकाइयों में हड़कंप की स्थिति दिखाई दी।

जानकारी के अनुसार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम बुधवार सुबह करीब 10 बजे नाईपुरा और बुधनगर क्षेत्र पहुंची। टीम में चीफ इंजीनियर, प्रोफेसर और अभियंता सहित कई अधिकारी शामिल रहे। अधिकारियों ने सबसे पहले ग्रामीण इलाकों का निरीक्षण किया और स्थानीय लोगों से पानी की गुणवत्ता, रंग, गंध तथा उसके इस्तेमाल के बाद सामने आ रही समस्याओं के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने पानी के प्रदूषित होने का आरोप लगाते हुए अपनी समस्याएं रखीं।

ग्रामीणों ने टीम को बताया कि पिछले कुछ समय से क्षेत्र के पानी के रंग में बदलाव दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर हैंडपंप से निकलने वाला पानी सामान्य नहीं दिखता। ग्रामीणों का आरोप है कि पानी की गुणवत्ता खराब होने के कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में बीमारियां फैलने की बात भी अधिकारियों के सामने रखी। उन्होंने आशंका जताई कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला प्रदूषित पानी भूजल को प्रभावित कर सकता है।

ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए टीम ने नाईपुरा और बुधनगर में लगे हैंडपंपों से पानी के नमूने एकत्र किए। नमूने लेते समय आवश्यक प्रक्रिया का पालन किया गया ताकि प्रयोगशाला में होने वाली जांच के दौरान सही परिणाम सामने आ सकें। अधिकारियों ने संबंधित स्थानों का विवरण भी दर्ज किया। टीम ने यह जानने का प्रयास किया कि किन इलाकों में पानी के रंग और गुणवत्ता में सबसे अधिक बदलाव दिखाई दे रहा है।

नाईपुरा और बुधनगर में जांच पूरी करने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम अलीपुर पहुंची। यहां भी अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत की और अलग-अलग स्रोतों से पानी के नमूने लिए। बताया जा रहा है कि पूरे निरीक्षण अभियान के दौरान करीब 25 से 30 नमूने एकत्र किए गए हैं। इनमें हैंडपंप और क्षेत्र में उपलब्ध अन्य जल स्रोतों के नमूने शामिल हैं। सभी नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा।

प्रयोगशाला में पानी के नमूनों की विस्तृत जांच के बाद यह साफ हो सकेगा कि पानी में किसी प्रकार के हानिकारक रासायनिक तत्व मौजूद हैं या नहीं। जांच में पानी का रंग, गंध, पीएच स्तर और उसमें घुले पदार्थों सहित विभिन्न मानकों का परीक्षण किया जा सकता है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि क्षेत्र का पानी पीने और घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित है या नहीं।

अधिकारियों के औद्योगिक क्षेत्र में पहुंचने की जानकारी मिलते ही आसपास संचालित इकाइयों में भी हलचल बढ़ गई। बताया गया कि टीम ने जल स्रोतों के साथ क्षेत्र की पर्यावरणीय स्थिति का भी जायजा लिया। हालांकि जांच के दौरान किसी इकाई के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया अपनाने की बात कही है।

क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता व्यक्त करते रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर पड़ सकता है। कई परिवार हैंडपंप के पानी पर निर्भर हैं। ऐसे में पानी की गुणवत्ता खराब होने पर उनके पास पेयजल का सुरक्षित विकल्प सीमित हो जाता है। लोगों ने प्रशासन से शुद्ध पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग भी उठाई।

ग्रामीणों का आरोप है कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट का उचित निस्तारण नहीं किए जाने पर उसका प्रभाव आसपास की जमीन और भूजल पर पड़ सकता है। उन्होंने अधिकारियों से केवल नमूने लेने तक कार्रवाई सीमित न रखने और जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की। ग्रामीणों ने कहा कि यदि पानी में प्रदूषण की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार इकाइयों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम द्वारा बड़ी संख्या में नमूने लिए जाने से ग्रामीणों को समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी जीवन की बुनियादी आवश्यकता है और उसकी गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। क्षेत्र में नियमित रूप से पानी की जांच होनी चाहिए ताकि किसी संभावित खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार भूजल प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। एक बार दूषित तत्व जमीन के भीतर पहुंच जाएं तो उन्हें हटाना कठिन हो सकता है। ऐसे मामलों में प्रदूषण के स्रोत की पहचान और उस पर तत्काल नियंत्रण बेहद जरूरी होता है। औद्योगिक इकाइयों में अपशिष्ट निस्तारण की व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुसार होना आवश्यक है। इसके साथ ही आसपास के जल स्रोतों की नियमित निगरानी भी की जानी चाहिए।

अब सभी की नजर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रयोगशाला रिपोर्ट पर टिकी है। रिपोर्ट आने के बाद ही पानी की वास्तविक गुणवत्ता और उसमें मौजूद तत्वों के बारे में स्थिति स्पष्ट होगी। यदि जांच में प्रदूषण की पुष्टि होती है तो संबंधित औद्योगिक इकाइयों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जा सकते हैं। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।

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