उत्तर प्रदेश

सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण पर सियासत गरम

Kavita2
10 Sept 2026 9:14 AM IST
सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण पर सियासत गरम
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सहारनपुर: कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। मस्जिद पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद ने सवाल खड़े करते हुए इसे गंभीर राजनीतिक मुद्दा बताया है। सांसद ने आरोप लगाया कि सहारनपुर को भी संभल बनाने की कोशिश की गई थी, लेकिन यहां के लोगों ने आपसी सौहार्द और भाईचारा बनाए रखा। उन्होंने कहा कि तमाम परिस्थितियों के बावजूद शहर में नफरत का माहौल नहीं बनने दिया गया और हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच आपसी संबंध कायम रहे।

इमरान मसूद ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी विवाद का समाधान तथ्यों, रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर होना चाहिए। उनका आरोप है कि इस मामले में प्रशासन ने रिकॉर्ड में मौजूद तथ्यों और दस्तावेजों को नजरअंदाज करने की कोशिश की। सांसद ने कहा कि सरकारी कागजों में दर्ज तथ्यों को छिपाया नहीं जा सकता और दस्तावेजों में जो दर्ज है, उसे सामने लाना ही होगा।

प्रशासन की कार्रवाई पर उठाए सवाल

मस्जिद के ध्वस्तीकरण का मुद्दा सामने आने के बाद से ही सहारनपुर में राजनीतिक हलचल तेज है। सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई की प्रक्रिया और उसके आधार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक स्थल से जुड़े मामले में प्रशासन को पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी जमीन या निर्माण को लेकर विवाद है तो उसके समाधान के लिए पुराने रिकॉर्ड, राजस्व दस्तावेज और अन्य संबंधित कागजातों की जांच जरूरी है।

सांसद ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने दस्तावेजों में मौजूद तथ्यों को महत्व नहीं दिया। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी को नजरअंदाज करने से वास्तविक स्थिति नहीं बदल सकती। उनके मुताबिक, दस्तावेज किसी भी विवाद में महत्वपूर्ण आधार होते हैं और उन्हें सार्वजनिक जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए।

'सहारनपुर को संभल बनाने की कोशिश थी'

इमरान मसूद ने अपने बयान में सहारनपुर की तुलना संभल से करते हुए बड़ा राजनीतिक आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सहारनपुर को भी संभल बनाने की कोशिश थी। हालांकि, उनके अनुसार यहां के लोगों ने समझदारी दिखाई और किसी तरह का तनाव बढ़ने नहीं दिया।

सांसद ने कहा कि सहारनपुर की जनता ने आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को प्राथमिकता दी। उनके मुताबिक, शहर में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच लंबे समय से आपसी संबंध हैं और लोगों ने इसे बनाए रखने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि सहारनपुर में नफरत नहीं फैली और लोगों ने शांति एवं भाईचारे का परिचय दिया।

उनके इस बयान के बाद मस्जिद ध्वस्तीकरण का मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। विपक्षी दल और स्थानीय राजनीतिक नेता प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई के पीछे बताए गए कारणों को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है।

दस्तावेजों को लेकर आमने-सामने की स्थिति

इमरान मसूद ने इस पूरे मामले में रिकॉर्ड और दस्तावेजों को सबसे महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि यदि किसी संपत्ति, जमीन या धार्मिक स्थल की स्थिति को लेकर विवाद है तो पुराने सरकारी रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कागजों में मौजूद तथ्यों को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है।

सांसद ने कहा कि सरकारी दस्तावेजों में जो तथ्य दर्ज हैं, उन्हें न तो दबाया जा सकता है और न ही नजरअंदाज किया जा सकता है। उन्होंने प्रशासन से पारदर्शिता के साथ पूरे मामले को सामने रखने की मांग की। उनका कहना है कि इससे न केवल विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि लोगों के बीच पैदा होने वाली गलतफहमियों को भी दूर किया जा सकेगा।

सौहार्द बनाए रखने पर जोर

सांसद इमरान मसूद ने अपने बयान में लगातार सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि सहारनपुर की पहचान आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब से जुड़ी रही है। ऐसे में किसी भी कार्रवाई या विवाद का असर आम लोगों के रिश्तों पर नहीं पड़ना चाहिए।

उन्होंने लोगों से भी शांति बनाए रखने और किसी तरह की अफवाह पर भरोसा नहीं करने की अपील की। सांसद के मुताबिक, किसी विवाद का राजनीतिक या धार्मिक रंग बढ़ाने के बजाय उसे कानून और दस्तावेजों के आधार पर सुलझाने की जरूरत है।

राजनीतिक तापमान बढ़ने के संकेत

मस्जिद ध्वस्तीकरण को लेकर इमरान मसूद के बयान ने सहारनपुर की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। उनके 'सहारनपुर को संभल बनाने की कोशिश' वाले आरोप को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा स्थानीय राजनीति के साथ-साथ प्रदेश स्तर पर भी चर्चा का विषय बन सकता है।

फिलहाल सांसद की ओर से प्रशासन पर लगाए गए आरोपों का केंद्र रिकॉर्ड और दस्तावेज हैं। वहीं, सहारनपुर में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना भी प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में पूरे मामले में प्रशासन की ओर से सामने आने वाले तथ्य और दस्तावेज आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मस्जिद ध्वस्तीकरण से जुड़े विवाद पर आगे क्या कार्रवाई होती है और प्रशासन इन आरोपों पर क्या जवाब देता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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