उत्तर प्रदेश

Jauhar यूनिवर्सिटी पर सियासत तेज, सपा ने क्यों झोंकी पूरी ताकत?

Ratna Netam
23 July 2026 9:22 PM IST
Jauhar   यूनिवर्सिटी पर सियासत तेज, सपा ने क्यों झोंकी पूरी ताकत?
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रामपुर। उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। विश्वविद्यालय के 38 भवनों को ध्वस्त किए जाने के नोटिस के बाद समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे पर खुलकर मोर्चा संभाल लिया है। विश्वविद्यालय को बचाने के समर्थन में चल रहे धरना-प्रदर्शन के बीच नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में सपा के करीब 45 विधायक और पूर्व विधायक रामपुर पहुंचे।

सपा नेताओं के इस दौरे को आजम खां के मुश्किल दौर में पार्टी के बड़े राजनीतिक समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से आजम खां और समाजवादी पार्टी नेतृत्व के रिश्तों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन जौहर यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर पार्टी ने एकजुटता दिखाते हुए अपने वरिष्ठ नेता के समर्थन में ताकत का प्रदर्शन किया है।

सपा नेताओं के रामपुर पहुंचने के बाद राजनीतिक गलियारों में इस दौरे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि पार्टी इस पूरे मामले के जरिए एक मजबूत राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रही है। सपा यह दिखाना चाहती है कि वह अपने वरिष्ठ नेताओं और उनसे जुड़े संस्थानों के मुद्दों पर मजबूती के साथ खड़ी है।

जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर चल रहे विवाद के बीच सपा नेताओं ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और इससे जुड़े फैसलों पर निष्पक्ष तरीके से विचार किया जाना चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जौहर यूनिवर्सिटी का मामला सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक प्रभाव भी हैं। आजम खां समाजवादी पार्टी के पुराने और प्रभावशाली नेताओं में शामिल रहे हैं। ऐसे में पार्टी के कई बड़े नेताओं का एक साथ रामपुर पहुंचना संगठनात्मक एकजुटता का संकेत माना जा रहा है।

आजम खां लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में सपा का यह समर्थन उनके लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि संगठन अपने पुराने नेताओं के साथ खड़ा है।

गौरतलब है कि जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर पहले भी कई विवाद सामने आ चुके हैं। जमीन, निर्माण और प्रशासनिक मामलों को लेकर विश्वविद्यालय चर्चा में रहा है। अब 38 भवनों को ध्वस्त किए जाने के नोटिस के बाद मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है।

सपा के इस शक्ति प्रदर्शन को आगामी राजनीतिक रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी जहां एक ओर अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को एकजुट करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार के फैसलों के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई को भी मजबूत करना चाहती है।

फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी का मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं दोनों तेज होने की संभावना है। सपा के इस प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि पार्टी इस मामले को केवल स्थानीय मुद्दे तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे व्यापक राजनीतिक मुद्दे के रूप में उठा रही है।

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