उत्तर प्रदेश

चंदा विवाद पर गर्मायी राजनीति

Saba Naaz
27 Jun 2026 4:50 PM IST
चंदा विवाद पर गर्मायी राजनीति
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अयोध्या: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में कथित चंदा चोरी (चढ़ावा घोटाला) को लेकर देश में सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। इस पूरे विवाद के बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे की खबरों पर तीखी बहस छिड़ गई है। इस संवेदनशील मुद्दे पर अब उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन जितेंद्र नारायण सिंह (वसीम रिजवी) का एक बड़ा और अहम बयान सामने आया है। उन्होंने चंपत राय के इस्तीफे को जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताते हुए इसका पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक विशेष जांच दल (SIT) की पूरी रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक किसी को भी दोषी या आरोपी ठहराना पूरी तरह गलत है।

'चंपत राय का इस्तीफा देना गलत, जांच पूरी होने का करना था इंतजार'

समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत के दौरान पूर्व शिया वक्फ बोर्ड चेयरमैन जितेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि चंपत राय को इतनी जल्दबाजी में अपने पद से इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। उन्होंने तर्क दिया कि राम मंदिर का मुद्दा देश के करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की गहरी आस्था से जुड़ा हुआ है। जब इस मामले में जांच की प्रक्रिया चल रही है, तो अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले किसी को भी दोषी मान लेना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि बड़े संस्थानों और ट्रस्टों में कई बार कुछ लोग आपसी भरोसे का गलत फायदा उठा लेते हैं, जिसकी गहनता से जांच होना बेहद जरूरी है।

विपक्ष और संजय सिंह पर तीखा हमला, लगाया 'सियासी रंग' देने का आरोप

जितेंद्र नारायण सिंह ने इस पूरे मामले को लेकर विपक्षी दलों, खासकर आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि संजय सिंह जैसे कुछ राजनीतिक नेता करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़े इस पवित्र मुद्दे को केवल अपने राजनीतिक फायदे के लिए 'सियासी रंग' देने पर तुले हुए हैं। उन्होंने कहा कि चंदा चोरी का मामला निश्चित रूप से गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन जांच से पहले इस पर राजनीति करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

पूर्व चेयरमैन ने विपक्ष से पूछा- 'मंदिर निर्माण में आपका कितना योगदान?'

विपक्षी नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए पूर्व वक्फ बोर्ड चेयरमैन ने एक बड़ा सवाल उछाला। उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट पर उंगली उठाने वाले और इस मुद्दे पर लगातार बयानबाजी कर रहे नेताओं से पूछा कि जो लोग आज पारदर्शिता की बात कर रहे हैं, वे सबसे पहले यह सार्वजनिक करें कि उन्होंने खुद भव्य राम मंदिर के निर्माण में कितने करोड़ रुपये का आर्थिक योगदान दिया है? उन्होंने अपने बयान के अंत में इस बात पर विशेष जोर दिया कि किसी भी प्रतिष्ठित व्यक्ति पर लगे आरोपों का अंतिम फैसला केवल और केवल कानूनी और प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही होना चाहिए। जब तक एसआईटी (SIT) या संबंधित जांच एजेंसियां अपनी रिपोर्ट पेश नहीं कर देतीं, तब तक कयासों के आधार पर किसी को कटघरे में खड़ा करना सही नहीं है।

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