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Meerut मामले पर सियासी घमासान, मायावती ने चंद्रशेखर पर कसा तंज

Lucknow लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान के लिए संवैधानिक और कानूनी रास्तों को अपनाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाय राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से सड़क जाम और प्रदर्शन जैसे तरीकों का सहारा लेते हैं।
मायावती ने कहा कि दलितों, पिछड़ों और वंचित वर्गों के हितों की रक्षा केवल गंभीर और जिम्मेदार राजनीति के माध्यम से ही की जा सकती है। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों के मुद्दों को लेकर संवेदनशीलता जरूरी है, लेकिन किसी भी मामले में कानून व्यवस्था प्रभावित करने वाले कदमों से बचना चाहिए।
बसपा प्रमुख ने कहा कि जनता अब केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई और वास्तविक परिणाम चाहती है। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे गंभीर मामलों में संयम बरतें और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में काम करें।
मायावती ने कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों पर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि किसी भी घटना में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब मेरठ के चर्चित ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर प्रदेश की राजनीति गर्म है। इस मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता पीड़ित परिवार से मुलाकात कर रहे हैं और अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
हाल ही में नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे। हालांकि, पुलिस ने उन्हें गांव जाने से पहले सिवाया टोल प्लाजा पर रोक दिया था। इसके बाद उन्होंने टोल प्लाजा के कंट्रोल रूम में पीड़ित परिवार से मुलाकात की और न्याय की लड़ाई में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया था।
मायावती की टिप्पणी को इसी राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए उन नेताओं पर निशाना साधा, जो संवेदनशील मामलों को लेकर सड़क पर उतरकर आंदोलन करते हैं। हालांकि, उनके बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना है।
बसपा प्रमुख ने एक बार फिर अपनी पार्टी की राजनीति को संवैधानिक संघर्ष और कानूनी प्रक्रिया से जोड़ते हुए कहा कि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए, लेकिन न्याय की मांग के लिए लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों का पालन किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि समाज में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।





