उत्तर प्रदेश

Sambhal रिपोर्ट पर सियासी हलचल तेज, न्यायिक आयोग ने जांच में दर्ज किए कई बिंदु

Ratna Netam
21 July 2026 8:39 PM IST
Sambhal  रिपोर्ट पर सियासी हलचल तेज, न्यायिक आयोग ने जांच में दर्ज किए कई बिंदु
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Lucknow लखनऊ : उत्तर प्रदेश के संभल में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग की रिपोर्ट मंगलवार को प्रदेश कैबिनेट के सामने पेश की गई। करीब 450 पन्नों की यह रिपोर्ट अब विधानसभा के मानसून सत्र में विधानमंडल के पटल पर रखी जाएगी। रिपोर्ट को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार, न्यायिक आयोग ने अपनी रिपोर्ट पिछले वर्ष अगस्त में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी थी। इसके बाद रिपोर्ट को कैबिनेट के समक्ष रखा गया। अब सरकार इसे विधानसभा में प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है। आयोग ने संभल हिंसा के कारणों, घटनाक्रम, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की है।

सूत्रों के अनुसार, आयोग की रिपोर्ट में हिंसा के पीछे कई कारणों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में कथित तौर पर सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के भाषण को भी हिंसा से जोड़कर देखा गया है। सूत्रों का दावा है कि रिपोर्ट में कहा गया है कि कथित भड़काऊ भाषण के बाद पठान और तुर्क समुदायों के बीच तनाव बढ़ा, जिसके बाद हालात बिगड़े और फायरिंग की घटना में चार लोगों की मौत हुई।

रिपोर्ट में संभल की सामाजिक और जनसांख्यिकीय स्थिति में आए बदलाव का भी उल्लेख होने की बात कही जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, आयोग ने क्षेत्र की बदलती आबादी और उससे जुड़े सामाजिक तनावों पर भी अपनी टिप्पणियां दर्ज की हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लंबे समय में हुए बदलावों ने स्थानीय स्तर पर कई तरह के विवादों को जन्म दिया।

सूत्रों के अनुसार, न्यायिक जांच रिपोर्ट में संभल की डेमोग्राफी बदलने को लेकर की गई कथित साजिशों का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में यह उल्लेख होने की बात सामने आई है कि जब तक संभल नगर पालिका क्षेत्र में हिंदू आबादी 40 प्रतिशत से अधिक थी, तब तक विभिन्न विवादों के कारण समुदायों के बीच तनाव बना रहा।

रिपोर्ट के अनुसार, बाद के वर्षों में आबादी के अनुपात में बदलाव के साथ सामाजिक समीकरण भी बदले। सूत्रों का कहना है कि आयोग ने अपने निष्कर्षों में बताया है कि संभल में हिंदू आबादी कम होने के बाद समुदायों के बीच आपसी मतभेद बढ़े और कुछ वर्गों के बीच खाई गहरी होती गई।

हालांकि, रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद ही इसके सभी तथ्यों और निष्कर्षों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी। सरकार की ओर से अभी रिपोर्ट के सभी बिंदुओं को सार्वजनिक नहीं किया गया है। विधानसभा में रिपोर्ट रखे जाने के बाद इसके निष्कर्षों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

गौरतलब है कि 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान संभल में हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान पथराव, आगजनी और फायरिंग की घटनाएं सामने आई थीं। घटना के बाद सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया था। आयोग को हिंसा के कारणों, जिम्मेदार परिस्थितियों और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों की जांच का जिम्मा सौंपा गया था।

अब रिपोर्ट के विधानसभा में पेश होने के बाद संभल हिंसा को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। सरकार जहां रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी, वहीं विपक्ष भी रिपोर्ट के निष्कर्षों पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकता है।

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