उत्तर प्रदेश

चार्जशीट के बाद दागी वकीलों पर बढ़ी पुलिस की निगरानी

Ratna Netam
12 Aug 2026 2:06 PM IST
चार्जशीट के बाद दागी वकीलों पर बढ़ी पुलिस की निगरानी
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लखनऊ : पेशे की मर्यादा से भटककर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने वाले वकीलों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद लंबे समय से थानों में लंबित पड़े वकीलों से जुड़े मुकदमों की फाइलें अब तेजी से निपटाई जा रही हैं। पुलिस ने इन मामलों में जांच पूरी कर चार्जशीट अदालत भेजने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। खास बात यह है कि वकीलों के खिलाफ शिकायतों और मुकदमों की निगरानी के लिए गठित विशेष प्रकोष्ठ ने महज 15 दिनों के भीतर 200 से ज्यादा मामलों में चार्जशीट दाखिल कर अदालत को भेज दी है। वहीं, 100 से अधिक मामलों में अभी चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया चल रही है।
हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद पुलिस ने 25 जुलाई को वकीलों के खिलाफ शिकायतों की निगरानी और कार्रवाई के लिए विशेष प्रकोष्ठ का गठन किया था। इस प्रकोष्ठ का उद्देश्य ऐसे मामलों को अलग से देखना है, जिनमें वकीलों पर आपराधिक गतिविधियों, दबंगई, मारपीट, धमकी या अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत दर्ज कराने के लिए एक मोबाइल नंबर भी जारी किया था, ताकि लोग सीधे अपनी शिकायत इस विशेष व्यवस्था तक पहुंचा सकें।
विशेष प्रकोष्ठ के गठन के बाद शहर और ग्रामीण इलाकों के विभिन्न थानों में वकीलों के खिलाफ दर्ज पुराने और लंबित मामलों का रिकॉर्ड जुटाया गया। पुलिस ने इन मामलों की जानकारी संबंधित थानों से मंगाकर उनकी समीक्षा शुरू की। इसके बाद जिन मामलों में जांच पूरी हो चुकी थी और पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध थे, उनमें चार्जशीट तैयार कर अदालत भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक केवल 15 दिनों के भीतर 200 से अधिक मामलों में चार्जशीट न्यायालय को भेजी जा चुकी है। इसके अलावा 100 से ज्यादा मामलों की जांच पूरी करने और उनमें नियमानुसार चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया जारी है।
पुलिस के अनुसार विशेष प्रकोष्ठ में रोजाना वकीलों के खिलाफ नई शिकायतें भी पहुंच रही हैं। पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर गठित इस प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी जेसीपी कानून व्यवस्था को दी गई है। यहां आने वाली शिकायतों में पीड़ितों से प्रार्थनापत्र लिया जाता है और इसके बाद संबंधित थाने से मामले की जांच कराई जाती है। जांच के दौरान यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है और संबंधित वकील की आपराधिक गतिविधि में संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाती है।
पुलिस की जांच में कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर वकीलों ने संगठित तरीके से काम किया। ऐसे मामलों में अकेले किसी एक व्यक्ति की भूमिका के बजाय कई लोगों के साथ मिलकर गतिविधियां संचालित करने की शिकायतें सामने आई हैं। विशेष प्रकोष्ठ ने ऐसे वकीलों और कुछ लीगल एसोसिएट्स की सूची भी तैयार की है। पुलिस के मुताबिक 40 से अधिक वकीलों और लीगल एसोसिएट्स को चिह्नित किया जा चुका है। अब उनके खिलाफ उपलब्ध रिकॉर्ड और आपराधिक मामलों से संबंधित जानकारी को अदालत के समक्ष भेजने की तैयारी की जा रही है।
इस कार्रवाई के पीछे हाईकोर्ट की सख्ती को अहम वजह माना जा रहा है। अदालत ने वकीलों से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए लंबित मामलों को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पुलिस महकमे ने ऐसे मामलों की निगरानी के लिए अलग व्यवस्था तैयार की। पहले अलग-अलग थानों में दर्ज मामलों की फाइलें लंबे समय तक लंबित रहती थीं, लेकिन विशेष प्रकोष्ठ के गठन के बाद इन मामलों को एक जगह समन्वित तरीके से देखा जा रहा है।
जेसीपी कानून व्यवस्था बबलू कुमार के अनुसार कोर्ट के आदेश के तहत वकीलों से जुड़े मामलों को विशेष प्रकोष्ठ में देखा जा रहा है। अब तक 200 से अधिक मामलों में चार्जशीट न्यायालय को भेजी जा चुकी है। अन्य मामलों में भी नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उनका कहना है कि विशेष प्रकोष्ठ में नई शिकायतें भी लगातार प्राप्त हो रही हैं और प्रत्येक शिकायत की जांच कराई जा रही है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की इस कार्रवाई से उन मामलों में भी तेजी आने की उम्मीद है, जिनमें लंबे समय से जांच या चार्जशीट दाखिल होने का इंतजार किया जा रहा था। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को केवल पेशे के आधार पर कानून से अलग नहीं माना जा सकता। यदि किसी वकील के खिलाफ आपराधिक गतिविधि में शामिल होने के पर्याप्त तथ्य सामने आते हैं, तो उसके खिलाफ भी कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, पुलिस की कार्रवाई का आधार आरोप नहीं बल्कि जांच में सामने आने वाले तथ्य और साक्ष्य होंगे। विशेष प्रकोष्ठ में आने वाली शिकायतों की जांच संबंधित थानों से कराई जा रही है, ताकि वास्तविक मामलों में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य लंबित मामलों का निस्तारण करने के साथ-साथ आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों पर कानून के तहत कार्रवाई करना है।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद शुरू हुई यह कार्रवाई अब तेजी से आगे बढ़ रही है। 200 से ज्यादा मामलों में चार्जशीट अदालत पहुंच चुकी है और 100 से अधिक मामलों में प्रक्रिया जारी है। आने वाले दिनों में विशेष प्रकोष्ठ की जांच के आधार पर और भी मामलों में चार्जशीट दाखिल होने की संभावना है। साथ ही संगठित तरीके से काम करने वाले चिह्नित वकीलों और लीगल एसोसिएट्स के रिकॉर्ड को भी अदालत के सामने रखने की तैयारी की जा रही है।
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