उत्तर प्रदेश

रेलमंत्री से मिलने जा रहे किसान नेता अजीत सिंह को पुलिस ने रोका

Kavita2
31 Oct 2026 5:39 PM IST
रेलमंत्री से मिलने जा रहे किसान नेता अजीत सिंह को पुलिस ने रोका
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जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में औड़िहार-जौनपुर रेलखंड पर अंडरपास निर्माण की मांग को लेकर शनिवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। पूरनपुर गांव में रेलवे अंडरपास बनवाने की मांग को लेकर केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से मिलने जा रहे किसान नेता अजीत सिंह को पुलिस ने चंदवक स्थित उनके संगठन के कार्यालय में ही रोक दिया। किसान नेता के साथ मौजूद ग्रामीणों और किसानों को भी कार्यालय से बाहर जाने से रोके जाने की जानकारी सामने आई है। इस कार्रवाई को किसान नेता ने ऑफिस अरेस्ट बताते हुए नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि किसानों की आवाज को इस तरह दबाया नहीं जा सकता और अंडरपास निर्माण की मांग पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

जानकारी के अनुसार, औड़िहार-जौनपुर रेल प्रखंड के पूरनपुर गांव में रेलवे अंडरपास की मांग को लेकर किसान लंबे समय से अपनी आवाज उठा रहे हैं। इसी मांग को केंद्रीय रेलमंत्री तक पहुंचाने के उद्देश्य से किसान नेता अजीत सिंह शनिवार को ग्रामीणों और किसानों के साथ उनसे मिलने जाने वाले थे। लेकिन इससे पहले ही पुलिस चंदवक स्थित संगठन के कार्यालय पहुंच गई और उन्हें वहीं रोक दिया। सुबह से शाम तक पुलिसकर्मी कार्यालय में मौजूद रहे और वहां होने वाली गतिविधियों पर नजर बनाए रखी।

रेलमंत्री से मुलाकात करने से पहले पुलिस ने रोका

बताया जा रहा है कि किसान नेता अजीत सिंह पूरनपुर गांव में अंडरपास निर्माण की मांग को लेकर रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव के समक्ष ग्रामीणों की समस्याएं रखना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने किसानों और ग्रामीणों के साथ मुलाकात करने की योजना बनाई थी।

शनिवार को जब वह रेलमंत्री से मिलने जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें चंदवक स्थित संगठन के कार्यालय में रोक दिया। इस दौरान उनके साथ मौजूद ग्रामीणों और किसानों को भी बाहर जाने की अनुमति नहीं दिए जाने का दावा किया गया है।

किसान नेता ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए विरोध जताया। हालांकि, पुलिस ने किस कानूनी प्रावधान के तहत उन्हें रोका और क्या कोई औपचारिक हिरासत आदेश जारी किया गया था, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।

सुबह से शाम तक कार्यालय पर तैनात रही पुलिस

मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह से ही चंदवक स्थित संगठन के कार्यालय पर पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई थी। पुलिस पूरे दिन कार्यालय की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी।

किसान नेता अजीत सिंह और उनके साथ मौजूद ग्रामीणों को रेलमंत्री से मिलने जाने से रोक दिया गया। इस घटनाक्रम के कारण अंडरपास की मांग को लेकर प्रस्तावित मुलाकात नहीं हो सकी।

कार्यालय पर पुलिस की मौजूदगी को लेकर किसानों में नाराजगी देखी गई। हालांकि, मौके पर किसी प्रकार की हिंसक झड़प या बल प्रयोग की पुष्टि नहीं हुई है।

इस मामले में पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि किसान नेता और ग्रामीणों को रोकने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया।

अंडरपास निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण परेशान

पूरनपुर गांव में रेलवे अंडरपास निर्माण की मांग स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी समस्या का स्थायी समाधान अंडरपास निर्माण से ही संभव है।

रेलवे लाइन के आसपास बसे गांवों में सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक होती है। जहां रेलवे लाइन के कारण रास्ते प्रभावित होते हैं, वहां अंडरपास या अन्य अधिकृत रेल क्रॉसिंग सुविधाएं ग्रामीणों के दैनिक जीवन को आसान बना सकती हैं।

विशेष रूप से किसानों को खेतों तक पहुंचने, कृषि उपकरणों के परिवहन और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए सुरक्षित रास्ते की जरूरत होती है। इसी तरह विद्यार्थियों, बुजुर्गों और आम नागरिकों के लिए भी सुगम आवागमन महत्वपूर्ण है।

हालांकि, पूरनपुर में प्रस्तावित अंडरपास का स्थान, तकनीकी स्वीकृति और परियोजना की वर्तमान स्थिति के संबंध में रेलवे की विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

किसानों की आवाज दबाई नहीं जा सकती: अजीत सिंह

ऑफिस अरेस्ट किए जाने पर किसान नेता अजीत सिंह ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसानों की आवाज को ऑफिस अरेस्ट करके दबाया नहीं जा सकता।

उनके इस बयान से स्पष्ट है कि वह अंडरपास की मांग को लेकर पीछे हटने के पक्ष में नहीं हैं। किसान नेता का कहना है कि ग्रामीणों की समस्याओं को संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाना उनका उद्देश्य है।

उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए किसानों की मांग को गंभीरता से लेने की आवश्यकता जताई।

अंडरपास की मांग को लेकर चल रहे प्रयासों के बीच इस घटनाक्रम ने स्थानीय स्तर पर प्रशासन और किसान संगठनों के बीच संवाद की जरूरत को भी सामने ला दिया है।

रेलवे अंडरपास क्यों है महत्वपूर्ण?

रेलवे अंडरपास ऐसी संरचना होती है, जिसके माध्यम से रेलवे ट्रैक के नीचे से लोगों या वाहनों के आवागमन की व्यवस्था की जाती है। इसका उद्देश्य रेलवे लाइन के दोनों ओर सुरक्षित संपर्क उपलब्ध कराना होता है।

किसी भी अंडरपास के निर्माण से पहले रेलवे को तकनीकी व्यवहार्यता, जमीन की उपलब्धता, जल निकासी, लागत और सुरक्षा मानकों सहित कई पहलुओं का परीक्षण करना पड़ता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में अंडरपास बनने से आवागमन की सुविधा बेहतर हो सकती है। हालांकि, किसी विशेष स्थान पर अंडरपास की आवश्यकता और निर्माण की संभावना का अंतिम निर्णय संबंधित रेलवे अधिकारियों के तकनीकी परीक्षण के आधार पर ही लिया जाता है।

पूरनपुर गांव के मामले में भी ग्रामीणों की मांग पर रेलवे का आधिकारिक रुख सामने आना जरूरी है।

प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल

किसान नेता और ग्रामीणों को रेलमंत्री से मिलने जाने से रोकने की घटना ने प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है, हालांकि सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कानूनों के तहत कुछ परिस्थितियों में प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

ऐसे मामलों में यह आवश्यक है कि किसी भी प्रतिबंध का स्पष्ट कानूनी आधार हो और कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप की जाए।

अजीत सिंह के मामले में पुलिस की ओर से रोकने का कारण और संबंधित आदेश की जानकारी सामने आने के बाद ही कार्रवाई की वैधानिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

अंडरपास की मांग पर अब आगे क्या?

शनिवार को किसान नेता अजीत सिंह को चंदवक स्थित कार्यालय में रोके जाने के बाद पूरनपुर गांव में अंडरपास निर्माण की मांग एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

ग्रामीणों की समस्या के समाधान के लिए रेलवे अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच संवाद महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि रेलवे की ओर से अंडरपास निर्माण के संबंध में कोई प्रस्ताव या तकनीकी परीक्षण लंबित है, तो उसकी स्थिति स्पष्ट होने से ग्रामीणों को आगे की प्रक्रिया समझने में मदद मिलेगी।

फिलहाल किसान नेता अजीत सिंह ने साफ कर दिया है कि कार्यालय में रोककर किसानों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। अब देखना होगा कि संबंधित रेलवे और प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों की मांग पर क्या कदम उठाते हैं।

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