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किसानों को ठगने की तैयारी, खाद की बोरियों में भरी जा रही थी दूसरी खाद

चित्रकूट: मऊ क्षेत्र में किसानों के साथ धोखाधड़ी के बड़े मामले का खुलासा हुआ है। प्रशासन ने सरौंधा गांव स्थित एक खाद गोदाम पर छापेमारी कर कथित रूप से नकली डीएपी और यूरिया तैयार करने वाले कारोबार का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में संदिग्ध खाद, खाली बोरियां और पैकिंग सामग्री बरामद की गई है। प्रशासन ने गोदाम को सील कर दिया है और संचालक को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी गई है।
मामला श्यामू खाद एवं बीज भंडार के गोदाम से जुड़ा है। गुरुवार को उपजिलाधिकारी मऊ रामऋषि रमन और जिला कृषि अधिकारी आरके वर्मा के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने गोदाम पर छापा मारा। प्रशासनिक टीम को वहां बड़ी मात्रा में ऐसी सामग्री मिली, जिससे आशंका जताई जा रही है कि दूसरी कंपनियों की खाद को डीएपी और यूरिया के नाम पर पैक कर बाजार में बेचने की तैयारी थी।
छापेमारी के दौरान गोदाम से करीब 400 बोरी डीएपी, 3500 बोरी यूरिया, 550 बोरी रामगंगा खाद, दो क्विंटल जिंक, 680 किलोग्राम सल्फर, 15 बोरी ग्लो प्लस खाद बरामद की गई। इसके अलावा बड़ी संख्या में खाली बोरियां भी मिलीं। इनमें 189 रामगंगा कंपनी की खाली बोरियां, 104 भारत प्रोम की बोरियां और करीब 1000 नई डीएपी की खाली बोरियां शामिल हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित रूप से दूसरी कंपनियों की खाद को खाली डीएपी और यूरिया की बोरियों में भरकर पैक किया जाता था। इसके बाद उसे असली उर्वरक बताकर किसानों को बेचने की तैयारी थी। प्रशासन ने सभी संदिग्ध खाद के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जिला कृषि अधिकारी आरके वर्मा ने बताया कि छापेमारी की जानकारी मिलने के बाद संचालक ने पैकिंग मशीन को वहां से हटाने की कोशिश की थी। इसके अलावा कुछ तैयार बोरियां गोदाम के पीछे स्थित नाले में फेंक दी गई थीं। प्रशासनिक टीम ने मजदूरों की मदद से उन बोरियों को भी बाहर निकलवाया और उन्हें जांच के लिए सुरक्षित रख लिया।
अधिकारियों के अनुसार, नमूनों की जांच और जिलाधिकारी की अनुमति के बाद उर्वरक नियंत्रण आदेश समेत अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। प्रशासन ने साफ किया है कि नकली खाद बनाने और बेचने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। खरीफ सीजन में खाद की मांग बढ़ने के बीच इस तरह की कार्रवाई को किसानों के हित में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि चार साल पहले भी इसी संचालक पर नकली खाद बनाने के आरोप लगे थे। नवंबर 2021 में मऊ पुलिस और कृषि विभाग की टीम ने इसी स्थान पर छापेमारी कर कथित नकली खाद फैक्ट्री पकड़ी थी। उस समय भी श्यामू केसरवानी पर नकली खाद तैयार करने का आरोप लगा था।
उस कार्रवाई में इफ्को ब्रांड की करीब 300 संदिग्ध खाद की बोरियां, पैकिंग मशीन, सिलाई मशीन और अन्य उपकरण बरामद किए गए थे। पुलिस ने उस समय संचालक सहित तीन लोगों को हिरासत में लिया था। जांच में यह बात सामने आई थी कि खाली ब्रांडेड बोरियों में नकली खाद भरकर उसे असली बताकर बाजार में बेचने की कोशिश की जा रही थी।
अब दोबारा उसी तरह का मामला सामने आने के बाद कृषि विभाग भी सवालों के घेरे में है। जिला कृषि अधिकारी ने कहा कि पुराने रिकॉर्ड की जांच कराई जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि पहले कार्रवाई के बाद फर्म दोबारा कैसे संचालित होने लगी। साथ ही लाइसेंस बहाली या नवीनीकरण में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र के किसानों में राहत के साथ चिंता भी है। किसानों का कहना है कि नकली खाद से उनकी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है और मेहनत व पैसा दोनों बर्बाद हो सकते हैं। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे खाद खरीदते समय सावधानी बरतें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत कृषि विभाग को दें।





