उत्तर प्रदेश

अस्पताल की चादर धुलाई में कहीं और बीमार न हो जाएं मरीज

Admindelhi1
19 March 2024 7:16 AM GMT
अस्पताल की चादर धुलाई में कहीं और बीमार न हो जाएं मरीज
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मरीज चार-चार दिन तक खून लगी चादर पर लेटने को मजबूर

प्रतापगढ़: मेडिकल कॉलेज के राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय में करोड़ों रुपये की अत्याधुनिक लांड्री होने और धुलाई का ठेका निजी कंपनी को देने के बावजूद मरीज चार-चार दिन तक खून लगी चादर पर लेटने को मजबूर हैं.

कंपनी को धुलाई का भुगतान प्रति चादर की दर से होता है. चर्चा है कि इसीलिए अस्पताल के रजिस्टर में सभी मरीजों के बेड से चादर रोज बदली जा रही है. लेकिन वार्ड में चादर न बदले जाने से कोई मरीज अपने घर से चादर लाकर बिछा रहा है तो कोई गंदी चादर हटाकर बिना चादर के ही बेड पर लेट रहा है. किन्तु लोगों की समझ में यह नहीं आ रहा है कि जब चादर धुलाई का भुगतान निजी कंपनी को होना है तब वार्ड में तैनात अस्पताल का स्टॉफ क्यों बिना चादर बदले ही दावा करने लगता है कि मरीजों की चादर रोज बदली जा रही है.

महिला सर्जिकल वार्ड के बेड नम्बर 20 पर भर्ती चंदीपुर निवासी अंजली (34) के परिजनों ने बताया कि चार दिन से भर्ती हैं. लेकिन भर्ती होने के बाद से चादर नहीं बदली जा रही थी. गंदी चादर से संक्रमण का खतरा देखकर घर से चादर मंगाना पड़ा. अब घर से चादर लाकर बिछा रहे हैं.

महिला सर्जिकल वार्ड के बेड नम्बर 1 पर सिटी कस्बे के पठान का पुरवा निवासी सरस्वती (69) तीन दिन पहले भर्ती हुई हैं. उनके बेड पर बिछी चादर पर लगे खून के बारे में पूछने पर वहां खड़े उनके बेटे राधेश्याम ने बताया कि जब से भर्ती हुई हैं तब से एक बार भी चादर नहीं बदली गई है. इससे मन खिन्न हो जाता है.

महिला सर्जिकल वार्ड के बेड नम्बर 5 पर भर्ती रानीगंज कैथोला निवासी मोनिका (32) चार दिन पहले से भर्ती हैं. उन्होंने बताया कि अभी तक एक बार भी उनकी चादर नहीं बदली गई. इसी वार्ड के बेड नम्बर 19 पर भर्ती रसुलहा पट्टी निवासी माधुरी पांडेय (41) ने भी बताया कि चार दिन से चादर नहीं बदली गई.

पुरुष सर्जिकल वार्ड के बेड नम्बर पर विश्वनाथगंज निवासी दानपाल (28) दो दिन पहले भर्ती हुए. दो दिन बाद वह गंदी चादर हटाकर बिना चादर के बेड पर लेट रहे हैं. इसी वार्ड में भर्ती दीवानगंज के खजुरी सरैया निवासी कल्पनाथ (41) ने बताया कि उनकी चादर चार दिन बाद बदली गई.

मरीजों की चादर रोज बदले जाने की जानकारी मुझे दी गई है. यदि ऐसा नहीं हो पा रहा है तो पता कर कार्रवाई की जाएगी. -डॉ. सौभाग्य प्रकाश, सीएमएस

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