उत्तर प्रदेश

लागत से कम कीमत पर बिक रहा पनीर, मिलावट की आशंका ने बढ़ाई उपभोक्ताओं की चिंता

Kavita2
14 Sept 2026 4:59 PM IST
लागत से कम कीमत पर बिक रहा पनीर, मिलावट की आशंका ने बढ़ाई उपभोक्ताओं की चिंता
x

हापुड़। बाजार में दूध और दुग्ध उत्पादों की कीमत लगातार बढ़ने के बावजूद कई स्थानों पर पनीर 200 से 250 रुपये प्रति किलो के भाव पर आसानी से उपलब्ध है। पनीर के निर्माण में लगने वाले दूध, श्रम, ईंधन, परिवहन, पैकेजिंग और दुकानदार के मुनाफे को देखते हुए इतनी कम कीमत स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करती है। हालांकि, केवल कीमत के आधार पर किसी पनीर को मिलावटी या नकली घोषित नहीं किया जा सकता। इसकी पुष्टि खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए नमूने की प्रयोगशाला जांच से ही संभव है।

आम तौर पर कहा जाता है कि एक किलो पनीर बनाने के लिए करीब चार किलो दूध की आवश्यकता होती है। तकनीकी अध्ययनों के अनुसार वास्तविक मात्रा दूध की गुणवत्ता, उसमें मौजूद वसा और ठोस पदार्थों तथा निर्माण प्रक्रिया पर निर्भर करती है। गाय के दूध से पनीर की प्राप्ति लगभग 16 से 17 प्रतिशत और भैंस के दूध से करीब 20 से 22 प्रतिशत तक हो सकती है। इस आधार पर एक किलो पनीर बनाने में सामान्यतः लगभग साढ़े चार से छह लीटर तक दूध लग सकता है। इसलिए चार किलो दूध से एक किलो पनीर बनने का दावा हर परिस्थिति में सही नहीं माना जा सकता।

लागत का गणित बढ़ा रहा संदेह

यदि दूध का औसत मूल्य 55 से 65 रुपये प्रति लीटर माना जाए तो केवल दूध पर ही करीब 250 से 350 रुपये तक खर्च हो सकता है। इसके बाद दूध गर्म करने के लिए ईंधन, उसे फाड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाला खाद्य अम्ल, कपड़ा, पानी, श्रमिकों का मेहनताना, शीत भंडारण, परिवहन और दुकान का खर्च अलग होता है।

ऐसे में शुद्ध दूध से बने पनीर की वास्तविक उत्पादन लागत उसकी गुणवत्ता और दूध के खरीद मूल्य के अनुसार 300 रुपये प्रति किलो से काफी अधिक भी हो सकती है। बाजार में यदि कोई विक्रेता इसे लगातार 200 से 250 रुपये किलो बेच रहा है तो उपभोक्ताओं का सवाल उठाना स्वाभाविक है कि वह अपना खर्च और मुनाफा कैसे निकाल रहा है।

हालांकि, लागत का गणित सभी कारोबारियों के लिए एक जैसा नहीं होता। बड़ी डेयरी इकाइयां किसानों से थोक में दूध खरीदती हैं। पनीर बनाने के बाद बचने वाले तरल पदार्थ यानी व्हे का भी दूसरे उत्पादों में इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ इकाइयों को बड़े स्तर पर उत्पादन, कम परिवहन लागत और बिचौलियों की संख्या घटने से लागत कम करने में मदद मिलती है। इसके बावजूद सामान्य बाजार भाव से बहुत कम कीमत पर बिकने वाला बिना ब्रांड और बिना उचित विवरण वाला पनीर सतर्कता की मांग करता है।

कैसे तैयार होता है सस्ता विकल्प

खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में कई बार ऐसे उत्पाद पकड़े गए हैं, जिन्हें दूध से बने असली पनीर के रूप में बेचा जा रहा था, जबकि उनमें स्किम्ड मिल्क पाउडर, स्टार्च, वनस्पति तेल या पामोलीन जैसे सस्ते पदार्थों के इस्तेमाल का संदेह था। गैर-दुग्ध वसा से बनाए गए उत्पाद को सामान्य दूध वाला पनीर बताकर बेचना उपभोक्ता को गुमराह करने वाली कार्रवाई हो सकती है।

कुछ निर्माता दूध से मलाई निकालने के बाद बचे कम वसा वाले दूध में वनस्पति तेल और दूसरे पदार्थ मिलाकर उत्पादन बढ़ाने की कोशिश करते हैं। स्टार्च का इस्तेमाल पनीर का वजन और ठोसपन बढ़ाने के लिए किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। अधिक नमी बनाए रखने से भी कम दूध में ज्यादा वजन का उत्पाद तैयार किया जा सकता है।

सूरत में पकड़ी गई एक इकाई में गैर-ब्रांडेड एनालॉग पनीर के निर्माण में पामोलीन तेल, मिल्क पाउडर और एसिड के कथित इस्तेमाल की बात सामने आई थी। वहां से करीब 1,400 किलो उत्पाद जब्त किया गया था, हालांकि उसकी गुणवत्ता पर अंतिम निष्कर्ष प्रयोगशाला रिपोर्ट पर निर्भर था।

क्या कहते हैं खाद्य सुरक्षा मानक

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई के नियमों में पनीर की संरचना, नमी और वसा के संबंध में निर्धारित मानक हैं। पनीर गाय या भैंस के दूध अथवा दोनों के मिश्रण से तैयार होना चाहिए। कम वसा वाले पनीर को भी सही श्रेणी और विवरण के साथ बेचना आवश्यक है।

एफएसएसएआई के अनुसार पनीर की गुणवत्ता की जांच में नमी, वसा और दूसरे पदार्थों का परीक्षण किया जाता है। स्टार्च, गैर-दुग्ध वसा या प्रतिबंधित रसायनों की मौजूदगी का विश्वसनीय पता प्रयोगशाला में ही लगाया जा सकता है। खाद्य पदार्थ का स्वाद, रंग या बनावट संदेह पैदा कर सकती है, लेकिन इनके आधार पर मिलावट को प्रमाणित नहीं किया जा सकता। एफएसएसएआई जांच पद्धति

खुले पनीर की खरीद में सावधानी जरूरी

विशेषज्ञ उपभोक्ताओं को अत्यधिक सस्ता और खुले में रखा पनीर खरीदते समय सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। खरीदारी के दौरान विक्रेता का खाद्य लाइसेंस, पैकिंग की तारीख, इस्तेमाल की अंतिम तारीख और भंडारण व्यवस्था देखी जानी चाहिए। बिल लेने से शिकायत या गुणवत्ता संबंधी विवाद की स्थिति में खरीद का प्रमाण उपलब्ध रहता है।

पनीर जल्दी खराब होने वाला खाद्य पदार्थ है। मिलावट के अलावा गलत तापमान पर रखा गया शुद्ध पनीर भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। दुर्गंध, चिपचिपापन, रंग में असामान्य बदलाव या खट्टा स्वाद महसूस होने पर इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

कम कीमत निश्चित रूप से संदेह का संकेत हो सकती है, लेकिन उसे मिलावट का सबसे बड़ा या अंतिम साक्ष्य बताना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा। बाजार में चल रहे वास्तविक खेल का खुलासा नियमित नमूना संग्रह, प्रयोगशाला जांच, आपूर्ति शृंखला की पड़ताल और दोषी पाए गए कारोबारियों पर नियमानुसार कार्रवाई से ही संभव है।

Next Story