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जंगल में विस्फोटक गोला फटने से भैंस की दर्दनाक मौत, पशुपालक को नुकसान

सुखदेवपुर। जंगल में चरने गई एक भैंस की विस्फोटक गोला फटने से दर्दनाक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि जमीन पर पड़े आटे जैसे गोले को भैंस ने चारा समझकर अपने मुंह में उठा लिया था। इसी दौरान गोले में जोरदार विस्फोट हो गया। धमाका इतना भीषण था कि भैंस का जबड़ा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और वह खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़ी। इस घटना से पशुपालक को बड़ा नुकसान हुआ है। पीड़ित पशुपालक ने जंगल में जंगली सूअर और अन्य जानवरों का शिकार करने के लिए विस्फोटक गोले रखे जाने का आरोप लगाया है।
रोज की तरह भैंस को चराने जंगल गए थे रामबचन
जानकारी के अनुसार, सुखदेवपुर गांव निवासी रामबचन अपनी भैंस को रोज की तरह जंगल में चराने के लिए लेकर गए थे। जंगल में भैंस घास और अन्य वनस्पतियां खा रही थी। इसी दौरान उसकी नजर जमीन पर पड़े आटे जैसे एक गोले पर पड़ी। भैंस ने उसे खाने की चीज समझा और उठाकर मुंह में रख लिया।
रामबचन के मुताबिक, भैंस के मुंह में गोला जाते ही अचानक जोरदार धमाका हुआ। विस्फोट की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग भी सकते में आ गए। धमाके के बाद भैंस गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर गई। उसके मुंह और जबड़े में गंभीर चोट आई थी। घटना इतनी अचानक हुई कि पशुपालक को भैंस को बचाने का मौका तक नहीं मिला।
विस्फोट से जबड़ा बुरी तरह क्षतिग्रस्त
विस्फोटक गोले के फटने से भैंस के जबड़े के चिथड़े उड़ गए। वह खून से लथपथ हालत में जमीन पर गिर पड़ी। घटना के बाद पशुपालक के सामने अपने पशु को बचाने का संकट खड़ा हो गया, लेकिन विस्फोट में लगी गंभीर चोटों के कारण भैंस की जान चली गई।
पशुपालन ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में किसी पालतू पशु की इस तरह मौत हो जाना पशुपालक के लिए आर्थिक नुकसान के साथ भावनात्मक आघात भी है। रामबचन के लिए यह घटना इसलिए भी दुखद है, क्योंकि वह भैंस को सामान्य दिनों की तरह चराने जंगल ले गए थे। उन्हें अंदाजा नहीं था कि वहां जमीन पर पड़ा कोई संदिग्ध गोला उनकी भैंस की जान ले सकता है।
जंगली जानवरों के शिकार के लिए बम रखने का आरोप
पीड़ित पशुपालक रामबचन ने आरोप लगाया कि जंगल में जंगली सूअर और अन्य जानवरों का शिकार करने के लिए शिकारी इस तरह के विस्फोटक गोले रखते हैं। उनका कहना है कि आटे में विस्फोटक और कील मिलाकर ऐसे गोले बनाए जाते हैं, जिन्हें खाने की चीज समझकर जानवर मुंह में ले लेते हैं। इसके बाद विस्फोट होने से जानवर गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं या उनकी मौत हो जाती है।
रामबचन के आरोपों के अनुसार, शिकार के लिए इस्तेमाल होने वाले ऐसे विस्फोटक केवल जंगली जानवरों के लिए ही खतरा नहीं हैं, बल्कि जंगल में चरने जाने वाले पालतू पशु भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। जमीन पर पड़े आटे जैसे गोले को देखकर पशु और वन्यजीव उसके भीतर छिपे खतरे को पहचान नहीं पाते। खाने की वस्तु समझकर उसे उठाने पर विस्फोट हो सकता है।
हालांकि, घटना में विस्फोटक गोला किसने रखा था और वह किस उद्देश्य से वहां मौजूद था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। शिकारियों की संलिप्तता का आरोप पशुपालक ने लगाया है। इसकी पुष्टि के लिए मामले की जांच जरूरी होगी।
पालतू पशुओं की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने जंगल में चरने जाने वाले पालतू पशुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीण इलाकों में पशुपालक अपने मवेशियों को खुले क्षेत्रों और जंगलों में चराने ले जाते हैं। ऐसी जगहों पर यदि विस्फोटक गोले रखे जाते हैं, तो उनसे पशुओं के साथ-साथ जंगल में आने-जाने वाले लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।
विस्फोटक गोले में कील जैसी धातु की वस्तुएं मिली होने पर विस्फोट की स्थिति में चोट और अधिक गंभीर हो सकती है। ऐसे संदिग्ध पदार्थों को उठाना या उनके साथ छेड़छाड़ करना खतरनाक हो सकता है। यदि जंगल या आसपास के क्षेत्र में इस तरह की कोई वस्तु दिखाई दे, तो उसे छूने के बजाय संबंधित प्रशासन या पुलिस को सूचना देना सुरक्षित होगा।
जांच से सामने आ सकती है घटना की पूरी सच्चाई
सुखदेवपुर में हुई इस घटना के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि जंगल में विस्फोटक गोला कैसे पहुंचा और उसे वहां किसने रखा था। यदि गोला जंगली जानवरों के शिकार के लिए रखा गया था, तो यह गतिविधि पालतू पशुओं और वन्यजीवों दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, रामबचन की भैंस जंगल में पड़े विस्फोटक गोले को मुंह में लेने के बाद हुए धमाके में मारी गई। पशुपालक ने शिकारियों पर बम रखने का आरोप लगाया है। घटना के संबंध में जांच या प्रशासनिक कार्रवाई की कोई पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है।
इस घटना ने जंगलों में अवैध शिकार के लिए विस्फोटक इस्तेमाल किए जाने की आशंका और उससे बेजुबान पशुओं को होने वाले नुकसान का मुद्दा सामने ला दिया है। यदि ऐसे विस्फोटक खुले में रखे जाते हैं, तो उनका खतरा किसी एक जानवर तक सीमित नहीं रहता। इसलिए घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाना और जंगल में इस तरह के खतरनाक पदार्थों की मौजूदगी की जांच करना आवश्यक है।





