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उत्तर प्रदेश
60 हजार से ज्यादा शिक्षक पद खाली, शिक्षा सेवा चयन आयोग के जरिए होगी भर्ती
Ratna Netam
4 Aug 2026 10:06 PM IST

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश में सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों डीएलएड (बीटीसी) प्रशिक्षित अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों के **60,958 पद रिक्त** हैं। यह जानकारी राज्य विधानसभा में समाजवादी पार्टी के विधायक अनिल प्रधान द्वारा पूछे गए एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में सामने आई। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह की ओर से प्रस्तुत जवाब में बताया गया कि प्रदेश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों में बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली हैं। इससे लंबे समय से नई शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं।
विधानसभा में दिए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक रिक्तियां ग्रामीण क्षेत्रों के परिषदीय विद्यालयों में हैं। ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में **48,883 सहायक अध्यापकों के पद** खाली हैं। वहीं नगर (शहरी) क्षेत्र के विद्यालयों में **12,075 पद** रिक्त हैं। इस प्रकार दोनों क्षेत्रों को मिलाकर कुल **60,958 पदों** पर शिक्षकों की आवश्यकता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में रिक्त पदों का सीधा असर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई और विद्यार्थियों की शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
सरकारी आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हुआ कि प्रदेश में पिछले कई वर्षों से प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की संख्या लगातार बढ़ी है, लेकिन नियुक्तियों की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही। सरकार के अनुसार वर्ष **2017 से 9 मार्च 2026** तक प्रदेश में **5,35,389 अभ्यर्थियों** को डीएलएड (बीटीसी) प्रशिक्षण दिया गया। इसके मुकाबले इसी अवधि में केवल **1,26,371 अभ्यर्थियों** को ही परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्ति मिल सकी। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवा अभी भी सरकारी शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे हैं।
शिक्षक अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्षों की मेहनत और प्रशिक्षण पूरा करने के बाद भी नियमित भर्ती न होने से हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। उनका मानना है कि यदि रिक्त पदों पर समयबद्ध तरीके से भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए तो एक ओर बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी भी दूर होगी।
बेसिक शिक्षा विभाग ने विधानसभा में यह भी स्पष्ट किया है कि अब परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापकों की सीधी भर्ती **उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज** के माध्यम से कराई जाएगी। यह आयोग **21 अगस्त 2023** को गठित किया गया था और भविष्य में शिक्षा विभाग की विभिन्न भर्तियों की जिम्मेदारी इसी आयोग के पास है। विभाग के अनुसार नई भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संचालित की जाएगी।
सरकार ने यह भी बताया कि नगर क्षेत्र के **11,508 सहायक अध्यापक पदों** पर भर्ती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा चुका है। शिक्षा निदेशक (बेसिक) कार्यालय ने **17 मई 2026** को इन पदों का अधियाचन उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेज दिया है। इससे यह संकेत मिलता है कि भर्ती प्रक्रिया की प्रशासनिक तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक भर्ती विज्ञापन जारी करने या ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू करने की कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की गई है। यही कारण है कि लाखों डीएलएड और बीटीसी अभ्यर्थी अब आयोग की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी होने का इंतजार कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू होती है तो लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता समाप्त होगी।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में शिक्षकों के इतने अधिक रिक्त पदों को भरना बेहद आवश्यक है। कई सरकारी विद्यालयों में एक या दो शिक्षकों के भरोसे पूरी स्कूल व्यवस्था संचालित हो रही है। कहीं-कहीं एक शिक्षक को एक साथ कई कक्षाओं को पढ़ाना पड़ता है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। ऐसे में नई नियुक्तियां केवल रोजगार का अवसर ही नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती हैं।
विधानसभा में सरकार द्वारा साझा किए गए इन आंकड़ों ने शिक्षक भर्ती को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। अब सभी की निगाहें उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग पर टिकी हैं कि वह रिक्त पदों के लिए भर्ती विज्ञापन कब जारी करता है। यदि प्रक्रिया जल्द शुरू होती है तो हजारों प्रशिक्षित युवाओं को राहत मिलने के साथ-साथ प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी भी काफी हद तक दूर हो सकेगी।
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