- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- पावर प्लांट में मजदूरी...
पावर प्लांट में मजदूरी को लेकर भड़का आक्रोश, मजदूरों ने रोका निर्माण कार्य

कोन (सोनभद्र)। सोन नदी पर तरिया क्षेत्र में निर्माणाधीन पावर प्लांट में मजदूरी और काम के घंटों को लेकर गुरुवार को श्रमिकों का आक्रोश फूट पड़ा। निजी कंपनी पर कम मजदूरी देकर लंबे समय तक काम कराने का आरोप लगाते हुए मजदूरों ने प्लांट का निर्माण कार्य रोक दिया। प्रदर्शनकारी मजदूरों ने प्रतिदिन आठ घंटे काम के बदले 500 रुपये मजदूरी निर्धारित करने की मांग की है।
मजदूरों का आरोप है कि निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों से प्रतिदिन करीब 12 घंटे काम कराया जा रहा है, लेकिन इसके बदले उन्हें केवल 400 रुपये दिए जाते हैं। लंबे समय तक कठिन शारीरिक श्रम करने के बावजूद उचित भुगतान नहीं मिलने से मजदूरों में पिछले कई दिनों से नाराजगी थी। गुरुवार को श्रमिकों ने सामूहिक रूप से काम बंद करने का फैसला किया और कार्यस्थल पर अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि विदेश कुमार के नेतृत्व में मजदूर निर्माण स्थल पर एकत्र हुए। उन्होंने कंपनी के कर्मचारियों और संबंधित प्रतिनिधियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं। श्रमिकों ने स्पष्ट कहा कि जब तक काम के घंटे और दैनिक मजदूरी को लेकर संतोषजनक फैसला नहीं लिया जाता, तब तक उनके लिए पहले की व्यवस्था के अनुसार काम जारी रखना मुश्किल होगा।
मजदूरों का कहना है कि उन्हें सुबह से देर शाम तक काम करना पड़ता है। निर्माण स्थल पर मिट्टी, सीमेंट, सरिया और अन्य भारी सामग्री से जुड़े काम में काफी शारीरिक मेहनत होती है। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाली मजदूरी परिवार की दैनिक जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं है। महंगाई बढ़ने के कारण राशन, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और आने-जाने का खर्च उठाना कठिन हो गया है।
प्रदर्शनकारी मजदूरों ने आठ घंटे की कार्य अवधि तय करने की मांग की। उनका कहना है कि सामान्य कार्य अवधि से अधिक काम कराने की स्थिति में अतिरिक्त भुगतान की व्यवस्था होनी चाहिए। श्रमिकों ने कहा कि 12 घंटे काम के बाद भी केवल 400 रुपये मिलना उनके श्रम का उचित मूल्य नहीं है। उन्होंने आठ घंटे के बदले न्यूनतम 500 रुपये प्रतिदिन दिए जाने की मांग रखी।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि विदेश कुमार ने मजदूरों की समस्याओं को गंभीर बताते हुए कंपनी से बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने कहा कि निर्माण परियोजना में स्थानीय मजदूरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में उनकी मजदूरी, कार्य अवधि और सुरक्षा से संबंधित मांगों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। यदि मजदूर संतुष्ट नहीं होंगे तो निर्माण कार्य सुचारु रूप से आगे बढ़ाना संभव नहीं होगा।
मजदूरों ने निजी कंपनी के कुछ कर्मचारियों पर शोषण करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि काम पर रखते समय मजदूरी और कार्य अवधि की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी। काम शुरू होने के बाद धीरे-धीरे ड्यूटी के घंटे बढ़ा दिए गए, लेकिन भुगतान में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। हालांकि, इन आरोपों पर कंपनी की ओर से तत्काल कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
श्रमिकों ने मांग की कि मजदूरी और काम के घंटों को लेकर कंपनी लिखित समझौता करे। केवल मौखिक आश्वासन पर काम शुरू नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि लिखित व्यवस्था होने से भविष्य में मजदूरी घटाने, भुगतान रोकने या कार्य अवधि बढ़ाने जैसे विवाद पैदा नहीं होंगे। मजदूरों ने समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और उपस्थिति का सही रिकॉर्ड रखने की भी मांग की।
निर्माणाधीन पावर प्लांट एक बड़ी परियोजना है, जहां अलग-अलग प्रकार के काम के लिए बड़ी संख्या में मजदूरों की आवश्यकता होती है। इनमें कुशल, अर्धकुशल और अकुशल श्रमिक शामिल हो सकते हैं। मजदूरों का कहना है कि काम की प्रकृति के अनुसार मजदूरी तय होनी चाहिए और भुगतान में किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। समान कार्य के लिए समान मजदूरी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी सामने आई है।
कार्यस्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया। मजदूरों ने कहा कि हेलमेट, जूते, दस्ताने, सुरक्षा बेल्ट और अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराना कंपनी की जिम्मेदारी है। पावर प्लांट जैसी निर्माण परियोजना में भारी मशीनों और ऊंचाई पर काम करने के कारण दुर्घटना का खतरा बना रहता है। ऐसे में श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा साधन और प्राथमिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए।
मजदूरों ने काम के दौरान पीने के स्वच्छ पानी, विश्राम के लिए सुरक्षित स्थान और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी मांग की। उनका कहना है कि 12 घंटे तक काम कराने के बावजूद आराम के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता। गर्मी और धूप में काम करने वाले मजदूरों के लिए पानी तथा छाया की व्यवस्था बेहद जरूरी है।
विरोध के कारण गुरुवार को निर्माण कार्य प्रभावित हुआ। मजदूर कार्यस्थल पर मौजूद रहे, लेकिन उन्होंने काम शुरू नहीं किया। इस दौरान उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सामने रखा। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ने कंपनी प्रबंधन से मजदूरों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक बुलाने और जल्द समाधान निकालने की मांग की।
मजदूरों का कहना है कि वे परियोजना का विरोध नहीं कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि पावर प्लांट का निर्माण हो और स्थानीय लोगों को रोजगार मिले, लेकिन रोजगार के नाम पर श्रमिकों का आर्थिक शोषण स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि परियोजना से क्षेत्र का विकास तभी सार्थक होगा, जब स्थानीय मजदूरों को सम्मानजनक मजदूरी और सुरक्षित कार्य वातावरण मिलेगा।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पावर प्लांट के निर्माण से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। कई परिवारों के सदस्य परियोजना में मजदूरी कर रहे हैं। ऐसे में मजदूरी विवाद का असर केवल निर्माण कार्य पर नहीं, बल्कि श्रमिक परिवारों की आजीविका पर भी पड़ सकता है। लोगों ने कंपनी और मजदूरों के बीच शीघ्र बातचीत कर विवाद का समाधान कराने की मांग की।
श्रम मामलों के जानकारों का कहना है कि कार्य अवधि, विश्राम, ओवरटाइम और मजदूरी से जुड़ी व्यवस्था लागू श्रम कानूनों तथा सरकारी दरों के अनुरूप होनी चाहिए। संबंधित श्रम विभाग को कार्यस्थल की परिस्थितियों की जानकारी लेकर यह देखना चाहिए कि मजदूरों को निर्धारित सुविधाएं और भुगतान मिल रहे हैं या नहीं। मजदूरों ने भी जरूरत पड़ने पर श्रम विभाग के अधिकारियों से शिकायत करने की बात कही है।
अब सभी की नजर कंपनी प्रबंधन के अगले कदम पर है। यदि प्रबंधन मजदूरों की मांगों पर सकारात्मक फैसला करता है तो निर्माण कार्य जल्द बहाल हो सकता है। सहमति नहीं बनने की स्थिति में विरोध लंबा खिंच सकता है। मजदूरों ने दोहराया कि आठ घंटे काम के बदले 500 रुपये मजदूरी, अतिरिक्त समय का अलग भुगतान और सुरक्षित कार्य परिस्थितियां उनकी प्रमुख मांगें हैं।





