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MRP विवाद में फंसे 10 करोड़ के ऑर्डर, व्यापारियों की बढ़ी चिंता

नेपाल: सरकार के नए एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) नियम ने अलीगढ़ के कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नेपाल ने आयातित तैयार माल पर नेपाली मुद्रा में एमआरपी लेबल लगाना अनिवार्य कर दिया है। इस नए नियम के कारण अलीगढ़ के करीब 150 भारतीय निर्यातकों के लगभग 10 करोड़ रुपये के ऑर्डर अटक गए हैं। व्यापारियों का कहना है कि अचानक लागू किए गए इस नियम से भारत-नेपाल व्यापार पर असर पड़ रहा है और सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।
नेपाल सरकार के नए निर्देश के अनुसार, अब नेपाल में आने वाले सभी आयातित पैक्ड और तैयार सामान पर सीमा शुल्क (भंसार) से पहले अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी का लेबल होना जरूरी है। बिना एमआरपी लेबल वाले सामान को नेपाल की सीमा चौकियों से आगे जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इसके साथ ही उत्पाद पर नेपाली मुद्रा में कीमत, ब्रांड नाम, समाप्ति तिथि और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज करने की शर्त भी लागू की गई है।
इस नियम का सबसे ज्यादा असर अलीगढ़ के उन कारोबारियों पर पड़ा है, जो नेपाल को ताला-हार्डवेयर, आर्टवेयर, पीतल की मूर्तियां, बिल्डिंग फिटिंग्स के आयरन जंक्शन, फैन बॉक्स और अन्य तैयार उत्पादों का निर्यात करते हैं। व्यापारियों के अनुसार, पहले भारतीय कंपनियां अपने उत्पादों की बिलिंग भारतीय मुद्रा में करती थीं और नेपाल के कारोबारी वहां के बाजार के हिसाब से कीमत तय करते थे। लेकिन नए नियम के बाद भारतीय निर्यातकों को नेपाली मुद्रा में एमआरपी तय कर लेबल लगाना होगा, जिससे कई व्यावहारिक और कानूनी समस्याएं खड़ी हो रही हैं।
व्यापारियों का कहना है कि करीब 150 निर्यातकों का लगभग 10 करोड़ रुपये का माल इस समय फंसा हुआ है। कई कारोबारियों ने नेपाल के लिए माल तैयार कर लिया था, लेकिन नए नियम के कारण इसकी आपूर्ति रोकनी पड़ी। कुछ निर्यातकों का कहना है कि लाखों रुपये का तैयार माल सीमा पर अटक गया है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि नेपाल सरकार ने अप्रैल 2026 में सभी आयातित और घरेलू सामानों पर एमआरपी लेबल अनिवार्य करने का फैसला किया था। हालांकि, उस समय सीमा शुल्क चौकियों पर व्यापारियों के विरोध और आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति को देखते हुए सरकार ने कुछ समय के लिए सेल्फ डिक्लेरेशन यानी स्वयं घोषणा की सुविधा दी थी। अब सीमा चौकियों पर नियमों को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है।
नेपाल के प्रमुख सीमा नाकों जैसे भैरहवा, बीरगंज और सोनौली में इस नियम का असर साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि कुछ मामलों में आयातकों को यह सुविधा दी गई है कि वे कस्टम पर एमआरपी घोषित कर सकते हैं और नेपाल स्थित अपने गोदाम में जाकर लेबल लगाने की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके बावजूद भारतीय निर्यातक इस व्यवस्था को लेकर असमंजस में हैं।
इंडो नेपाल एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने इस समस्या को लेकर सरकार से मदद मांगने का फैसला किया है। संगठन की ओर से सांसद सतीश गौतम को ज्ञापन देकर वित्त मंत्री और विदेश मंत्री तक यह मामला पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से व्यापारिक संबंध हैं और ऐसे नियमों से छोटे एवं मध्यम कारोबारियों को नुकसान हो सकता है।
इंडो नेपाल एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के महामंत्री प्रदीप चौधरी ने कहा कि व्यापारी नेपाली मुद्रा में एमआरपी लिखने की प्रक्रिया को लेकर परेशान हैं। उनके अनुसार, इससे कानूनी और टैक्स संबंधी कई जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार इस नियम को लेकर नेपाल सरकार से बातचीत करे और व्यापारियों को राहत दिलाए।
अलीगढ़ के कारोबारियों का कहना है कि वे लंबे समय से नेपाल को सामान भेज रहे हैं और अब अचानक बदली व्यवस्था से कारोबार प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों ने स्पष्ट नीति बनाने और इस समस्या का जल्द समाधान करने की मांग की है, ताकि दोनों देशों के बीच व्यापार सुचारु रूप से जारी रह सके।





