उत्तर प्रदेश

UP विधानसभा में विपक्ष का हंगामा, सदन बुधवार तक स्थगित

Ratna Netam
4 Aug 2026 2:57 PM IST
UP  विधानसभा में विपक्ष का हंगामा, सदन बुधवार तक स्थगित
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उत्तर प्रदेश : विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को सदन में भारी हंगामा देखने को मिला। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे को लेकर विपक्ष का विरोध प्रदर्शन विधानसभा तक पहुंच गया। कार्यवाही शुरू होने से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन तक विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी के विधायकों ने लगातार नारेबाजी की और वेल में आकर विरोध जताया। इस बीच फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक सचिन यादव द्वारा पोस्टर लहराने पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने पहले उन्हें चेतावनी दी और बाद में पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया। विधायक को सदन से बाहर निकालने के दौरान मार्शलों और विपक्षी विधायकों के बीच धक्कामुक्की भी हुई, जिसके बाद सदन की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

मंगलवार सुबह जैसे ही विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई, समाजवादी पार्टी के विधायक राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर विरोध जताने के लिए वेल में पहुंच गए। विपक्षी सदस्य लगातार नारेबाजी करते रहे और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते रहे। विधानसभा अध्यक्ष ने कई बार सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की, लेकिन विपक्ष नहीं माना। लगातार हंगामे को देखते हुए सदन की कार्यवाही पहले एक घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी।

कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। विपक्षी विधायक फिर से वेल में पहुंच गए और नारेबाजी जारी रखी। हंगामे के बीच सरकार ने विधायी कार्य आगे बढ़ाते हुए कई प्रस्तावों और विधेयकों को ध्वनिमत से पारित कराया। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने लोक सेवा अधिकरण संशोधन विधेयक पेश किया, जिसे पारित कराया गया। इसके बाद अन्य मंत्रियों के प्रस्ताव भी सदन में पारित किए गए। इसी दौरान सरकार ने अनुपूरक बजट भी सदन में प्रस्तुत कर दिया।

बाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सदन को संबोधित करने के लिए खड़े हुए तो विपक्ष ने अपना विरोध और तेज कर दिया। मुख्यमंत्री ने हंगामे के बीच ही अपना भाषण जारी रखा। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र प्रदेश की 25 करोड़ जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का अवसर था, लेकिन विपक्ष ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने के बजाय लगातार व्यवधान पैदा किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले प्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे सदन की कार्यवाही में रचनात्मक भूमिका निभाएं, लेकिन विपक्ष का व्यवहार इसके विपरीत रहा।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में पहले ही सदन का एजेंडा तय किया जा चुका था और सभी दलों को इसकी जानकारी थी। इसके बावजूद विपक्ष ने विधायी कार्यों में कोई रुचि नहीं दिखाई और सदन का बहुमूल्य समय नष्ट किया। उन्होंने कहा कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन लगातार हंगामा कर लोकतांत्रिक संस्थाओं का अपमान करना उचित नहीं है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आचरण को असंवैधानिक और लोकतांत्रिक परंपराओं के विरुद्ध बताया।

इसी दौरान समाजवादी पार्टी के विधायक सचिन यादव अपने स्थान से उठकर पोस्टर लहराते हुए विरोध प्रदर्शन करने लगे। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने उन्हें कई बार पोस्टर हटाने और अपनी सीट पर लौटने की चेतावनी दी। जब उन्होंने निर्देशों का पालन नहीं किया तो अध्यक्ष ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह का आचरण जारी रहा तो मामला एथिक्स कमेटी को भेजकर उनकी सदस्यता समाप्त करने की संस्तुति भी की जा सकती है। इसके बाद सचिन यादव को पूरे मानसून सत्र के लिए निलंबित करने की घोषणा कर दी गई।

विधानसभा अध्यक्ष के आदेश पर मार्शलों को विधायक को सदन से बाहर ले जाने के निर्देश दिए गए। इस दौरान विपक्षी विधायकों ने इसका विरोध किया और मार्शलों के साथ धक्कामुक्की की स्थिति बन गई। सदन में शोर-शराबा और अव्यवस्था बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही को बुधवार तक के लिए स्थगित कर दिया।

विधानसभा में हुई इस घटना ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक ओर विपक्ष सरकार पर महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है, जबकि आगामी कार्यवाही में भी सदन के भीतर तीखी नोकझोंक जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं।

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