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Operation साइ-वज्र की सफलता, 435 शिकायतों का हुआ निस्तारण

Meerut मेरठ : साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने के लिए मेरठ रेंज पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन ‘साइ-वज्र’ (Cy-Vajra) के तहत बड़ी कार्रवाई की गई है। अभियान के शुरुआती पांच दिनों में मेरठ रेंज के चार जिलों में पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़ी 435 शिकायतों का निस्तारण किया है। इसके साथ ही 77 मुकदमे दर्ज कर 65 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है।
साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सोमवार को मेरठ रेंज के डीआईजी कलानिधि नैथानी ने भारत सरकार के संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में भारतीय दूरसंचार सेवा के वरिष्ठ अधिकारी आदित्य सिंह समेत विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान साइबर अपराधों की रोकथाम, पुलिस और दूरसंचार विभाग के बीच बेहतर समन्वय और सूचनाओं के आदान-प्रदान को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
डीआईजी कलानिधि नैथानी ने बताया कि ऑपरेशन साइ-वज्र के तहत साइबर ठगी से जुड़े मामलों में लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि फर्जी कॉल सेंटर चलाने वाले, डिजिटल माध्यमों से लोगों को ठगने वाले और साइबर अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुराने साइबर अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए और अवैध तरीके से अर्जित संपत्तियों को कुर्क किया जाए। इसी क्रम में एक साइबर अपराधी की करीब तीन करोड़ रुपये की संपत्ति गैंगस्टर एक्ट के तहत जब्त करने की कार्रवाई की गई है।
पुलिस ने साइबर ठगी की रकम बैंक खातों में प्राप्त कर चेक के माध्यम से निकालने वाले एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से पांच लाख रुपये बरामद किए गए हैं। इसके अलावा चेक विदड्रॉल, एटीएम कैश आउट, म्यूल अकाउंट, संदिग्ध मोबाइल कनेक्शन और सिम बॉक्स से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई की गई।
जिलेवार कार्रवाई
ऑपरेशन साइ-वज्र के तहत मेरठ जिले में 75 शिकायतों का निस्तारण किया गया। यहां 26 एफआईआर दर्ज कर 36 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। बुलंदशहर में 298 शिकायतों का समाधान करते हुए 47 मुकदमे दर्ज किए गए और 19 साइबर अपराधियों को पकड़ा गया।
बागपत में 24 मामलों में कार्रवाई करते हुए दो मुकदमे दर्ज किए गए और नौ आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। वहीं, हापुड़ में 38 शिकायतों का निस्तारण किया गया, दो एफआईआर दर्ज की गईं और एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
बैठक में दूरसंचार विभाग द्वारा विकसित डिजिटल प्लेटफॉर्म संचार साथी, सीईआईआर, समन्वय पोर्टल और प्रतिबिंब पोर्टल की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इन डिजिटल माध्यमों से साइबर अपराधों की पहचान और रोकथाम में काफी मदद मिल रही है।
डीआईजी ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि दूरसंचार विभाग से प्राप्त सूचनाओं और पत्रों पर समयबद्ध कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए पुलिस और तकनीकी विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
अधिकारियों ने बताया कि टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी नियम-2025 के तहत सुरक्षित मोबाइल नंबर वैलिडेशन प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है। इसके माध्यम से डिजिटल और वित्तीय सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल नंबरों की सत्यता की जांच की जा सकेगी।
संचार साथी पोर्टल और मोबाइल ऐप के जरिए लोग अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। चोरी या गुम हुए मोबाइल फोन को ब्लॉक कराने की सुविधा भी उपलब्ध है। वहीं, चक्षु सुविधा के माध्यम से फर्जी कॉल, बैंक केवाईसी फ्रॉड, सेक्सटॉर्शन, फर्जी लॉटरी और संदिग्ध संदेशों की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन साइ-वज्र के तहत साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और आम लोगों को साइबर ठगी से बचाने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।





