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उत्तर प्रदेश
ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर खोलना होगा आसान जमीन की शर्त में राहत
SHIDDHANT
15 Sept 2026 9:12 PM IST

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Lucknow. लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर स्थापित करने के लिए जमीन की अनिवार्य आवश्यकता घटाई गई है। कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि पहले एक केंद्र खोलने के लिए 2.5 एकड़ जमीन जरूरी थी। अब यह आवश्यकता घटाकर 3,500 वर्ग मीटर कर दी गई है, जो एक एकड़ से भी कम है। इसके साथ ही सात मीटर चौड़ी सड़क की अनिवार्य शर्त में भी ढील दी गई है। मंत्री के मुताबिक, ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटरों से संबंधित व्यवस्था में जमीन और सड़क की उपलब्धता को लेकर बदलाव किए गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख फैसला न्यूनतम भूमि क्षेत्रफल घटाने का है। पहले निर्धारित क्षेत्रफल के मुकाबले अब काफी कम जमीन पर केंद्र स्थापित करने की शर्त पूरी की जा सकेगी। इससे ऐसे केंद्र खोलने के इच्छुक आवेदकों के लिए भूमि संबंधी आवश्यकता कम होगी।
दयाशंकर सिंह ने कैबिनेट बैठक के बाद जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र की स्थापना के लिए पहले ढाई एकड़ भूमि की जरूरत होती थी। संशोधित व्यवस्था में इसे 3,500 वर्ग मीटर निर्धारित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नया निर्धारित क्षेत्रफल एक एकड़ से कम है। इस तरह जमीन के आकार को लेकर पहले लागू अनिवार्यता में महत्वपूर्ण कमी की गई है। इस बदलाव का सीधा संबंध केंद्र स्थापित करने के लिए आवश्यक भूखंड के आकार से है। जिन इच्छुक आवेदकों के पास ढाई एकड़ से कम जमीन है, उनके लिए संशोधित क्षेत्रफल की शर्त प्रासंगिक होगी। हालांकि, केवल पर्याप्त जमीन उपलब्ध होने को केंद्र खोलने की अंतिम अनुमति नहीं माना जा सकता। स्थापना से जुड़ी अन्य लागू आवश्यकताएं भी संबंधित प्रक्रिया का हिस्सा रहेंगी।
जमीन के अलावा केंद्र तक पहुंचने वाली सड़क की चौड़ाई से संबंधित शर्त में भी राहत दी गई है। मंत्री ने बताया कि पहले सात मीटर चौड़ी सड़क की अनिवार्यता थी, जिसे अब शिथिल किया गया है। हालांकि, उन्होंने अपने इस बयान में सड़क की नई न्यूनतम चौड़ाई का उल्लेख नहीं किया। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि संशोधित व्यवस्था में कितनी चौड़ी सड़क स्वीकार की जाएगी।
दोनों बदलाव केंद्र की स्थापना के लिए स्थान चुनने से जुड़े हैं। भूमि की आवश्यकता कम होने से अपेक्षाकृत छोटे भूखंडों पर भी स्थापना की संभावना बन सकती है। वहीं सड़क की चौड़ाई में दी गई छूट का वास्तविक दायरा संशोधित शर्तों का विस्तृत विवरण सामने आने पर स्पष्ट होगा। मंत्री ने फिलहाल इन दो प्रमुख बदलावों की जानकारी साझा की है। कैबिनेट बैठक के बाद दिए बयान में केंद्र खोलने की आवेदन प्रक्रिया, शुल्क या मंजूरी की समयसीमा में किसी परिवर्तन की जानकारी नहीं दी गई। नई व्यवस्था कब से प्रभावी होगी और पहले से लंबित आवेदनों पर इसका किस प्रकार उपयोग होगा, इसका उल्लेख भी इस संक्षिप्त प्रतिक्रिया में नहीं है।
दयाशंकर सिंह की जानकारी के अनुसार, अब भूमि की न्यूनतम आवश्यकता 3,500 वर्ग मीटर होगी और सात मीटर सड़क की अनिवार्यता में ढील मिलेगी। इच्छुक आवेदकों के लिए संशोधित दिशा-निर्देशों में सड़क तथा अन्य शर्तों का विवरण महत्वपूर्ण रहेगा।
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